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नीति आयोग के देश बेचो कार्यक्रम के विरोध में देश के 15 लाख बिजली कर्मचारी मैदान में

बिजली कर्मचारी व अभियन्ताओं ने बिजली वितरण के निजीकरण (privatization of Power Distribution) के नीति आयोग के प्रस्ताव का विरोध किया… बिजली सेक्टर में किसी भी निजीकरण का प्रबल विरोध होगा

लखनऊ 15 जून 2019. नीति आयोग के स्ट्रेटेजी पेपर में बिजली वितरण के निजीकरण और शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में फ्रेंचाइजी मॉडल लागू करने के प्रस्ताव पर बिजली कर्मचारियों व् इन्जीनियरों ने कड़ा रोष प्रकट करते हुए कहा है कि बिजली सेक्टर में किसी भी प्रकार से निजीकरण करने की कोशिश की गई तो इसका प्रबल विरोध होगा।

आल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन (ALL INDIA POWER ENGINEERS FEDERATION) के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने आज यहाँ जारी बयान में बताया कि नीति आयोग द्वारा जारी स्ट्रेटेजी पेपर में उन्हीं बातों का उल्लेख है जो इलेक्ट्रिसिटी (एमेंडमेंट ) बिल 2014 और 2018 में सम्मिलित थीं।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (एमेंडमेंट ) बिल 2014 और 2018 विगत लोकसभा में पारित न हो पाने के कारण लैप्स हो गए और नई लोकसभा में पुनः इस बिल को रखने के पहले बिजली कर्मचारियों व् इंजीनियरों से वार्ता होनी चाहिए।

श्री दुबे ने कहा कि फेडरेशन ने वार्ता हेतु केंद्रीय विद्युत् मंत्री आर के सिंह को पत्र भेजकर समय माँगा है।

आल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन का कहना है कि बिजली के क्षेत्र में विगत 25 वर्षों में किये गए निजीकरण व् फ्रेंचाइजी के सभी प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुए हैं, ऐसे में इन्हीं असफल प्रयोगों को आगे बढ़ाने के नीति आयोग के प्रस्ताव पर जल्दबाजी में एकतरफा निर्णय लेने के बजाय केंद्र सरकार को बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर सार्थक ऊर्जा नीति बनानी चाहिए जिससे आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापरक सहज बिजली उपलब्ध हो सके।

उन्होंने कहा कि बिजली बोर्डों के विघटन का प्रयोग विफल रहा है और मात्र विघटन कर नई बिजली कंपनियों के गठन से घाटा तो निरंतर बढ़ ही रहा है, अनावश्यक प्रशासनिक खर्चे भी बढ़ गए हैं। अतः बिजली कंपनियों के एकीकरण की जरूरत है जिससे उत्पादन, पारेषण और वितरण में बेहतर सामंजस्य हो सके। विघटन के बाद की स्थिति यह है कि एक ओर उत्पादन और पारेषण कंपनियों को मुनाफे के नाम पर अरबों रु का इनकम टैक्स देना पड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर वितरण कम्पनियाँ सरकार की दोषपूर्ण ऊर्जा नीति के चलते अरबों रुपए के घाटे में हैं। इनकम टैक्स और घाटे दोनों की भरपाई अंततः आम उपभोक्ताओं से बिजली टैरिफ बढ़ा कर की जा रही है जो किसी के हित में नहीं है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नीति आयोग की रिपोर्ट के आधार पर निजीकरण की कोई एकतरफा कार्यवाही की गई तो देश के 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर राष्ट्रव्यापी आंदोलन प्रारम्भ करने हेतु बाध्य होंगे।

Power Employees oppose Neeti Ayog recommendation to privatize power distribution

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