ब्लास्टिंग अफवाह - सचिन पायलट पर हाथ मारना चाहती है भाजपा?

जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक हलकों में अफवाहों का बाजार गर्म हो रहा है। बाजारवाद के दौर में मीडिया भी ऐसे बाजार का हिस्सा बनता दिख रहा है।...

तेजवानी गिरधर

जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक हलकों में अफवाहों का बाजार गर्म हो रहा है।

बाजारवाद के दौर में मीडिया भी ऐसे बाजार का हिस्सा बनता दिख रहा है।

प्रदेश के एक बड़े दैनिक समाचार पत्र में देश की राजधानी से लीड खबर आई कि राजस्थान में भाजपा अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट को अपने खेमे में शामिल करना चाहती है।

बताया गया कि उन्हें बाकायदा ऑफर भी दी जा चुकी है कि उन्हें केन्द्रीय मंत्री बना दिया जाएगा। हालांकि अभी तक सचिन ने इस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

बताया गया है कि भाजपा की कांग्रेस के ऐसे ही कुछ और चेहरों यथा मिलिंद देवड़ा व नारायण राणे पर भी भाजपा की नजर है।

है न विस्फोटक खबर या यूं कहिये ब्लास्टिंग अफवाह।

खबर में दम भरने के लिए बाकायदा तर्क भी दिया गया है। वो यह कि पिछले विधानसभा चुनाव में रसातल में पहुंच चुकी कांग्रेस को सजीव करने के लिए सचिन ने एडी से चोटी का जोर लगा रखा है। यह सच भी है।

वाकई सचिन की मेहनत के बाद आज स्थिति ये है कि इस धारणा को बल मिलने लगा है कि अगली सरकार कांग्रेस की ही होगी। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक लगातार गहलोत-गहलोत की रट लगाए हुए हैं। अर्थात रोटी तो पकाएं सचिन व खाएं गहलोत।

भाजपा सचिन व गहलोत के बीच की कथित नाइत्तफाकी का लाभ लेना चाहती है। वह सचिन के दिमाग में बैठाना चाहती है कि कांग्रेस के लिए दिन रात एक करने के बाद भी ऐन वक्त पर कांग्रेस गहलोत को मुख्यमंत्री बना सकती है। ऐसे में बेहतर ये है कि भाजपा में चले आओ।

राजस्थान वासियों के लिए यह खबर हजम करने के लायक नहीं है, मगर भाजपा ने उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में जो प्रयोग किया, उससे लगता है कि वह सत्ता की खातिर किसी भी हद तक जा सकती है। वैसे भी उसे अब कांग्रेसियों से कोई परहेज नहीं है। भाजपा व मोदी को पानी पी पी कर कोसने वालों से भी नहीं।

ज्ञातव्य है कि चुनाव से कुछ समय पूर्व ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा भाजपा में शामिल हो गई थीं। उसके सकारात्मक परिणाम भी आए। उन्हें बाकायदा ईनाम भी दिया गया। संभव है भाजपा ऐसा ही प्रयोग राजस्थान में दोहराना चाहती हो। वह जानती है कि सचिन इस वक्त राजस्थान में कांग्रेस के यूथ आइकन हैं। ऊर्जा से लबरेज हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता पर काबिज भी हो सकती है। अगर वह उन्हें तोडऩे में कामयाब हो गई तो राजस्थान में कांग्रेस की कमर टूट जाएगी। वे गुर्जर समाज के दिग्गज नेता भी हैं। उनके जरिए परंपरागत कांग्रेसी गुर्जर वोटों में भी सेंध मारी जा सकती है। हालांकि इस बात की संभावना कम ही है कि सचिन भाजपा का ऑफर स्वीकार करें, मगर इस खबर से यह संकेत तो मिलता ही है कि भाजपा राजस्थान में जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस में तोडफ़ोड़ के मूड में है।

जहां तक धरातल पर हो रही हलचल का सवाल है, एक ओर जहां ये माना जा रहा है कि अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो सचिन ही मुख्यमंत्री होंगे, वहीं दूसरी ओर गहलोत समर्थकों ने अभी हार नहीं मानी है। वे उनके समर्थन में मुहिम चलाए हुए हैं। सोशल मीडिया में इस पर बड़ा काम हो रहा है। वाट्स ऐप पर बाकायदा अपील करते हुए एक लिंक शेयर की गई है, जिस पर जा कर फार्म में अपना नाम, वाट्स ऐप नंबर, जिला, विधानसभा क्षेत्र, पता व ईमेल एड्रेस भरने को कहा गया है। यकीन न हो तो इस लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं:-

https://goo.gl/|yTPse

दूसरी ओर वाट्स ऐप ही एक खबर सचिन के पक्ष में धड़ल्ले से चल रही है, वो यह कि कांग्रेस हाईकमान ने सचिन को सीएम प्रोजेक्ट करने का फैसला कर दिया है। खबर जिस तरह से सधे हुए तरीके लिखी गई है, उससे यह आभास ही नहीं होता कि यह गढ़ी हुई है। जरा इस खबर कुछ पंक्तियों पर गौर कीजिए:-

हैडिंग- सचिन पायलट राजस्थान के सीएम प्रोजेक्ट, मिला फ्री हैंड, बांटेंगे टिकट, दिल्ली में हुआ फैसला

खबर- राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सचिन पायलट अब कांग्रेस का चेहरा होंगे। उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया है। साथ ही फ्री हैंड देते हुए टिकट बांटने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री और बंटाधर की छवि बना चुके गुरू दास कामत को चुनाव होने तक प्रदेश की राजनीति में हस्तक्षेप करने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। सोमवार को दिल्ली में राहुल गांधी के बंगले पर आयोजित की गई कांग्रेस हाईपॉवर कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। धौलपुर उपचुनाव में मिली करारी हार की समीक्षा के लिए आयोजित इस बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल बोरा, सुरेश पचौरी, अशोक गहलोत, शीला दीक्षित, अंबिका सोनी, मनीष तिवारी, कमलनाथ, कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बैठक मेें यह निष्कर्ष निकला कि उत्तर प्रदेश में पार्टी का कोई चेहरा न होने और सपा से गठबंधन हार का कारण रहा। जबकि पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में चुनाव लडऩे पर पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला। इसी को आधार बनाते हुए राजस्थान में सत्ता हासिल करने और गुटबाजी को समाप्त करने के लिए सचिन पायलट को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने का निर्णय लिया गया। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सचिन पायलट के नाम का प्रस्ताव रखा और मोतीलाल बोरा ने समर्थन किया।

पायलट के नाम को हरी झंडी मिलने के साथ ही राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब राजस्थान में चुनाव होने तक अशोक गहलोत का कोई दखल नहीं रहेगा। यदि उनका कोई समर्थक है तो उसे टिकट देने की अनुशंसा कर सकेंगे, लेकिन टिकट देना या न देना उनके हाथ में नहीं होगा।

है न ऐसी खबर कि मानो, लिखने वाला वहीं मौजूद रहा हो।

बहरहाल, प्रदेश की राजनीति गरमा रही है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे को केन्दीय विदेश मंत्री बनाने व उनके स्थान पर ओम माथुर को बागडोर देने की चर्चा हैं तो कांग्रेस में भी खींचतान की चर्चाएं आम हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, इस प्रकार की खबरें बहुत पलटियां खाएंगी।

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