Jagadishwar Chaturvedi at Barabanki
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जनता के राम, जनता के हवाले : विहिप ने ने मंदिर निर्माण के नाम पर करोड़ों का जो चंदा वसूला है उसे वह तुरंत भारत सरकार के खजाने में जमा कराए

जनता के राम, जनता के हवाले : विहिप ने ने मंदिर निर्माण के नाम पर करोड़ों का जो चंदा वसूला है उसे वह तुरंत भारत सरकार के खजाने में जमा कराए

It becomes the responsibility of the central government that no VHP person be placed in the trust

अब राममंदिर केन्द्र सरकार निर्मित ट्रस्ट बनाएगा। मंदिर की जगह भी कोर्ट ने तय कर दी है, अतः विश्व हिन्दू परिषद ने मंदिर निर्माण के नाम पर करोड़ों का जो चंदा वसूला है उसे वह तुरंत भारत सरकार के खजाने में जमा कराए.। केन्द्र सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि ट्रस्ट में विहिप का कोई भी व्यक्ति न रखा जाए। ट्रस्ट में धर्मनिरपेक्ष और प्रशासनिक दक्षता पूर्ण लोग रखे जाएं।राममंदिर का नए सिरे नक्शा -मॉडल आदि बनाने के लिए प्रसिद्ध वास्तुकारों की मदद मिल जाए जिससे मंदिर की संरचना में धर्मनिरपेक्ष वातावरण की अनुभूति महसूस की जा सके।

राममंदिर का जजमेंट (Judgment of ram temple) धर्मनिरपेक्षता के परिप्रेक्ष्य को आधार बनाकर लिखा गया है, उन संगठनों और विचारधाराओं की इस जजमेंट में तीखी आलोचना है जिन्होंने बाबरी मसजिद के बारे में सफेद झूठ बोला था। अतः ट्रस्ट की संरचना में जजमेंट की स्प्रिट का ख्याल रखा जाए।

राममंदिर के जजमेंट ने राममंदिर पर आर-पार की लड़ाई लड़ने वाले सभी रंगत के लोगों की धारणाओं और विचारों को अस्वीकार किया है।

राममंदिर का जजमेंट विशेष संवैधानिक व्यवस्था का इस्तेमाल करके लिखा गया है, यह असामान्य जजमेंट है। इस जजमेंट में मूलतः रामलला के जन्मस्थान का स्वामित्व हिन्दू-मुसलिम पक्षों से छीनकर केन्द्र सरकार के हवाले कर दिया गया है, जो सही कदम है।

अनेक बार तर्क और प्रमाण से अदालत में फैसले नहीं होते। पहले भी कई बार भावनाओं को ख्याल में रखकर फैसले हुए हैं, मसलन् इंदिरा गांधी की हत्या के नाम पर जिस सिख सैनिक को फांसी दी गयी, वस्तुतः उसके लिए सुप्रीम कोर्ट में कोई ठोस प्रमाण नहीं था फिर भी फांसी दी गयी। अनेक निर्दोष मुसलमानों को आतंकवादी के नाम पर पुलिस ने जेलों में 10 से 15 साल तक विभिन्न अदालतों के जरिए सजा के नाम पर बंद करके रखा लेकिन अंत में पता चला कि वे तो निर्दोष हैं और सुप्रीम कोर्ट ने उनको छोड़ा। इस तरह की अधिकांश मुसलिम गिरफ्तारियां एक खास तरह के मुसलिम घृणा प्रचार से प्रभावित रही हैं और अनेक जज भी उनसे प्रभावित होकर जजमेंट लिखते रहे हैं। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अनेक निर्दोष मुसलमानों को बरी किया है। इस तरह के अनेक फैसले हैं जिन पर कायदे से नजर रखकर ही हम अपनी राय दें।

Ram temple now belongs to the general public and not to any particular organization

सुप्रीम कोर्ट ने कानून के सामने उपलब्ध अनेक प्रमाणों की अवहेलना करके रामलला को अंत में केन्द्र सरकार के हवाले कानून के जरिए ही किया है। इस विवादित जमीन की मालिक अब केन्द्र सरकार यानी भारत की जनता है। राममंदिर अब आम जनता का है न कि किसी संगठन विशेष का। जिसके लिए 70साल से विभिन्न संगठन और व्यक्ति मुकदमा लड़ रहे थे।

There is no Political victory of majoritarianism in Ayodhya Verdict

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ निश्चित तौर पर बधाई की हकदार है कि उसने सबसे जटिल राजनीतिक मुकदमे का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के साथ समझौता किए बिना फैसला दिया। मैं उन तमाम लोगों से असहमत हूँ जो इस जजमेंट में बहुसंख्यकवाद की राजनीतिक विजय देख रहे हैं।

यह सच है मोदी सरकार बहुसंख्यकवाद की राजनीति कर रही है लेकिन मोदी सरकार और भारत राष्ट्र और उसकी संवैधानिक संस्थाओं को हमें एकमेक नहीं करना चाहिए। मोदी-आरएसएस आज हैं सत्ता में कल नहीं रहेंगे।

भारत का संचालक है संविधान, न कि मोदी सरकार। The governing body of India is the Constitution, not the Modi government.

मोदी सरकार ने संविधान बदला नहीं है। मोदी सरकार संविधार को क्षतिग्रस्त करने की पूरी कोशिश कर रही है लेकिन अभी भी संविधान और उसकी धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक-समाजवादी आस्थाएं और उसके घोषित लक्ष्य जस के तस बने हुए हैं। मोदी सरकार बड़ी बर्बरता से आम जनता के हको, छात्रों,नागरिकों के संवैधानिक हकों पर हमले कर रही है और इसके लिए वह संवैधानिक रास्तों का ही इस्तेमाल कर रही है। इन सबके खिलाफ आवाज उठाएं,जनता को गोलबंद करें। सुप्रीमकोर्ट पर बहुसंख्यकवाद के पक्ष में चले जाने का आरोप न लगाएं।

राम जनता के थे, उनको आरएसएस का न बनाएं।

बहुसंख्यकवाद चाहेगा कि राम को आरएसएस से नत्थी कर दिया जाए। यह गलत होगा, इससे बचने की जरूरत है।

जगदीश्वर चतुर्वेदी

About जगदीश्वर चतुर्वेदी

जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व जवाहर लाल नेहरूविश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

One comment

  1. Dr. Pyara Lal Garg

    Temple should be managed by a shrine board on behalf of Government of India as is being managed by Mata Mansa Devi Mandir near Chandigarh by District administration constituted shrine board trust and the offerings are not the property of any individual. offerings in navratras etc so as to quantity of Gold silver and cash offerings are released to press even . NIRMOHI AKHARA SHOULD ALSO NOT BE REPRESENTED

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