JNU photo tweeted bu Umar Khalid
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संघ के लोग तो अनपढ़ता के मास्टर हैं, उनके जमाने में शिक्षा का ढांचा टूटना है, जेएनयू उदाहरण है

संघ के लोग तो अनपढ़ता के मास्टर हैं, उनके जमाने में शिक्षा का ढांचा टूटना है, जेएनयू उदाहरण है

RSS’s future agenda of education is nationalism, spiritualism, Indianism, Hinduism and illiteracy.

आरएसएस का शिक्षा का भावी एजेण्डा है राष्ट्रवाद, अध्यात्मवाद, भारतीयता, हिन्दुत्व और अनपढ़ता। उसके बाद सारा देश मूल्यभक्ति से सराबोर हो जाएगा!! मीडिया इस मूसलाधार मूल्य वर्षा में जेएनयू के प्रति घृणा का छोंक लेकर शामिल हुआ है।

हम संघ और उनके फेसबुक मित्रों से कहना चाहते हैं वे हमारा अतीत का नालंदा-विक्रमशिला विश्वविद्यालयों जैसा गौरव लौटा दें! कांग्रेस ने जो शिक्षा व्यवस्था बनायी है उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दो!! सारा देश कांग्रेस निर्मित शिक्षा व्यवस्था ने नष्ट कर दिया है !! भारत के मूल्य नष्ट कर दिए हैं!! भाजपा को बहुमत मिला है तो उसका देश को भारतीय गरिमा में लौटाने का तन, मन, धन से प्रयास होना चाहिए !! जेएनयू – एएमयू आदि जैसे विश्वविद्यालय बंद कर दिए जाएं और नालंदा-विक्रमशिला का युग वापस दिला दो!! वरना संघ परिवार मूल्यों के नाम पर भारतीय जनता के साथ धोखाधड़ी बंद करे।

संघ के शिक्षा प्रकल्प के चरित्र को देखें और भाजपा शासित राज्यों में चल रहे विश्वविद्यालयों को देखें तो साफ समझ में आ जाएगा कि संघ की शिक्षा के निर्माण में कम शिक्षा को खोखला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

हम जानना चाहते हैं गुजरात-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में प्रचंड बहुमत के बावजूद कोई भी राष्ट्रीय स्तर या विश्वस्तर की सुविधाओं और ज्ञानी विद्वानों से युक्त विश्वविद्यालय भाजपा सरकारें क्यों नहीं बना पायीं ?

संघ परिवार का लक्ष्य देश की शिक्षा को उन्नत बनाना नहीं है अपितु लक्ष्य है शिक्षा में हमने जो अब (सारी कमियों के बावजूद) तक हासिल किया है, उन सबको नष्ट करना।

जेएनयू में आरएसएस मिशन तेजी से सफलता की ओर बढ़ रहा है, नए-पुराने सभी छात्रनेताओं को झूठे मुकदमों में फंसा दिया गया है, हरेक विभाग में नियोजित ढंग से अकादमिक तोड़फोड़ जारी है, प्रशासनिक इकाईयों ने सभी पुराने कन्वेंशन और फैसले लेने के नियमों को तोड़ दिया है, वीसी के बहाने संघी आतंक हर जगह कायम है।

बोलना मना, आंदोलन करना मना, शिक्षकों पर झूठे मुकदमों और आरोपों की इन दिनों वर्षा हो रही है, शिक्षक-छात्र सभी बेहाल हैं। रग-रग में भगवा मार महसूस कर रहे हैं, आपातकाल में भी जेएनयू में इतना उत्पीड़न नहीं हुआ जितना मोदी सरकार आने के बाद हुआ है।

इन दिनों आरएसएस वाले जेएनयू के कायाकल्प में लगे हैं, बड़ी संख्या में वहां शिक्षकों की नियुक्तियां हुई हैं, तय मानिए अगले पांच साल में जेएनयू देश के सबसे बुरे विश्वविद्यालयों में गिना जाएगा।

जेएनयू में इस समय संघी कैडरों की दनादन भर्ती हो रही है, छांट-छांटकर डफर लाए जा रहे हैं। भूल जाइए जेएनयू पहले क्या था। कम से कम मोदी के शासन का यह बड़ा योगदान इतिहास में जरूर दर्ज होगा कि जेएनयू के अकादमिक चरित्र को नष्ट करके डफर विश्वविद्यालय के रूप में उसका रूपान्तरण किया गया।

शिक्षा के हीरो वे लोग हैं जो अपने अकादमिक संस्थान और कक्षा में नियमित रहें, पूरा समय दें. यदि कक्षा एक घंटे की है तो पूरा एक घंटा कक्षा में रहें, कोई भी विद्यार्थी जब भी मिलना चाहेगा तो मिलें, बिना तैयारी के कभी कक्षा न लें। सामान्य तौर पर बातें करें, कोई अहंकार नहीं, ऊँच-नीच, भेदभाव का भाव नहीं। साथ ही विद्यार्थी में विषय के प्रति जिज्ञासा और ज्ञान पाने की आकांक्षा पैदा करे। लेकिन संघ के लोग तो अनपढ़ता के मास्टर हैं। उनके जमाने में शिक्षा का ढांचा टूटना है। जेएनयू उदाहरण है।

जगदीश्वर चतुर्वेदी

JNU 2019, admission JNU, Jawaharlal Nehru University,

About जगदीश्वर चतुर्वेदी

जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व जवाहर लाल नेहरूविश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

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