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गाँधीवादी संस्था की जमीन हड़प कर हुई अच्छे दिन की शुरुआत

राजस्थान से राजनीतिक हमले की शुरुआत Political attack from Rajasthan begins

जयपुर। राजस्थान से राजनैतिक हमले की शुरुआत हो गई है। राजस्थान की गांधीवादी संस्था (Gandhian institution of Rajasthan) राजस्थान समग्र सेवा संघ, दुर्गापुरा (Rajasthan Sarva Sewa Sangh, Durgapura) को आवंटित 21 हजार 300 वर्गमीटर भूमि का आवंटन जयपुर विकास प्राधिकरण (Jaipur Development Authority) ने निरस्त कर दिया। यहां जेडीए संपत्ति का बोर्ड भी लगा दिया है। संघ के प्रमुख कर्ताधर्ता सवाई सिंह ने इसे गाँधीवादी संस्थानों पर हमला बताया है। वे इस कार्यवाही के विरोध में धरने पर बैठ गए हैं।

समग्र सेवा संघ के भवन का शिलान्यास वर्ष 1960 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने किया था। इसकी जमीन वर्ष 1959 में गाँधीवादी संस्था ने खरीदी थी जिस पर गाँधीवादी संस्थाओं की कई गतिविधियाँ चलती थीं, तब जयपुर विकास प्रधिकरण का जन्म भी नहीं हुआ था।

राजस्थान के गाँधी कहे जाने वाले गोकुल भाई भट्ट (Gokul Bhai Bhatt, known as Gandhi of Rajasthan) का जब निधन हुआ तो उनका अंतिम संस्कार इसी जमीन पर हुआ और उनके नाम पर स्मृति भवन बनाने का भी फैसला हुआ।

बाद में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नाम पर अन्य जमीनों के साथ इसकी जमीन का अधिग्रहण किया गया पर हवाई अड्डा बनने की जगह आसपास की जमीन पर महल खड़े हो गए। खैर विवाद चलता रहा और अशोक गहलौत जब सत्ता में आए तो वर्ष 2001 में उन्होंने एक रुपए लीज पर यह जमीन समग्र सेवा संघ को वापस दे दी।

सवाई सिंह का आरोप है कि सत्ता बदलने के साथ ही इस गाँधीवादी संस्था की जमीन सत्तारूढ़ दल को खटकने लगी और गलतबयानी कर जेडीए इस जमीन को हड़पना चाह रहा है।

जेडीए का दावा है कि वह गोकुल भाई भट्ट समाधि परिसर को विकसित करेगा। उधर, भूमि पर बने निर्माण में काफी समय से जमे लोगों को जेडीए ने बाहर निकाल दिया। अचानक हुई कार्रवाई के बीच लोग अपना सामान बचाने की जुगत में लगे रहे। जेडीए ने निर्माण को सील कर दिया और हिदायत दी कि फिर इस निर्माण पर कोई नहीं दिखना चाहिए।

जेडीए ने नगरीय विकास विभाग की स्वीकृति के बाद स्व. भट्ट के स्मृति भवन निर्माण के लिए राजस्थान समग्र सेवा संघ को वर्ष 2001 में ग्राम चैनपुरा मे भूमि आवंटित की थी। आवंटन शर्तो की पालना नहीं करने पर जेडीए ने संघ को तीन बार नोटिस भी जारी किए, जिनका संघ ने संतोषप्रद जवाब नहीं दिया। जेडीए ने आवंटन शर्तो की पालना नहीं करने की जो शिकायतें प्राप्त हुईं, उनका सक्षम स्तर से गहन परीक्षण भी करवाया है। इस प्रकरण में नियमों की अवहेलना को लेकर लोकायुक्त के स्तर से भी समय-समय पर निर्देश जारी किए। उसके बाद ही जेडीए ने यह कदम उठाया है।

जबकि सवाई सिंह इसे सफ़ेद झूठ बताते हैं। उन्होंने कहा कि जेडीए को फ़ौरन और माकूल जवाब दिया गया पर उसने इस सबके बावजूद यह कार्यवाई की। बहरहाल इसे लेकर गाँधीवादी संगठनों में नाराजगी है और इसे एक वैचारिक हमले के रूप में देखा जा रहा है।

जनादेश न्यूज़ नेटवर्क

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