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कभी भी हल्के में न लें पेटदर्द या अपच को, भारत में चौथा सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को होने वाला कैंसर है गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर

News on stomach cancer

नई दिल्ली, 1 जून। पेटदर्द को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर- gastrointestinal cancer (पेट की आंतों या पेट के कैंसर- stomach cancer) भारत में चौथा सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को होने वाला कैंसर बन गया है। पिछले साल जीआई कैंसर के 57,394 मामले सामने आए। यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा प्रभावित करता है।

Stomach cancer symptoms

चिकित्सक बताते हैं कि जीआइ कैंसर के ज्यादातर मरीजों को शुरुआत में गैर-विशिष्ट लक्षण होते हैं, जैसे पेट दर्द और असहजता होना, लगातार अपच बने रहना, मलोत्सर्ग की आदत में गड़बड़ी होना।

यह साइलेंट किलर के रूप में धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और शरीर के आंतरिक अंगों जैसे बड़ी आंत, मलाशय, भोजन की नली, पेट, गुर्दे, पित्ताशय की थैली, पैनक्रियाज या पाचक ग्रंथि, छोटी आंत, अपेंडिक्स और गुदा को प्रभावित करता है।

Stomach cancer diagnosis

मेदांता-द मेडिसिटी में इंस्टिट्यूट ऑफ डाइजेस्टिव एंड हेपोटोबिलरी साइंसेज में गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी के निदेशक डॉ. राजेश पुरी का कहना है,

“हमें जीआई कैंसर की प्रकृति के संबंध में जागरूकता और इसका जल्दी से जल्दी पता लगाने के लिए जांच कार्यक्रमों की उपलब्धता की काफी आवश्यकता है। अपर जीआई की स्क्रीनिंग, कोलोनोस्कोपी और एनबीआई एंडोस्कोपी (GI screening, colonoscopy, NBI endoscopy,) की मदद से जीआई कैंसर का जल्द से जल्द पता लगाने में मदद मिलती है। प्रतिरोधी पीलिया और पित्ताशय की थैली में कैंसर की पुष्टि सीटी स्कैन, एमआरआई और ईआरसीपी से नहीं होती। मेडिकल दखल जैसे कोलनगियोस्कोपी की मदद से कैंसर को देखने और उनके ऊतकों का परीक्षण करने में मदद मिलती है। इससे पित्ताशय की थैली के कैंसर का जल्द पता लगाया जा सकता है, जिसका किसी परंपरागत उपकरण या रूटीन जांच से इस कैंसर का पता नहीं लगाया जा सकता।”

Survival for stomach cancer

आईजीआईएमएस में गैस्ट्रोइंटेस्ट्रोलॉजी के हेड डॉ. वी. एम. दयाल का कहना है,

“चूंकि जीआई कैंसर रोग की स्थिति और लक्षणों के आधार अलग-अलग हो सकते हैं। इनमें अंतर करने के लिए और कैंसर के खास प्रकार का पता लगाने के लिए मरीजों की जल्द से जल्द जांच करना बेहद आवश्यक है। कोलनगियोस्कोपी की मदद से डॉक्टर पित्ताशय की थैली को देख सकते हैं और इससे उन्हें खास तरह के कैंसर का पता लगाने में मदद मिलती है। इससे वह शरीर में मौजूक ऊतकों और तरल पदार्थ के अध्ययन से किसी खास तरह के कैंसर की जड़ तक पहुंच सकते हैं और उसका उचित इलाज शुरू कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में 1 एमएम के चौड़े वीडियो कैमरा के साथ पतली और लचीली ट्यूब का इस्तेमाल कर डॉक्टर पित्ताशय की थैली की अंदरूनी परत की सावधानीपूर्वक निगरानी कर सकते हैं। अगर कोई संदिग्ध क्षेत्र पाया जाता है तो डॉक्टर ऊतक का छोटा टुकड़ा लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेज सकते हैं।”

Stomach cancer symptoms in hindi

गट क्लिनिक इलाहाबाद के डॉ. रोहित गुप्ता के अनुसार, किसी भी कैंसर का इलाज करने के लिए बहुत जरूरी है कि सही समय पर हम उसके इलाज को शुरू करें, परंतु समस्या यही है कि बहुत से लोगों को इसका पता तभी चलता है जब कैंसर दूसरे या तीसरे स्टेज पर पहुंच जाता है। बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ जब से नए एंडोस्कोपस और हाई डेफिनेशन एंडोस्कोपी एंड कोलोनोस्कोपी की सुविधा उपलब्ध हुई है, डॉक्टर्स के लिए यह बहुत हो गया है जिससे वह समय रहते इसकी जांच और इलाज कर पा रहे है, क्योंकि जितनी जल्दी जांच होगी उतनी ही जल्दी हम उसका इलाज कर पाएंगे।

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