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स्मृतिलोप से हट कर यथार्थ की ओर : हिंदी समाज में हीरा डोम की तलाश

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स्मृतिलोप से हट कर यथार्थ की ओर : हिंदी समाज में हीरा डोम की तलाश –सुभाष गाताडे ( अकार, हिंदी समाज पर केंद्रित अंक में जल्द ही प्रकाशित) ‘देवताओं, मंदिरों और ऋषियों का यह देश ! इसलिए क्या यहां सबकुछ अमर है ? वर्ण अमर, जाति अमर, अस्पृश्यता अमर ! ..युग के बाद युग आए ! बड़े बड़े चक्रवर्ती आये …

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