Swaraj India Party President / Convenor Yogendra Yadav,

इस कांग्रेसी शिक्षक ने योगेंद्र यादव की लगाई ऐसी क्लास, कि शर्म से पानी-पानी हो जाएँगे यादवजी

नई दिल्ली, 16 जुलाई 2019. कभी समाजवादी नेता किशन पटनायक (Socialist leader Kishan Patnaik) के शिष्य रहे और अब समाजवाद को अरविंद केजरीवाल के श्री चरणों में समर्पित कर चुके स्वराज इंडिया पार्टी के अध्यक्ष/ संयोजक योगेंद्र यादव (Swaraj India Party President / Convenor Yogendra Yadav) आजकल कांग्रेस और राहुल गांधी के मुफ्त के सलाहकार बनकर उभरे हैं। उन्हें जब फुरसत मिलती है राहुल गांधी को एक चिट्ठी लिख मारते हैं कि कांग्रेस को कैसे पुनर्जीवित किया जाए (How to revive the Congress)। हाल ही में उन्होंने फिर राहुल गांधी को कुछ नसीहत दे डाली। हालांकि प्राप्त जानकारी के मुताबिक यादव जी अभी तक ग्राम पंचायत का भी चुनाव नहीं जीते हैं, लेकिन बुद्धू बक्से की बदौलत राष्ट्रीय सेलिब्रिटी हैं। अब लखनऊ के एक शिक्षक और कांग्रेस पार्टी के एक सदस्य संदीप वर्मा ने खुला पत्र लिखकर योगेंद्र यादव की क्लास लगाई है।

आप भी पढ़ें संदीप वर्मा का योगेंद्र यादव को खुला पत्र

Sandeep Verma’s open letter to Yogendra Yadav

प्रिय योगेन्द्र जी

मीडिया में जारी राहुल जी के नाम लिखा गया आपका पत्र अभी-अभी मेरी नजरों से गुजरा। टीवी पर चेहरा दिखाकर प्रसिद्धि पाए लोगों में आपका नाम एक लम्बे समय से शीर्ष पर बना हुआ है। पत्र पढ़ा जाना लाजिमी था। जहाँ तक मेरी जानकारी है, आप वर्तमान में जमीनी राजनीति में कांग्रेस से दो-दो हाथ कर रही एक राष्ट्रीय पार्टी के स्वयंभू अध्यक्ष है। अपनी ही राजनीतिक पार्टी के ब्रांड एम्बेसडर भी हैं।

मोदी जी की पार्टी में भले ही लोग अमित शाह जी को जानते हों, मगर आपकी पार्टी में आपके दूसरे महत्वपूर्ण हो रहे नेता के बारे में मेरी जानकारी फिलहाल है जीरो बटा सन्नाटा है।  आशा है इसे आप मेरी सूचना की जानकारी के तहत मांगी गयी जानकारी के तहत मांगी गयी जानकारी समझकर मुझे या देश को प्रदान करेंगे।

इससे पहले कि अपनी बात मैं आगे रखूं,  यह बता दूँ कि लोकतंत्र और नागरिक समानता के जींस मेरे खून में नेहरू और कांग्रेस की परम्परा से हमेशा से रहे हैं। कांग्रेस का समय-समय पर विरोध करना भी नेहरू की अभिव्यक्ति की सुरक्षा की देन रहा है। अपने इन्हीं नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए मैंने कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए केंद्र में भाजपा शासन आने के बाद कांग्रेस की सदस्यता लेकर वंचित समाज के नागरिक अधिकारों के लिए अपनी पहल की है।

मेरा साफ़ मानना है अगर कोई खुद को कांग्रेस का ईमानदार समर्थक समझता है तो उसके पास कांग्रेस पार्टी की सदस्यता नहीं लेने की कोई नैतिक वजह हो ही नहीं सकती है।

अब आगे बात करते हैं।

आप कांग्रेस पार्टी और राहुल जी के हितचिन्तक हैं,  यह पढ़कर मुझे हर कांग्रेस समर्थक की तरह जानकर बेहद ख़ुशी हुई है। भले ही बारह करोड़ भारतीय नागरिकों ने वोट देकर कांग्रेस और राहुल गांधी जी के नेतृत्व में अपनी पूरी आस्था दिखाई हो,  इसके बावजूद पब्लिक में खुद को कांग्रेस का हितचिन्तक कहने वाले हर शख्स को हम कांग्रेस समर्थक बेहद सम्मान की नजर से देखते हैं, और अपनी इस आदत को हम छोड़ नहीं सकते हैं। हम कांग्रेसी इस सम्बन्ध में उस साधू की तरह हैं जो उस चींटी को भी पानी से निकालने की हर समभव कोशिश करता है जो उसे निकलते ही पहला काम काटने का करती है। अगर चींटी नादान होने के कारण अपना काटने का स्वभाव नहीं छोड़ सकती है तो हम कांग्रेसी तो गाँधी जी से समाज के अंतिम व्यक्ति की चिंता करने का मन्त्र लेकर कांग्रेसी बने हुए हैं।

हाँ तो बात आपके राहुल जी और कांग्रेस के शुभचिंतक होने की भूमिका से शुरू हुई थी। जिस पर हर कांग्रेस समर्थक आपका पूरा सम्मान करता है। अब बात आती है अगर-मगर पर,  दिल से सम्मान करने के लिए अदने से कांग्रेसी जरूर छोटी-मोटी शर्तें जरूर रखते हैं। कार्यकर्ता जो ठहरे, आखिर जमीनी लड़ाई तो उन्हें ही लड़नी होती है। अपने सेनापति की नीतियों का पालन करते उनके सम्मान की रक्षा का भारी भरकम दायित्व जो उन्हीं पर होता है।

कांग्रेस के कार्यकर्ता को ही यह निर्णय करना होता है कि उसका मित्र या शुभचिंतक बनकर सद्भाव का कोई पैगाम या सुझाव लाया है या किसी आदमखोर भेड़िये का संदेशवाहक बनकर अपना जाल फैलाने आया है।

एक अनुभवी सामाजिक और एनजीओवादी होने के कारण आप इस संदेह को शत-प्रतिशत समझ सकते हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि आप एक अदने से कांग्रेस समर्थक के संदेह को अनुचित या आधारहीन नहीं समझेंगे।

अगर मेरी याददाश्त सही है तो आप भी उसी गैंग के समर्थक ही नहीं बल्कि दाहिने बाएं हाथ जाने वाले सदस्य थे, जिसने कांग्रेस पर कोयला, टूजी, विदेशों में काला धन के लाखों करोड़ के घोटालों पर चीख-चीख कर आसमान सर पर उठा लिया था। हमारे जैसे कांग्रेस के प्रति पूरा सम्मान रखने वाले समर्थक तक आपकी बौद्धिकता के शिकार होकर कांग्रेस की सरकार को शक की नजर से देखने लगे थे।

सनद रहे यह वह समय था जब मैं स्वयं कांग्रेस पार्टी का सदस्य भी नहीं था और ना ही मेरे परिवार का कोई सदस्य कभी सदस्य रहा था। हाँ,  सभी समझदार और प्रगतिशील भारतीयों की तरह कुछ विशेष प्रचार वाले काल के अतिरिक्त अपना राजनितिक समर्थन कांग्रेस को जरूर देते रहे थे।

अगर हमारे जैसे कांग्रेस समर्थकों को कांग्रेस पार्टी के प्रति थोड़ा सा भी शक और शुबहा पैदा हुआ तो उसकी भी वजह साफ थी। आपने एक लंबा समय कांग्रेस की छत्रछाया में रहते हुए ही अपने सामाजिक राजनीतिक चिन्तक होने का प्रचार पाया था। कांग्रेस के विरोध में बोली गयी हर बात में आपका कांग्रेस का इतिहास उसमें विश्वसनीयता देती रही थी।

विदेशों के जमा छब्बीस लाख करोड़ वापस लाने का प्रचार हो या लाखों करोड़ का टूजी और कोयला घोटाले का भारी भरकम मीडिया का प्रचार रहा हो, जिसमें आपकी उसी विश्वसनीयता ने देशी घी की छौंक लगाकर शिक्षित मध्यवर्ग को एक ऐसे पाले में धकेल दिया जिस पाले का आप भी डरते सहमते हुए ही सही,  अपना विरोध दर्ज कराते रहे हैं।

निश्चित रूप से पुरानी बातें दोहराना या उनकी शिकायत करना किसी भी तरह से एक सार्थक विमर्श को अपने रास्ते से विमुख कर सकती है,  मगर गयी गुजरी बातों को दोहराना और याद दिलाना एक बहुत बड़ी मजबूरी की वजह से है।

वजह वही है क्या सद्भावना का सन्देश लेकर आया व्यक्ति किसी हानिकारक पशु के लिए चारा बनाने का सन्देश लेकर कोई चतुर लोमड़ी तो नहीं आई है। जाने क्यों हमारे साहित्यकारों ने लोमड़ी जैसे पशु पर ऐसे धोखेधड़ी वाले स्वभाव का आरोप लगाया है जिसका उल्लेख कर रहा हूँ। मेरी समझ में पशुओं के प्रति यह मानसिक अमानुषता की भी निंदा होनी चाहिए। इसलिए चतुर लोमड़ी शब्द का इस्तेमाल करते हुए लोमड़ी से मैं क्षमा मांग रहा हूँ।

मेरा मानना है देशी विदेशी साहित्य से ही ऐसे किसी व्यक्तित्व का चुनाव होना किया जाना चाहिए। आशा है अपने किसी उल्लेख में मेरी इस अज्ञानता दूर करने के लिए आप जरूर मदद करेंगे।

हाँ,  तो आपकी सद्भावना पत्र पर संदेह की वजह बहुत ही छोटी सी है। पांच साल के गुजरे इतिहास ने यह साफ़ कर दिया है कि टीवी पर चमकने वाले कुछ बौद्धिक क्रान्तिकारियों ने साम्प्रदायिक ताकतों के इशारे पर कांग्रेस पर जैसे आरोप लगाए थे, वे अदालत में अपनी मुंह की खा चुके हैं। अदालतों ने ना सिर्फ उन्हें फर्जी और झूठा करार दिया है, बल्कि उन्हीं आरोपों के दम पर आई नयी सरकार ऐसे किसी नुकसान की कानी कौड़ी की वसूली भी कहीं से नहीं करके अपने पूर्व आरोपों को झूठा और मक्कारी भरा साबित कर चुकी है।

कांग्रेस का अदना सा समर्थक होने के कारण मेरा कोई भी सवाल सरकार से तो नहीं है,  मगर उन बौद्धिक क्रान्तिकारियों से जरूर पूछने का बनता है कि जब अदालतों में कांग्रेस पर लगाये गए आरोप फर्जी साबित हुए हैं तो उसी जोर-शोर से आप जैसे टीवी पर चमकाए जा रहे बौद्धिक क्रन्तिकारी अपनी ईमानदारी के तहत अपने फर्जी आरोपों के लिए कांग्रेस से ना सही मगर जनता से माफ़ी कब मांग रहे हैं।

आप कांग्रेस पार्टी के अपराधी हैं या नहीं,  पार्टी ने आप जैसों को माफ़ किया या नहीं,  मेरा सरोकार सीमित है। मगर जिस जनता ने आपकी बात पर भरोसा करके कांग्रेस पार्टी पर संदेह किया, वही जनता क्या आपसे उन्हीं आरोपों से बरी होने पर आपसे आपकी प्रतिक्रिया जानने का हक़ नहीं रखती है।

कांग्रेस पर झूठे और मनगढंत आरोप लगाने वालों के साथ आप खड़े रहे हैं,  उन्हीं लोगों ने आपको अपमानित करते हुए अपने संगठन से भी निकाला है,  मगर इसके बावजूद कांग्रेस और राहुल जी को सलाह देने के लिए आपको किस ताकत से इशारा मिलता है इसे जानने में जरूर जनता के एक बड़े वर्ग को रूचि है।

आपने कांग्रेस में किसी साझा रोडमैप की कमी की और इंगित किया है। हमें आपकी इस समझदारी वाली बात से कतई आश्चर्य नहीं है। जब आप फर्जी और मनगढ़ंत आरोपों को लेकर कांग्रेस के विरोध का परचम लहराने चले थे तो आपके उस समय के गैंग का साझा रोडमैप में आपकी हिस्सेदारी और समझ की सफलता तो दिखती ही है। गैंग का धडो में टूटना तो खैर सत्ता की अंतहीन लड़ाई है जिसकी तरफ मेरा कोई ईशारा ही नहीं है।

आपके तत्कालीन गैंग का साझा रोडमैप कांग्रेस की सरकार पर आरोप मढना था,  जिस पर आपका गैंग सफल भी हुआ और इसके लिए आप भी निश्चित ही बधाई के पात्र भी रहे हैं। हाँ, सत्ता की भागीदारी को लेकर रोडमैप में जरूर साझा समझ नहीं थी,  इसीलिए गैंग का एक हिस्सा आज तक लड़-भिड़ रहा है।

आपने एक और एक महत्वपूर्ण आरोप कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर लगाया है, जिसमें आपने उन्हें भाजपा कार्यकर्ताओं के बराबर खड़ा कर दिया है। आपने अपने इस वार से तो एक ही झटके में कांग्रस के बारह करोड़ वोटरों को अपमानित कर दिया है। और निश्चित तौर पर आपके यही वह शब्द हैं, जिनसे मेरे जैसा कांग्रेस समर्थक आहत और अपमानित महसूस कर रहा है।

इस दौर में कांग्रेस का हर वोटर देश में समरसता, भाईचारे और संविधान की सुरक्षा के लिए कांग्रेस के साथ खड़ा है और उसे वोट किया है। आपको अपने इस आरोप पर तो बिना कोई शर्त और इफ बट के माफ़ी मांगनी ही बनती है। आपकी इस नासमझी को हम कांग्रेसी उदार गांधीवादी हृदय से माफ़ भी कर देंगे।

आपके पत्र का लब्बो लुआब यह है कि कांग्रेस आप जैसे स्वयंभू अध्यक्षों वाली पार्टियों के सामने अपने बारह करोड़ समर्थकों का विश्वास चांदी की तश्तरी में रखकर भेंट कर दे और कांग्रेस समर्थक कांग्रेस पार्टी पर अपने विश्वास को स्वयंभू अध्यक्षों वाली पार्टियों के हवाले कर दें। वह भी ऐसी पार्टियाँ जिनका विगत में जनता को मूर्ख बनाने और उन्हें ठगने का इतिहास रहा है।

आपका मीडिया में प्रचारित यह पत्र भले ही राहुल जी को संबोधित हो,  मगर मूलतः यह पत्र कांग्रेस समर्थकों को उनकी संविधान समर्थक भूमिका को अपमानित करने का टूल है।

मेरा दृढ विश्वास है कि कांग्रेस का घोर आलोचक भी कांग्रेस के वोटर समूह को भाजपा के वोटरों के समकक्ष रखने की गलती नहीं कर सकता है। कांग्रेस की विचारधारा समाज के अंतिम व्यक्ति की चिंता को समर्पित है वही भाजपा के बारे में ऐसा कहना बौद्धिक बदमाशी मात्र है।

कांग्रेस और भाजपा भारत की राजनीति में दो विपरीत ध्रुव हैं, जिनके मूल उद्देश्य ही आपस में विरोधाभास रखते हैं। आप चाहें तो आगे किसी दिन अपनी इस समझ को साफ़ करने के लिए किसी भी कांग्रेस के अदने से कार्यकर्ता से मदद ले सकते हैं। वैसे भी जानकारी लेने से कोई भी छोटा नहीं हो जाता है।

बेहतर हो गणतंत्र को खतरे में झोंकने के लिए जिम्मेदार अन्ना आन्दोलन से किसी भी रूप में जुड़े लोग अपनी-अपनी गलतियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगना शुरू करें। यकीन जानिये गणतंत्र बचने की शुरुआत का पहला कदम यही से शुरू होता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ जमीन पर हजारों हजार वे कार्यकर्त्ता जो कभी अन्ना आन्दोलन में ही देश का भविष्य तलाश रहे थे,  अपने आसपास के लोगों से अपनी गलतियों के लिए माफ़ी मांगना बहुत पहले से शुरू कर चुके हैं। माफ़ी मागने की यह शुरुआत अब शीर्ष स्तर से जुड़े लोगों की ही होनी बाकी है।

बिना हिचक कहना चाहूँगा कि आपका नाम चैनल के उन चमकते हुए क्रांतिकारी बुद्धिजीवियों में शामिल है जिनके माफ़ी मांगने की शुरुआत से ही देश में आमूल चूल परिवर्तन का रहस्य छिपा है। गणतंत्र की रक्षा का बीज आप जैसे लोगों की माफ़ी मांगने में भी छिपा है।

आपका ही

एक पूर्व प्रशंसक

संदीप वर्मा

कांग्रेस पार्टी का एक सदस्य

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