ट्रंप के नस्ली उन्मादी जिहाद के हक में हैं राजनीति, राजनय और मीडिया

असम में बंगाली शरणार्थियों की रैली उल्फा के खिलाफ, अब जेलभरो का ऐलान। आखिरी चरण के मतदान से पहले अमेरिका ने कहा, पाकिस्तान और बांग्लादेश खतरनाक और भारत में भी आतंकवादी सक्रिय और यूपी मे मुठभेड़ शुरु...

हाइलाइट्स
  • क्योंकि भारत में भारतीयों का सफाया फासिज्म का नस्ली राजकाज है
  • असम में बंगाली शरणार्थियों की रैली उल्फा के खिलाफ, अब जेलभरो का ऐलान।
  • आखिरी चरण के मतदान से पहले अमेरिका ने कहा, पाकिस्तान और बांग्लादेश खतरनाक और भारत में भी आतंकवादी सक्रिय, मध्य प्रदेश और यूपी में मुठभेड़ शुरु

 

पलाश विश्वास

The US on Tuesday issued a travel warning for its citizens visiting Pakistan,  Afghanistan and Bangladesh,  and said extremist elements are also ‘active’ in India.

आखिरी चरण के मतदान से पहले अमेरिका ने कहा, पाकिस्तान और बांग्लादेश खतरनाक और भारत में भी आतंकवादी सक्रिय, मध्य प्रदेश और यूपी में मुठभेड़ शुरु।

कानपुर के रेल दुर्घटना में पाकिस्तानी हाथ होने के दावे के बीच मध्य प्रदेश में ट्रेन के डिब्बे में धमाका और उसके साथ साथ अमेरिकी चेतावनी और फतवे के बीच जगह-जगह आतंकवादियों से मुठभेड़ का सिलसिला बेहद खतरनाक घटनाक्रम है।

फिलहाल टीवी पर आंखों देखा एनकाउंटर जारी है। जाहिर है कि भारत में भी आतंकवाद के खिलाफ युद्ध तेज होना है, तो ऐसे में ट्रंप के राजकाज के खिलाफ हमारी जुबां खामोश है।

अजब गजब मीडिया इस विचित्र भारतवर्ष का है।

अमेरिका में एक के बाद एक भारतीय मूल के मनुष्यों पर हमले जारी हैं। लेकिन बनारस के अलावा भारतीय मीडिया का कहीं फोकस है तो वह पाकिस्तान है या फिर चीन है। अमेरिका के सात खून माफ हैं।

मीडिया को कोई फर्क नहीं पड़ता कि मुस्लिम देशों के साथ भारत के प्रतिबंधित न होने के बावजूद मुसलमानों और अश्वेतों के खिलाफ अमेरिका के श्वेत आतंकवादी धर्मयुद्ध में गैर मुसलमान भारतीय नागरिकों पर एक के बाद एक हमले क्यों हो रहे हैं।

यही मीडिया साठ के दशक से संघ परिवार के तत्वावधान में असम और समूचे पूर्वोत्तर में विदेशी हटाओ नारे के साथ भारत के दूसरे हिस्सों से वहां गये लोगों और पूर्वी बंगाल से आकर बसे विभाजन पीड़ितों के खिलाफ उग्रवादी नस्ली हमलों का समर्थन करता रहा है।

कल असम में निखिल भारत बंगाली उद्वास्तु समन्वय समिति की ओर से असम में अल्फाई राजकाज के प्रतिरोध में अभूतपूर्व रैली की है। जिसके बारे में समन्वय समिति के महासचिव अंबिका राय ने लिखा हैः

This is Nikhil bharat Bengali udbastu samanway samiti convention cum Rally at Dhamaji district,  Assam on 6.3.2017. More than One lakh people assembled at the rally n convention. This program was only attended by two district only. AASU (All Assam Student Association) is spreading venom against Nikhil bharat with the false allegation to stop the movement as they never assessed the popularity of Nikhil bharat. They want Nikhil bharat central leadership should get arrested by Sarbanonda Sonwal 's administration. Tomorrow or day after we shall proceed from all states to Assam to get arrested voluntarily in protest against any sort of false allegation.

जाहिर है कि सोनोवाल को हिंदू शरणार्थियों के अटूट समर्थन के बावजूद असम में आसू और अल्फा के निशाने पर बंगाली हिंदू शरणार्थी हैं।

शरणार्थी रैली के बाद जेल भरो आंदोलन के बाद क्या हालात होंगे और उल्फा की पृष्ठभूमि के सोनोवाल पर शरणार्थियों का भरोसा कितना खरा रहेगा,  इससे बड़ा सवाल यह है कि उल्फाई राजकाज में यातना शिविर में तब्दील असम में गैर असमिया समुदायों की जान माल कितनी सुरक्षित है और संघ परिवार के भरोसे अमन चैन का क्या होना है। फिर भी असम की जमीन पर उल्फा के खिलाफ यह प्रतिरोध आंदोलन अभूतपूर्व है, लेकिन आगे क्या होगा, उसपर नियंत्रण किसका होगा, फिक्र इसकी है।

अमेरिका ही नहीं, हमले अन्यत्र भी शुरु होने का अंदेशा है कि अमेरिका के बाद न्यूजीलैंड में भी अपने देश वापस जाओ, की चेतावनी के साथ बिना मोहलत दिये भारतीय मूल के नागरिक पर हमला हो गया।

यह बेहद जल्द संक्रामक महामारी में तब्दील होने जा रहा है और बजरंगी वाहिनी और उनके सिपाहसालारों से निवेदन हैं कि भारतीय होने का मतलब सिर्फ मुसलमान नहीं है।

फिर भी क्या मजाल की महामहिम ट्रंप की नस्ली भारतविरोधी मुहिम के खिलाफ भारत सरकार चूं भी करें क्योंकि पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करवाने की राजनय राजनीति दोनों ट्रंप समर्थक है। मीडिया भी ट्रंप के हक में है।

वैसे भारत वापस जाओ, के नारे सिर्फ विदेश में लग रहे हैं, ऐसा नहीं है।

असम और पूर्वोत्तर में भारत के बाकी हिस्सों के नागरिकों के खिलाफ नारा यही है और असम में भाजपा सरकार का राजकाज उल्फाई है तो गोरखालैंड से लेकर बाकी पूर्वोत्तर के केसरियाकरण के लिए संघ परिवार का क्षेत्रीय उग्रवाद के साथ चोली दामन का रिश्ता  है।

 भारतीय मुसलमानों को कश्मीर और पूर्वोत्तर और काफी हद तक उत्तराखंड और हिमाचल के भारतीय गैर नस्ली नागरिकों के साथ,  आदिवासियों के साथ और यूं कहें तो समूचे बहुजन समाज के साथ संघ परिवार न हिंदू मानता है और न भारतीय।

 देश में लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ लोकतांत्रिक आलोचना या सिर्फ आदिवासियों और बहुजनों के हक में मनुस्मृति के खिलाफ आवाज उठाने के लिए या दमन उत्पीड़न नरसंहार का विरोध करने के लिए या निरामिष ढंग से  सिर्फ धर्म निरपेक्षता,  विविधता, बहुलता,  नागरिक मानवाधिकारों,  विविधता,  रोजगार,  आजीविका की बात कहने पर तत्काल पाकिस्तान चले जाने का फतवा जारी हो जाता है।

मसलन ताजा जानकारी यह है कि माओवादियों से संबंध रखने के कारण डीयू के रामलाल आनंद कॉलेज से निलंबित चल रहे अंग्रेजी के प्राध्यापक जीएन साईबाबा को अब दोषी पाया गया है और ऐसी संभावना है कि अब उनको नौकरी से निष्काषित किया जा सकता है।  हालांकि,  इस बाबत अंतिम फैसला कॉलेज की गवर्निग बॉडी लेगी।  

डीयू के कई शिक्षकों का साईबाबा से संबंध था और कुछ शिक्षक तो गढ़चिरौली जेल में उनसे मिलने भी गए थे। प्राप्त सूचना के अनुसार,  ये शिक्षक भी पुलिस के रडार पर हैं।  

ऐसे में अमेरिका ने बाकी चुनिंदा मुस्लिम देशों को अमेरिका में प्रतिबंधित कर देने के बाद अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश को डेंजरस बता देने के बाद भारत में भी आतंकवादियों के सक्रिय रहने के आरोप के साथ भारत यात्रा के खिलाH फतवे देने से मनुस्मृति के राजधर्म को कोई फर्क पड़ता नहीं है।

बल्कि संघी नजरिये से भारत में गैरहिंदुओं के सफाये के एजंडा के तहत आतंकवादियों से निबटने के लिए अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का न्यौता दिये जाने की राजनय का ही आफ हिंदू होने के नाते इंतजार करें तो आप वास्तव में हिंदू और भारतीय नागरिक दोनों हैं, वरना नहीं। ताजा घटनाक्रम इसीका संकेत है।

बनारस का राजकाज निबट गया है और राजधानी फिर नई दिल्ली में है। बाकी मंत्रिमंडल शायद दिल्ली में लौट आया है लेकिन प्रधानमंत्री बनारस से सीधे गुजरात लैंड कर रहे हैं क्योंकि  पीएम नरेंद्र मोदी आज से दो दिनों के गुजरात दौरे पर जा रहे हैं।

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