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तमाम पीढ़ियों को प्रेमचंद के रचना-कर्म ने दिशा प्रदान की

Munshi Premchand

शैलेंद्र चौहान प्रेमचंद ने सन् 1936 में अपने लेख ‘महाजनी सभ्यता’ में लिखा है कि ‘मनुष्य समाज दो भागों में बँट गया है। बड़ा हिस्सा तो मरने और खपने वालों का है, और बहुत ही छोटा हिस्सा उन लोगों का था जो अपनी शक्ति और प्रभाव से बड़े समुदाय को बस में किए हुए हैं। इन्हें इस बड़े भाग के …

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