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राम के सहारे ममता के ‘काला जादू’ में भगवा फसल लहलहाने की फिराक में भाजपा

नई दिल्ली, 06 जून (चरण सिंह राजपूत) दशहरा पर होने वाली रामलीलाओं के मंचन (Staged the Ram Lilas to be held at Dussehra) से गूंजने वाले जय श्रीराम’ के नारों (Slogans of ‘Jai Shriram’) को भाजपा ने बड़ी चतुराई से सत्ता प्राप्ति का जरिया बनाया है। चाहे 1991 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण (Ram temple construction in Ayodhya) को लेकर हुए आंदोलन के बल उत्तर प्रदेश की सत्ता कब्जाने का मामला रहा हो या फिर हिंदुत्व (Hindutva) के नाम पर 1996 में देश की सत्ता प्राप्ति का। वह ‘जय श्रीराम’ का नारा ही था कि दो सांसदों वाली पार्टी माने जाने वाली भाजपा केंद्र की सत्ता पर काबिज हो गई थी। यह जय श्रीराम के नारे का ही कमाल है कि में प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमाम खामियों के बावजूद 2019 में फिर से उससे बड़े बहुमत के साथ सरकार बना ली है। यह सत्ता प्राप्ति माध्यम ही था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अपने समर्थकों के साथ विभिन्न मंचों से जय श्रीराम के नारे लगाते नजर आते रहे हैं।

वामपंथियों को परास्त कर पश्चिमी बंगाल पर राज कर रही ममता बनर्जी के गढ़ में घुसने के लिए भी भाजपा ने ‘जय श्रीराम’ के नारे का ही सहारा लिया। भाजपा की नीतियों (BJP’s policies) को लेकर आक्रामक रहीं ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ललकारा और ‘उखाड़ लेना क्या उखाड़ोगी’ बयान देकर वह पश्चिमी बंगाल में रैली करने पहुंचे। रैली में भी जय श्रीराम के ही नारे गूंज रहे थे। रैली पर हमला होने के बाद अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिमी बंगाल में कानून व्यवस्था को लेकर पूरी तरह आक्रामक रहे।

चुनाव परिणाम में भाजपा की स्थिति पश्चिमी बंगाल में ठीकठाक आने पर अब भाजपा को वहां की जमीन पर भगवा फसल लहलहाने की उम्मीद जग रही है।

पश्चिमी बंगाल में हिंसा में मरे लोगों को शहीद का नाम देकर उनके परिजनों को अपने शपथ ग्रहण समारोह में बुलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रणनीति के संकेत दे दिये हैं।

पश्चिमी बंगाल के विधानसभा चुनाव में परचम लहराने के लिए भाजपा ने ‘जय श्रीराम’ के नारे का कार्ड खेल दिया है। जय श्रीराम लिखे 10 लाख पोस्टकार्ड वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजे जा रहे हैं। स्वभाव के अनुकूल मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों को देखकर भाजपा समर्थकों के जयश्रीराम के नारे लगाने पर उनके भड़कने पर भाजपा को अपने काम में सफलता मिलती दिखाई दे रही है। इसलिए भाजपा ने पश्चिमी बंगाल के लिए आईटी सेल लगा दी गई है, जो सोशल मीडिया पर माहौल बनाने में लग गई है।

सोशल मीडिया के माध्यम से ममता बनर्जी को भेजने वाले पोस्टकार्ड विभिन्न माध्यमों से भेजे जा रहे हैं। तथा समर्थकों से करीब के पोस्ट ऑफिस से भेजने की अपील की जा रही है।

दरअसल भाजपा की एक टीम इसी काम में लगी होती है जिसका काम इस तरह की गतिविधियों को विस्तार देना होता है।

माहौल को भांपते हुए ममता बनर्जी के मामले को संभाला है। ममता बनर्जी ने जय श्रीराम के नारे के जवाब में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का ‘जय हिंद’ और जय बांग्ला का नारा दिया है। ममता बनर्जी ने भाजपा (BJP) पर धर्म की राजनीति के साथ मिलाकर धार्मिक नारे ‘जय श्री राम’ का अपने पार्टी के नारे के रूप में गलत तरीके से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को बरकरार रखने के लिए भाजपा (BJP) के इस तरह के कदमों का कड़ाई के साथ विरोध करने का आग्रह भी किया है।

भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं के जय श्री राम का नारा लगाने पर पिछले दिनों भड़कीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर और फेसबुक पर अपनी डिस्प्ले पिक्चर (डीपी) बदल दी। अब उनकी डीपी में “जय हिंद, जय बांग्ला” लिखा नजर आ रहा है।

ममता के साथ ही उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने भी अपनी डीपी बदल दी है, जिसमें क्रांतिकारी नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, मातंगिनी हाजरा, नोबेल पुरस्कार विजेता कवि रवींद्रनाथ टैगोर और कवि काजी नजरूल इस्लाम की तस्वीरों के साथ जय हिंद, जय बांग्ला लिखे तस्वीर को जगह दी है।

19वीं सदी के बंगाल के पुनर्जागरण के अगुआ जैसे कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर, राजा राम मोहन राय, धार्मिक और सामाजिक विचारक स्वामी विवेकानंद और भारतीय संविधान के जनक बीआर आम्बेडकर भी डीपी का हिस्सा हैं।

ममता बनर्जी और तृणमूल के अन्य नेताओं ने पिछले महीने कोलकाता में हुई हिंसा और विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने के विरोध में विद्यासागर की तस्वीर प्रदर्शित करने के लिए अपनी सोशल मीडिया डीपी को बदल दिया था।

ममता बनर्जी ने मामले को संभालते हुए अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है ‘जय सिया राम, जय राम जी की, राम नाम सत्य है…आदि धार्मिक और सामाजिक धारणाएं हैं। हम इन भावनाओं का सम्मान करते हैं। लेकिन भाजपा (BJP) धर्म को राजनीति के साथ मिलाकर धार्मिक नारे जय श्री राम का अपने पार्टी के नारे के रूप में गलत तरीके से इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने कहा, हम तथाकथित आरएसएस के नाम पर दूसरों पर राजनीतिक नारों को थोपने का सम्मान नहीं करते। इसे बंगाल ने कभी स्वीकार नहीं किया।

उनका कहना है कि यह बर्बरता और हिंसा के माध्यम से नफरत की विचारधारा को बेचने का एक जान बूझकर किया जा रहा प्रयास है. जिसका हमें विरोध करना चाहिए।

हमारे पास जय हिंद और वंदेमातरम का नारा यह स्पष्ट करते हुए कि उन्हें किसी भी पार्टी के नारे के साथ कोई समस्या नहीं है, उन्होंने लिखा, ‘प्रत्येक राजनीतिक दल का अपना नारा होता है। मेरी पार्टी के पास जय हिंद, वंदे मातरम का नारा है। वामपंथियों का नारा है, इंकलाब जिंदाबाद। अन्य पार्टियों के अलग-अलग नारे हैं। हम एक-दूसरे का सम्मान करते हैं।

देखने की बात यह भी है कि देश में जगह-जगह बजरंग दल और विहिप द्वारा युवाओं को शस्त्रों का प्रशिक्षण देने की खबरें भी आ रही हैं। आखिर मोदी की दूसरी पारी में देश में क्या होने जा रहा है ?

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