क्या तेजस्वी को लगता है डर चुनाव बाद बुआ-बबुआ-दीदी चले जाएंगे भाजपा के साथ ?

नई दिल्ली, 06 फरवरी (हस्तक्षेप डेस्क)। क्या राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को यह खतरा महसूस होने लगा है कि लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election)  के बाद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party), बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) और तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress), भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के साथ चले जाएंगे ? तेजस्वी ने ऐसा स्पष्ट तो नहीं कहा है लेकिन उन्होंने जो कहा है उससे ऐसा प्रतिध्वनि निकलती प्रतीत होती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजद नेता तेजस्वी यादवने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) को एक हलफनामे पर यह वादा करते हुए हस्ताक्षर करना चाहिए कि लोकसभा चुनाव के बाद वह सरकार बनाने के लिए उन 23 विपक्षी पार्टियों से मदद नहीं लेंगे, जिन्हें उन्होंने ‘भ्रष्ट' और ‘चोर' करार दिया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तेजस्वी ने कहा,

‘आज भाजपा के सभी नेता कह रहे हैं कि विपक्षी पार्टियों का संघीय मोर्चा बनाने के लिए चोरों का एक झुंड साथ आया है। मैं मोदीजी, अरुण जेटलीजी, अमित शाह जी और रवि शंकर प्रसाद जी से आग्रह करूंगा कि वह 23 विपक्षी पार्टियों में से किसी के साथ भी सरकार बनाने के लिए मदद नहीं लेंगे।'

अब तेजस्वी ने जो कहा उसका सीधा इशारा सपा, बसपा और तृणमूल की तरफ जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक ममता का समर्थन करने वाले 23 दलों में चुनाव बाद भाजपा से मिल जाने की आशंका सबसे ज्यादा इन्हीं तीन दलों से है, क्योंकि मायावती पहले भी भाजपा के साथ तीन बार सरकार बना चुकी हैं, गुजरात जनसंहार के बाद नरेंद्र मोदी का प्रचार कर चुकी हैं। दलित चिंतक एस आर दारापुरी तो खुलेआम कह चुके हैं कि उन्हें कोई गारंटी दे दे कि मायावती चौथी बार भी भाजपा से नहीं मिल जाएँगी। इसी तरह ममता, भाजपा की स्वाभाविक सहयोगी रही हैं और ये आरोप लग रहे हैं कि ममता भाजपा के साथ नूरा कुश्ती करके बंगाल में भाजपा को मुख्य विपक्ष स्थापित करना चाहती हैं ताकि कांग्रेस और लेफ्ट को नुकसान पहुंचाया जा सके। ममता को भी चुनाव बाद भाजपा के साथ जाने से कोई गुरेज नहीं है। शक समाजवादी पार्टी पर भी हो सकता है कि वह भी चुनाव बाद अपरोक्ष रूप से भाजपा की मदद करे। हालंकि ममता कांग्रेस पर हमला करने से बच रही हैं, अखिलेश दबी जुबान में कांग्रेस पर हमला करते हैं और मायावती मुखर होकर कांग्रेस पर हमला कर रहे हैं। मोदी सरकार के भ्रष्टाचार पर सपा-बसपा दोनों खामोश हैं।

बता दें तेजस्वी यादव विपक्ष के उन नेताओं में से एक हैं जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) से धरना स्थल पर मुलाकात की और जनसभा को संबोधित किया।

इससे पहले तेजस्वी बीती 19 जनवरी को बनर्जी की ओर से आयोजित विपक्ष की रैली में भी हिस्सा ले चुके हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने विपक्षी पार्टियों की तुलना ‘चोरों के एक झुंड' से की थी और इन सभी पर भ्रष्टाचार में लिप्त होकर देश का धन लूटने का आरोप लगाया था।

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