मशहूर होना बनाम सामाजिक सरोकार – एडवेंचर और बेवकूफी में अंतर होता है

आजकल मशहूर होने के लिए मेहनत या कार्य के प्रति समर्पण जरूरी नहीं है. ना ही उस कार्य का समाज के लिए उपयोगी होना आवश्यक है. मशहूर होने के लिए काफी है कि आप कोई ऐसी करामात करो जो सबको हैरानी में डाल सके....

अतिथि लेखक

 

किशोर

पिछले दिनों एक रशियन मॉडल विकी ओदिन्त्कोवा ने दुबई में एक बहुमंजिला गगनचुम्बी ईमारत से केवल अपने साथी के हाथ के सहारे लटक कर सबको अचम्भे में डाल दिया. इस कारनामे की विडियो बनाई गयी और इसे तमाम सोशल मीडिया साइट्स पर अपलोड कर दिया गया. सोशल मीडिया साइट्स पर यह विडियो वायरल हो गया और यह मॉडल रातों-रात मशहूर हो गयी.

मॉडल यह कारनामा करने को पूरी तरह स्वन्त्रत है पर मेरी राय में एडवेंचर और बेवकूफी में एक अंतर होता है और मैं इस कारनामे को बाद वाली श्रेणी में डालना चाहूँगा.

लोग जरूरी नहीं कि मेरी सोच से सहमत हो और सबकी इस बारे में अलग अलग राय हो सकती है. परन्तु मेरा प्रश्न यह है कि इस कारनामे के पीछे उद्देश्य क्या था. क्या इसका उद्देश्य एडवेंचर था ?

मुझे ऐसा नहीं लगता. मुझे इसके पीछे एक ही कारण नज़र आता है. और वह है रातों-रात मशहूर होने की चाहत. मुझे यह बताने की जरूरत नहीं है कि इस पेशे में मशहूर होना या सुर्ख़ियों में बना रहना कैसे आपकी आमदनी से जुड़ा हुआ है. कोई कह सकता है कि अलग अलग  पेशों में आमदनी बढ़ाने की अलग अलग रणनीति हो सकती है तो मैं स्पष्ट कर दूं कि रणनीतियों की शुचिता पर अलग से बातचीत हो सकती है और यहाँ मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता.

इस तरह से अपनी जान खतरे में डालने से कम समय में ज्यादा मशहूर होने के अलावा हांसिल क्या हुआ? क्या इससे समाज की बेहतरी के लिए कुछ प्राप्त हुआ? यह जरूरी है कि हम इस नज़रिए से इस घटना और ऐसी तमाम घटनाओ को देखें.

प्रश्न यह है कि मशहूर होने के लिए आप क्या करते हैं? मशहूर होने का एक रास्ता वह है जो आज तक के तमाम दर्शिनकों, वैज्ञानिकों, साहित्यकारों, कलाकारों या खिलाड़ियों ने अपनाया. वह रास्ता था कड़ी मेहनत और साधना का. यह सभी अपनी वर्षों की  कड़ी मेहनत के बाद मशहूर बने और इन्हें आजतक याद किया जाता है. इन्होने अपने काम से जो योगदान दिया वह समाज के लिए आज भी लाभदायक है.

दूसरा रास्ता है कोई हैरत अंगेज़ काम करके लोगों को हैरानी में डालने का और इसके जरिये मशहूर होने का. किसी गगन चुम्बी ईमारत से लटक कर आप समाज में क्या योगदान दे रहें हैं. आपका यह करामात हमारे समाज को बेहतर बनाने में क्या योगदान दे रहा है?

मशहूर होने के पीछे आपका मुख्य उद्देश्य क्या है ? सिर्फ अधिक पैसा कमाना या समाज में योगदान करना?

इन दर्शिनकों , वैज्ञानिकों, साहित्यकारों, कलाकारों या खिलाडियों का मुख्य उद्देश्य पैसा कमाना नहीं था. उनकी  अपने काम और समाज को बेहतर बनाने  के लिए लगन थी और उनकी इस लगन ने उन्हें मशहूर कराया और इस क्रम में कुछ ने पैसा भी कमाया. कुछ ऐसे भी थे जिनके काम को  उनके जीवन काल में मान्यता भी नहीं मिल सकी और ज़िन्दगी भर उन्हें  तंगहाली का सामना करना पड़ा. कुछ को तो सामाजिक बहिष्कार भी झेलना पड़ा. पर वह अपने कार्य के प्रति समर्पित थे और बिना मशहूर हुए,  आर्थिक फायदे को देखा बिना  और सामाजिक स्वीकृति की परवाह किये बिना  अपने कार्य में लगे रहे.

आजकल मशहूर होने के लिए मेहनत या कार्य के प्रति समर्पण जरूरी नहीं है. ना ही उस कार्य का समाज के लिए उपयोगी होना आवश्यक है. मशहूर होने के लिए काफी है कि आप कोई ऐसी करामात करो जो सबको हैरानी में डाल सके. फिर चाहे वह समाज के लिए उपयोगी हो या नहीं. यह बदलते समाज के बदलते मूल्यों का एक संकेतक है.

आज कुछ मूल्य उसको भी मशहूर बनाने पर तुले हैं जिनका समाज निर्माण में कोई योगदान नहीं है. अब यह हम पर है कि हम इन मूल्यों को अपनाएं या किसी को मशहूर बनाने से पहले यह जांचे कि उसका समाज निर्माण में क्या योगदान है.

(लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह विगत दो दशक से बाल अधिकारों पर काम कर रहे हैं।)

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