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भाजपा के लिये भीतरघात तो झामुमो के लिये गैर आदिवासी मतदाता को पक्ष में करना सबसे बड़ी चुनौती

भाजपा के लिये भीतरघात तो झामुमो के लिये गैर आदिवासी मतदाता को पक्ष में करना सबसे बड़ी चुनौती

रांची (शाहनवाज़ हसन) : वर्ष 2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव (2014 Jharkhand Assembly Elections) में भाजपा 37 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी वहीं एनडीए गठबंधन 42 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफ़ल रहा था। हालांकि यह संख्या तब और बढ़ गई जब बाबूलाल मरांडी की पार्टी झाविमो के विधायक भाजपा में शामिल हो गये थे।

वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव इसलिये भी महत्वपूर्ण रहा कि 2000 में स्वतंत्र राज्य का दर्जा पाने वाले झारखंड को पहली बार स्थि‍र सरकार का ताज मिला था।

वर्ष 2014 विधानसभा चुनाव में झारखंड में मोदी का जादू वोटरों के सिर चढ़कर बोला रहा था वहीं शि‍बू सोरेन की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति‍ मोर्चा को 19 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दुमका से हार का सामना करना पड़ा था। वहीं झारखंड विकास मोर्चा के संस्थापक बाबू लाल मरांडी गिरिडीह और धनवाड़ दोनों सीटों से हाथ धो बैठे थे जबकि उनकी पार्टी 8 सीटें पाकर तीसरी बड़ी पार्टी बनी थी।

झामुमो महागठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में है।

झामुमो के प्रमुख गढ़ संथाल और सिंहभूम में भाजपा की सेंधमारी के बाद पार्टी के लिये सबसे बड़ी चुनौती उन सीटों को लेकर है जहाँ से झामुमो की टिकट पर सीट जीत कर झामुमो विधायक भाजपा में शामिल हो गये हैं। साथ ही तमाड़ और रांची सीट पर झामुमो अपना खाता खोलने की तैयारी में है।

भाजपा के लिये सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के टिकट से महरूम रहने वाले बन सकते हैं।

कांग्रेस एवं झामुमो से भाजपा में शामिल होने वाले विधायक भाजपा का टिकट तो हासिल कर लेंगे लेकिन उनके समक्ष विपक्षी की भूमिका में उनके अपने ही दल के नेता होंगे, भाजपा के लिये इस चुनाव में भीतरघात सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। वहीं झामुमो के लिये गैर आदिवासी मतदाता को रिझा पाना आसान नहीं रहेगा। झामुमो को अल्पसंख्यक समुदाय की नाराज़गी का भी सामना करना पड़ सकता है विशेषकर कोल्हान एंव छोटानागपुर क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदाय जीत और हार में बड़ी भूमिका अदा करते आये हैं।

झारखंड वर्ष 2014 चुनाव में क्षेत्रवार जीतने वाले उम्मीदवारों की पूरी सूची-

1) ईचागढ़- साधु चरण महतो (बीजेपी)

2) कांके- डॉ. जीतू चरण राम (बीजेपी)

3) कोडरमा- डॉ. नीरा यादव (बीजेपी)

4) कोलेबिरा- एनोस एक्का (झारखंड पार्टी)

5) खूंटी- नीलकंठ सिंह मुंडा (बीजेपी)

6) खरसांवा- दशरथ गागराई (जेएमएम)

7) खिजरी- रामकुमार पाहन (बीजेपी)

8) गढ़वा- सत्येन्द्र नाथ तिवारी (बीजेपी)

9) गुमला- शिवशंकर उरांव (बीजेपी)

10) गाण्डे- जयप्रकाश वर्मा (बीजेपी)

11) गिरिडीह- निर्भय कुमार शाहाबादी (बीजेपी)

12) गोड्‌डा- रघु नंदन मंडल (बीजेपी)

13) गोमिया- योगेन्द्र प्रसाद (जेएमएम)

14) घाटशिला- लक्ष्मण टुडू (बीजेपी)

15) चक्रधरपुर- शशिभूषण सामाड़ (जेएमएम)

16) चतरा- जय प्रकाश सिंह भोगता (बीजेपी)

17) चन्दनकियारी- अमर कुमार बाउरी (जेवीएम)

18) चाईबासा- दीपक बिरुवा (जेएमएम)

19) छतरपुर- राधाकृष्ण किशोर (बीजेपी)

20) जगन्नाथपुर- गीता कोड़ा (जय भारत समानता पार्टी)

21) जुगसलाई- राम चंद्र सहिस (आजसु पार्टी)

22) जमुआ- केदार हजरा (बीजेपी)

23) जमशेदपुर पश्चिम- सरयू राय (बीजेपी)

24) जमशेदपुर- रघुबर दास (बीजेपी)

25) जरमुण्डी- बादल (कांग्रेस)

26) जामताड़ा- इरफान अंसारी (कांग्रेस)

27) जामा- सीता मुर्मु उर्फ सीता सोरेन (जेएमएम)

28) झरिया- संजीव सिंह (बीजेपी)

29) टुन्डी- राज किशोर महतो (आजसु पार्टी)

30) डुमरी- जगरनाथ महतो (जेएमएम)

31) डाल्टनगंज- आलोक कुमार चौरसिया (जेवीएम)

32) तमाड़- विकास कुमार मुंडा (आजसु पार्टी)

33) तोरपा- पौलुस सुरीन (जेएमएम)

34) दुमका- लुईस मरांडी (बीजेपी)

35) देवघर- नारायण दास (बीजेपी)

36) धनबाद- राज सिन्हा (बीजेपी)

37) धनवार- राज कुमार यादव (सीपीआई-एमएल)

38) नाला- रवीन्द्र नाथ महतो (जेएमएम)

39) निरसा- अरूप चटर्जी (मार्क्सिस्‍ट कोऑर्डिनेशन)

40) पाकुड़- आलमगीर आलम (कांग्रेस)

41) पांकी- बिदेश सिंह (कांग्रेस)

42) पोटका- मेनका सरदार (बीजेपी)

43) पोड़ैयाहाट- प्रदीप यादव (जेवीएम)

44) बगोदर- नागेन्द्र महतो (बीजेपी)

45) बड़कागांव- निर्मला देवी (कांग्रेस)

46) बरकठा- जानकी प्रसाद यादव (जेवीएम)

47) बेरमो- योगेश्वर महतो (बीजेपी)

48) बरहैट- हेमन्त सोरेन (जेएमएम)

49) बरही- मनोज कुमार यादव (कांग्रेस)

50) बहरागोड़ा- कुणाल षड़ंगी (जेएमएम)

51) बाघमारा- दुलू महतो (बीजेपी)

52) बिशुनपुर- चमरा लिंडा (जेएमएम)

53) बिश्रामपुर- रामचंद्र चन्द्रवंशी (बीजेपी)

54) बोकारो- बिरंची नारायण (बीजेपी)

55) बोरियो- ताला मरांडी (बीजेपी)

56) भवनाथपुर- भानु प्रताप शाही (नवजवान संघर्ष मोर्चा)

57) मझगांव- निरल पुरती (जेएमएम)

58) मधुपुर- राज पालीवार (बीजेपी)

59) मनिका- हरिकृष्ण सिंह (बीजेपी)

60) मनोहरपुर- जोबा मांझी (जेएमएम)

61) महगामा- अशोक कुमार (बीजेपी)

62) महेशपुर- स्टीफन मरांडी (जेएमएम)

63) मांडू- जय प्रकाश भाई पटेल (जेएमएम)

64) मान्डर- गंगोत्री कुजूर (बीजेपी)

65) रांची- चन्द्रेश्वर प्रसाद सिंह (बीजेपी)

66) राजमहल- अनंत कुमार ओझा (बीजेपी)

67) रामगढ़- चन्द्र प्रकाश चौधरी (आजसु पार्टी)

68) लातेहार- प्रकाश राम (जेवीएम)

69) लिट्टीपाड़ा- डॉ. अनिल मुरमू (जेएमएम)

70) लोहरदगा- कमल किशोर भगत (आजसु पार्टी)

71) शिकारीपाड़ा- नलिन सोरेन (जेएमएम)

72) सरायकेला- चाम्पाई सोरेन (जेएमएम)

73) सारठ- रंधीर कुमार सिंह (जेवीएम)

74) सिन्दरी- फुलचंद मंडल (बीजेपी)

75) सिमडेगा- विमला प्रधान (बीजेपी)

76) सिमरिया- गणेश गन्झु (जेवीएम)

77) सिल्ली- अमित कुमार (जेएमएम)

78) सिसई- दिनेश उरांव (बीजेपी)

79) हजारीबाग- मनीष जैश्वल (बीजेपी)

80) हटिया- नवीन जयसवाल (जेवीएम)

81) हुसैनाबाद- कुशवाहा शिवपूजन मेहता (बीएसपी)

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