Organizing Kabir Jayanti at Hindi University

संत कबीर संस्‍कार के सशक्‍त वाहक – प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल

वर्धा, 18 जून 2019 : संत कबीर (Saint Kabir) को हिंदी साहित्‍य (Hindi Sahitya) में भुलाया नहीं जा सकता। 700 वर्ष पूर्व सामाजिक समानता की दिशा में उनके कार्य आज के समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्‍होंने सहज भाषा का प्रयोग कर लोगों को संस्‍कारित करने का कार्य किया। कबीर के शाश्‍वत पक्ष (Kabir’s eternal side) को समझने के लिए उनके विचारों पर विमर्श की आवश्‍यकता है।

उक्‍त विचार महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल (Vice Chancellor of Mahatma Gandhi International Hindi University Prof. Rajneesh Kumar Shukla) ने व्‍यक्‍त किए। वे विश्‍वविद्यालय में कबीर जयंती के उपलक्ष्‍य में सोमवार 17 जून को ‘कबीर, कबीर साहित्‍य और आज का समाज’ विषय पर आयोजित संगोष्‍ठी की अध्‍यक्षता करते हुए बोल रहे थे। संगोष्‍ठी का आयोजन महादेवी वर्मा सभा कक्ष में किया गया।

हिंदी विश्‍वविद्यालय में कबीर जयंती का आयोजन Organizing Kabir Jayanti at Hindi University

इस अवसर पर कार्यकारी कुलसचिव प्रो. के. के. सिंह, भाषा विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. हनुमान प्रसाद शुक्‍ल, साहित्‍य विद्यापीठ की अधिष्‍ठाता प्रो. प्रीति सागर, संस्‍कृति विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. नृपेंद्र प्रसाद मोदी मंचासीन थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने विवि की कबीर हिल पर संत कबीर की प्रतिमा पर माल्‍यार्पण कर अभिवादन किया। साथ ही उन्‍होंने कबीर हिल पर अवस्थित दादू दयाल, रैदास, गुरूनानक एवं संत तुकाराम महाराज की प्रतिमाओं पर पुष्‍पार्पण कर अभिवादन किया।

सत्‍य का उद्घाटन करने वाले कवि थे संत कबीर Saint Kabir was the poet inaugurating the truth

इस अवसर पर प्रो. हनुमान प्रसाद शुक्‍ल ने कहा कि संत कबीर सत्‍य का उद्घाटन करने वाले कवि थे। वे अनुभव आधारित सत्‍य की बात करते रहे। समांगिकरण की दिशा में उनके कार्य आधुनिक समाज के लिए भी लागू होते हैं।

उन्‍होंने कहा कि सामाजिक उन्‍नति के पुरोधा के रूप में संत कबीर भारतीय परंपरा के साथ सीधा टकराव करते रहे।

प्रो. प्रीति सागर ने संत कबीर को सामान्‍य जनों की पीड़ा जानने वाले कवि की संज्ञा दी। उन्‍होंने कहा कि उनकी वाणी ने भक्ति काल के दौर में सामाजिक सुधार की दिशा में अस्‍त्र का काम किया और आज के समाज में उन्‍हें याद करना समय की आवश्‍यकता है।

प्रो. के. के. सिंह ने कहा कि सामंती व्‍यवस्‍था के साथ टकराव से कबीर का व्‍यक्तित्‍व तैयार हुआ। उनके दोहे संवादधर्मी है और समाज की बेहतरी का संदेश उनमें निहित होता है। वे गहरे मानवीय संस्‍पर्श का एहसास कराते हैं। उनकी कविता नवीन संदर्भ में भी बचाती है।

इस दौरान डॉ. सुषमा लोखंडे की पुस्‍तक ‘कबीर : काल व कर्तृत्‍व’ का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया।

डॉ. लोखंडे ने संत कबीर और संत तुकाराम के संदर्भ में अपनी बात रखी।

कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे ने किया। इस अवसर पर अध्‍यापक, अधिकारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।

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