आती-जाती रंग-बिरंगी सत्ता और न्यायपालिका का चरित्र आज भी मूलतः ब्राह्मणवादी ही बना हुआ है

वर्धा 17 जनवरी। हैदराबाद विश्वविद्यालय University of Hyderabad के छात्र रोहित वेमुला Rohit Vemula की सांस्थानिक हत्या institutional killing की तीसरी बरसी पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय Mahatma Gandhi International Hindi University, वर्धा, महाराष्ट्र कैम्पस स्थित गांधी हिल पर 'दलितों पर हिंसा और न्याय का सवाल' विषयक संगोष्ठी सम्पन्न हुई।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आजादी के सात दशक बाद भी दलितों पर जातिवादी हिंसा की घटनाएं incidents of racial violence on Dalits रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। भगवा शक्तियां यथास्थितिवाद को बरकरार रखने की हर कोशिश में कामयाब दिखाई दे रही हैं। आज पूंजीवाद और ब्राह्मणवाद का मजबूत गठजोड़ बन गया है। निजीकरण आदि को बढ़ावा देकर दलितों-वंचितों के उन्नति के रास्ते बंद कर दिए जा रहे हैं। आती-जाती रंग-बिरंगी सत्ता और न्यायपालिका का चरित्र character of judiciary आज भी मूलतः ब्राह्मणवादी ही बना हुआ है। इसी का परिणाम है कि दलितों-आदिवासियों व अल्पसंख्यकों को न्याय से वंचित किया जा रहा है। रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या के जिम्मेदार सभी लोग छुट्टा घूम रहे हैं। किंतु दलितों-वंचितों के हक-अधिकार के आंदोलनों को बर्बरतापूर्वक कुचला जा रहा है। रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या से लेकर भीमा कोरेगांव व सहारनपुर में दलितों पर हिंसा करने वाले सवर्ण-सामन्ती ताकतों पर कार्रवाई के बजाय दलित नेताओं व बुद्धिजीवियों पर ही कार्रवाई की जा रही है। दलितों-अल्पसंख्यकों के नरसंहार के तमाम मामलों में दोषियों को न्यायपालिका द्वारा बरी कर दिया गया है और पीड़ितों को इंसाफ से वंचित कर दिया गया है। ब्राह्मणवादी शक्तियां संविधान के स्थान पर मनुवादी विधान को थोंपने की कोशिश कर रही हैं। संविधान के साथ छेड़छाड़ जारी है। संविधान व लोकतंत्र पर किया गया हर हमला दलितों-वंचितों के खिलाफ है।

वक्ताओं ने आगे कहा कि दलितों-वंचितों के संवैधानिक हक-अधिकारों के भी अपहरण की कोशिशें तेज हुई हैं। संविधान की मूल भावना के खिलाफ जाकर गरीबी के आधार पर सवर्ण आरक्षण पर रंग-बिरंगी राजनीतिक दलों की सहमति व खामोशी सवर्ण वर्चस्व की मौजूदगी की ही पुष्टि करती हैं। संविधान व लोकतंत्र पर हमले तेज हुए हैं। इस चुनौतीपूर्ण वक्त में दलितों-वंचितों-शोषितों को नए सिरे से संघर्ष को तेज करने की आवश्यकता है।

उक्त मौके पर आयोजित संगोष्ठी को विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देवराज, डॉ. रूपेश कुमार सिंह, शोध छात्रा उपासना गौतम, चन्दन सरोज, रविचंद्र, पुष्पेंद्र, कौशल यादव, अजय कुमार आदि ने संबोधित किया। सभा का संचालन विपिन और धन्यवाद ज्ञापन पुष्पेंद्र ने किया।

मौके पर धम्मरतन, देशदीपक भाष्कर, शिवानी, चैताली, वैभव पिम्पलकर, आशु बौद्ध, सोनम बौद्ध, रक्षा महाजन, राधेश्वरी, सोनाली, परमेश्वर मिरजे, भगत नारायण महतो, औरंगजेब सहित दर्जनों छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

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(विज्ञप्ति)

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