Tag Archives: Emergency

आपातकाल से बुरे हालात : अयोध्या जाते वक्त संदीप पांडेय, प्रो. राम पुनियानी और साथियों समेत गिरफ्तार

आपातकाल से बुरे हालात : अयोध्या जाते वक्त संदीप पांडेय, प्रो. राम पुनियानी और साथियों को रोका गया

लखनऊ, 17 अगस्त 2019. कल 16 अगस्त 2019 को कश्मीर के लोगों के समर्थन में पूर्व घोषित एक घंटे के मोमबत्ती प्रदर्शन को रोकने के लिए रिहाई मंच अध्यक्ष एडवोकेट मुहम्मद शुऐब, मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पांडेय को अन्य साथियों के साथ अपने घरों में पुलिस द्वारा नजरबंद किया गया था. आज फिर 17 अगस्त को अयोध्या के रामजानकी …

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यह अघोषित इमर्जेंसी है, जो इंदिरा गांधी की घोषित इमर्जेंसी से ज्यादा खतरनाक है

Rajendra Sharma राजेंद्र शर्मा। लेखक वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार हैं।

इमर्जेंसी की 44वीं सालगिरह पर लोकसभा में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi’s address in the Lok Sabha on the 44th anniversary of the Emergency) अगर इमर्जेंसी को याद नहीं करते, तो ही अचरज की बात होती। आखिरकार, 17वीं लोकसभा (17th Lok Sabha) में पहले से भी कमजोर हो गए विपक्ष में से भी मुख्य विपक्षी …

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आपातकाल के भुक्तभोगी की जुबानी, कैसे रिश्वतखोरों और जमाखोरों को ठीक करने का अनुशासन पर्व ही थी इमरजेंसी

Shri Ram Tiwari श्रीराम तिवारी

श्रीमती इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाया (Mrs. Indira Gandhi imposed Emergency on 25th June, 1975 in the country)। इससे संविधान और लोकतंत्र का बाल भी बांका नहीं हुआ।  बल्कि जिनकी औकात चपरासी बनने की नहीं थी, इस नासमिटे आपातकाल की वजह से वे भी सत्ता का स्वाद चखने में सफल रहे।  इतना ही नहीं …

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आपातकाल विरोधी आंदोलन से आरएसएस की ग़द्दारी

RSS Half Pants

भारत में आपातकाल घोषणा की 44वीं वर्षगांठ : आपातकाल विरोधी आंदोलन से आरएसएस की ग़द्दारी भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Prime Minister Indira Gandhi) ने 25-26 जून, 1975 को देश में आंतरिक आपातकाल घोषित किया था। यह 19 महीने तक लागू रहा। इस दौर को भारतीय लोकतांत्रिक राजनीति में काले दिनों के रूप में याद किया जाता है। इंदिरा …

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मरे हुए लोकतंत्र की लाश ढोते हुए हम राम नाम सत्य हैं जहां-जहां जगेंद्र बोलेंगे जिंदा जला दिये जायेंगे

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

पलाश विश्वास– वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए जनसत्ता कोलकाता से अवकाश प्राप्ति के बाद उत्तराखंड के दिनेशपुर में ठिकाना। …

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