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प्रणब मुखर्जी का दावा : सोनिया गांधी के कहने से नहीं चलते थे मनमोहन सिंह

बिना हिंदी जाने किसी को भारत का प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए- प्रणब मुखर्जी

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि बिना हिंदी जाने किसी को भारत का प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए। उन्होंने माना कि साल 2014 में कांग्रेस का खुफिया तंत्र सटीक जानकारी नहीं उपलब्ध करा पाया, जिसका खमियाजा हार के रूप में मिला। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस फिर से वापसी करेगी।

राष्ट्रपति भवन की पारी खत्म होने के बाद पहली बार प्रणब मुखर्जी ने इंडिया टुडे के साथ एक विशेष साक्षात्कार में तमाम मुद्दों पर बातचीत की।

पूर्व राष्ट्रपति ने वर्ष 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस की करारी हार से लेकर से लेकर GST, नोटबंदी पर भी अपने विचार रखे।

श्री मुखर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अपने रिश्तों को लेकर भी चर्चा की।

पूर्व राष्ट्रपति ने मुखर्जी ने डॉ. मनमोहन को प्रधानमंत्री बनाए जाने के सोनिया गांधी के फैसले को सही ठहराया।

निजी समाचार चैनल “आज तक”  की खबर के मुताबिक इंडिया टुडे ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा को दिए साक्षात्कार में प्रणब मुखर्जी ने कहा कि उस समय मनमोहन को प्रधानमंत्री बनाना सोनिया गांधी की बेहतरीन पसंद थी।

श्री मुखर्जी ने माना कि सीटों की गड़बड़ी और गठबंधन की कमजोरी के चलते आम चुनाव में यूपीए को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसमें वर्ष 2012 में ममता बनर्जी द्वारा अचानक यूपीए से अलग होने का फैसला भी शामिल है।

साक्षात्कार में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कुछ ऐसी भी बातें कहीं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा खेमा खुश नहीं होगा।

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सत्ता में वापसी के सवाल पर प्रणब मुखर्जी ने कहा कि यह कहना बिल्कुल गलत है कि 132 साल पुरानी पार्टी फिर से सत्ता में वापसी नहीं करेगी। पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफा, जीएसटी और अर्थव्यवस्था में गिरावट को लेकर मोदी सरकार की हो रही आलोचना और आम जनता के गुस्से के सवाल पर प्रणब ने सलाह दी कि पैनिक पैदा न किया जाए और न ही इतनी ज्यादा बार बदलाव किया जाए।

यूपीए सरकार में GST को लागू करने की पैरवी करने वाले और राष्ट्रपति के रूप में GST लागू करने वाले मुखर्जी ने जीएसटी को अच्छा तो बताया लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इसको लागू करने में शुरुआत में दिक्कत तो आएगी ही।

वाजपेयी सरकार बनने से पहले नरम था सोनिया गांधी का दृष्टिकोण

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि शुरुआत वर्षों में सोनिया गांधी का उनके प्रति नरम दृष्टिकोण था, लेकिन वाजपेयी सरकार बनने के बाद इसमें बदलाव आया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में लोगों ने सोनिया गांधी को पीएम बनाने के लिए कांग्रेस को वोट दिया था।

जब प्रणब से पूछा गया कि जब सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद के लिए मनमोहन सिंह का चुनाव किया, तो आपको कैसा लगा, तब उन्होंने कहा कि इससे मैं तनिक भी निराश नहीं हुआ। मुझे लगा कि उस समय मैं भारत का प्रधानमंत्री बनने के योग्य नहीं हूं।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ‘मेरी इस अयोग्य की सबसे बड़ी वजह यह भी थी कि मैं ज्यादा समय राज्य सभा का सदस्य रहा हूं। सिर्फ वर्ष 2004 में लोकसभा सीट जीती थी। मैं हिंदी नहीं जानता था। ऐसे में बिना हिंदी जाने किसी को भारत का प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए।

श्री मुखर्जी ने कहा कि कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे कामराज ने एक बार कहा था कि बिना हिंदी के प्रधानमंत्री पद नहीं।

इसके साथ ही मुखर्जी ने इस बात से भी इनकार किया कि मनमोहन सिंह सोनिया गांधी के कहने से चलते थे और सभी निर्णय सोनिया गांधी लेती थीं।

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यूपीए गठबंधन को लेकर प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हमने यूपीए-I गठबंधन को बेहतर ढंग से चलाया और सुशासन दिया, लेकिन यूपीए-2 में गठबंधन बेहतर नहीं रह सका। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन को बनाए रखना बेहद मुश्किल हो गया था। उन्होंने यह भी माना कि वर्ष 2014 में कांग्रेस का खुफिया तंत्र सटीक जानकारी नहीं उपलब्ध कराया पाया, जिसका खमियाजा हार के रूप में मिला। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस फिर से वापसी करेगी।

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