Tag Archives: कबीर

‘वर्ण-संघर्ष’ के सिवा कुछ नहीं था बुद्ध और ब्राह्मण का संघर्ष

Kabir कबीर

नोट – प्रसिद्ध दलित चिंतक  कॅंवल भारती का यह आलेख “कबीर का ब्राह्मण से संवाद” September 4, 2012 को हस्तक्षेप पर प्रकाशित हुआ था ब्राह्मण गुरु जगत का, साधु का गुरु नाहिं। उरझि-पुरझि करि मरि रह्या, चारिउ वेदा माँहि।। (क.ग्र. पृष्ठ 28) कहु पाँडे कैसी सुचि कीजै। सुचि कीजै तौ जनम न लीजै।। (वही, पृष्ठ 129) ब्राह्मण के साथ कबीर …

Read More »

अपने युग की जन-विरोधी सामाजिक विसंगतियों पर जोरदार प्रहार किया कबीर ने

Kabir कबीर

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, समाज में अपने जीवन का अस्तित्व बनाए रखने के लिए उसे संघर्ष करना पड़ता है। यह संघर्ष उसे मानव से भी करना पड़ता है और प्रकृति से भी। फल-स्वरूप उसे नाना प्रकार के अनुभव होते हैं। हम जिस समाज में रहते हैं, सांस लेते हैं, जिस परिवेश को जीते हैं, उससे अनभिज्ञ कैसे रह सकते …

Read More »