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डरना किसी से भी नहीं, गुरू से भी नहीं, मंत्र से भी नहीं, लोक से भी नहीं वेद से भी नहीं – आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

Acharya Hazari Prasad Dwivedi

आज आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी (Acharya Hazari Prasad Dwivedi) का जन्मदिन है- काशी की संस्कृति – विद्वत्ता और कुटिल दबंगई विश्वनाथ त्रिपाठी ने ‘व्योमकेश दरवेश’ में काशी के बारे में लिखा है – “काशी में विद्वत्ता और कुटिल दबंगई का अद्भुत मेल दिखलाई पड़ता है। कुटिलता, कूटनीति, ओछापन, स्वार्थ- आदि का समावेश विद्बता में हो जाता है। काशी में प्रतिभा के …

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