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संघ की विचारधारा व राजनीति का करेगा भंडाफोड़ बदायूँ में बना लोकमोर्चा

लोकतांत्रिक समतामूलक विचार को देगा बढ़ावा बदायूँ में लोकमोर्चा

बिजली के दाम बढ़ाने के सरकारी प्रस्ताव के विरोध में 28 जून को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करेगा लोकमोर्चा

बदायूँ (उ. प्र.), 23 जून 2019, जनमुद्दों पर साझा संघर्ष के लिए आज बदायूँ में लोकमोर्चा का गठन हुआ। मालवीय आवास गृह पर हुई संयुक्त बैठक में लोकमोर्चा के नाम पर आमसहमति बनी और संचालन को 30 सदस्यीय संयोजक मंडल बनाया गया, साथ ही संघर्ष के मुद्दों पर चर्चा हुई। आगामी 28 जून को बिजली के दाम बढ़ाने के भाजपा की योगी सरकार के प्रस्ताव के विरोध में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करने का निर्णय हुआ।

वरिष्ठ अधिवक्ता ओंकार सिंह, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि डॉ. शैलेश पाठक, सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ता अजीत सिंह यादव, रिटायर्ड प्रबंधक सुनीत सक्सेना, पूर्व एडीओ महेंद्र सिंह, पूर्व डीजीसी प्रेम प्रकाश मौर्य, एडवोकेट जियाउर रहमान समी, एडवोकेट जितेंद्र कश्यप, राजवीर सिंह, शिक्षक अनिल यादव, सुरज मिश्रा, समाजसेवी वीरेंद्र जाटव, विक्रम सिंह तोमर, राकेश वर्मा, अनेश पाल, अजय पाठक, अनुपम यादव, सामेन्द्र यादव, वेदवीर, अनूप सिंह, आदित्य कुमार लोध, रामबाबू कश्यप समेत तीस सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज के लोगों को लोकमोर्चा के संयोजक मंडल में सर्वसम्मति से चुना गया।

अनिल कुमार यादव ने बैठक का संचालन किया और वरिष्ठ अधिवक्ता ओंकार सिंह ने प्रस्ताव पेश किए।

उक्त सभी वक्ताओं ने कहा कि आरएसएस(संघ)/ भाजपा की विचारधारा और राजनीति को परास्त करने में मौजूदा विपक्ष विफल रहा है। इसलिए लोकतंत्र व साझी शहादत और साझी विरासत की संस्कृति की रक्षा और शहीदों के सपनों के धर्मनिरपेक्ष समतामूलक समाज के निर्माण के लिए एक साझे संघर्ष मंच की आवश्यकता है। लोकमोर्चा ऐसा ही साझा मंच है। यह जनता की समस्याओं को शासन और प्रशासन के सामने मजबूती से उठाएगा। स्थानीय समस्याओं से लेकर राष्ट्रीय स्तर व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की परिघटनाओं में अपना हस्तक्षेप करेगा, सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध और जनहित में बनाई गई नीतियों एवं कानूनों के सही क्रियान्वयन के लिए संघर्ष करेगा, जनहित के शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, वैचारिक और आर्थिक सवालों को उठाएगा।

लोकमोर्चा सरकार व प्रशासन के कामकाज को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने व सरकार के द्वारा किए गए वायदों को पूरा कराने, नागरिकों के लोकतंत्र, समानता, स्वतंत्रता, बहुलता, समावेशी विकास के अधिकारों के प्रचार-प्रसार के लिए उचित हस्तक्षेप करेगा। साथ ही संघ/भाजपा की विचारधारा और राजनीति का भंडाफोड़ कर जनता को लोकतांत्रिक व जनपक्षधर समतामूलक विचारधारा से जोडेगा।

लोकमोर्चा समाज के हर तबके किसान, नौजवान, मजदूर, व्यापारी, कर्मचारी, महिला, गरीब को न्याय दिलाने को संघर्ष करेगा। लोकमोर्चा लोकतांत्रिक जन आंदोलन को खड़ा करेगा जो लोकतंत्र में विश्वास करते हुए अन्याय का विरोध करने में सक्षम हो।

संघर्ष के मुद्दों पर हुई चर्चा में जिन मुद्दों पर आंदोलन चलाने की सहमति बनी उनमें शिक्षा और चिकित्सा का राष्ट्रीयकरण करने निजीकरण बन्द करने। सबको समान व निशुल्क शिक्षा व चिकित्सा सुविधा देने। सरकार के बिजली दरों में भारी वृद्धि के प्रस्ताव को वापस लेने, बड़े बकायेदार पूँजीघरानों, सरकारी दफ्तरों से बिजली बिल की वसूली करने, पूंजीपतियों को नाजायज फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही थर्मल बैकिंग बन्द करने। सभी पात्रों को प्रधानमंत्री आवास देने,अपात्रों को दिया आवास वापस लेने। सभी को राशनकार्ड देने और हर यूनिट पर 10 किलो प्रतिमाह राशन देने। खाली पड़े सभी पदों पर तत्काल समयबद्ध और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने, भर्तियों में हुए भ्रष्टाचार के दोषियों को सजा देने, रोजगार को मौलिक अधिकार बनाने और बेरोजगारों को हर माह दस हजार रु बेरोजगारी भत्ता देने। किसानों को ब्याजमुक्त कर्ज देने, भूमिहीन किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में शामिल करने और इसे 6 हजार सलाना से बढ़ाकर साठ हजार रु सालाना करने। बदायूँ होकर लखनऊ और दिल्ली को प्रतिदिन दो रेलगाड़ी चलाने। पूंजीपतियों पर सम्पत्ति कर लगाने, पूँजीघरानों के राइट आफ किए कर्जों व बकाया कर्जों को वसूल करने, बैंकों से कर्ज लेकर भागे माल्या, नीरव मोदी समेत सैकडों लुटेरों को देश में वापस लाकर सजा देने व कर्ज बसूली करने, शिक्षा अधिकार अधिनियम को लागू करवाकर सभी निजी कान्वेंट स्कूलों में 25 फीसद गरीबों को प्रवेश देने, निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर रोक लगाने, मनरेगा को लागू कर साल में 200 दिन काम देने व काम न देने पर बेरोजगारी भत्ता देने। शहरी गरीबों को काम की गारंटी का कानून बनाने। किसानों की फसल खरीद समर्थन मूल्य पर हर गांव में करने, कृषि आधारित उद्योग लगाने। लघु सीमांत किसानों की सहकारी खेती कराने को विशेष प्रोत्साहन देने समेत तमाम मुद्दे शामिल हैं।

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