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Home / अभूतपूर्व संघर्ष : शानदार जीत, लड़े तो जीते राजस्थान के किसान

13 दिन की अभूतपूर्व तीव्रता और ऐतिहासिक भागीदारी वाली लड़ाई के बाद राजस्थान का किसान आंदोलन एक बार फिर शानदार जीत हासिल करने में कामयाब हुआ है।

13 घंटे तक चली वार्ता में - अब तक हेंकड़ी दिखा रही - वसुंधरा राजे सरकार

● पचास हजार रुपए तक के कर्जे माफ़ करने के लिए मजबूर हो गयी। इससे करीब 8 लाख किसानों को फायदा मिलेगा।

● सरकार ने वादा किया है कि वह केंद्र सरकार से स्वामीनाथन आयोग की समर्थन मूल्य से जुडी सिफारिशों को लागू करने और उसकी विधि तय करने के लिए कहेगी।

● सात दिन के भीतर सभी जिला मुख्यालयों पर मूंगफली, हरी मूंग और उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू कर दी जाएगी।

● भू जल से सिंचाई की बढ़ाई गयी बिजली दरें वापस ले ली जाएंगी।

● दलित-आदिवासी-ओबीसी के रुकी हुयी छात्रवृत्तियां एरियर सहित तत्काल बाँट दी जाएंगी।

● जानवरों के व्यापार के मामले में बंदिशें कम की जाएंगी।

● आवारा तथा जंगली जानवरों से किसानों की फसल की सुरक्षा करने के बंदोबस्त किये जाएंगे।

● वृध्दो-असहायों-विधवाओं की पेंशन बढ़ाकर 2 हजार रूपये प्रतिमाह करने पर भी सहमति दी गयी है।

● नहरों से पानी आपूर्ति न होने की दशा में बीमा के भुगतान की व्यवस्था होगी तथा

● किसानों-व्यापारियों को पुलिस द्वारा परेशान किये जाने पर रोक लगाई जाएगी।

इस समझौते और उस पर अमल की प्रक्रिया तय हो जाने के बाद अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष और पूर्व विधायक #आमरा_राम ने तीन दिन से प्रदेश भर में चले आ रहे महापड़ाव और रास्ता-बंदी को स्थगित करने का एलान कर दिया।

बीती रात को ही आमरा राम ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि 14 सितम्बर की सुबह 8 बजे तक किसानों की मांगे मान ली गयीं तो किसान जश्न मनाएंगे - वरना सुबह 8 बजे से पूरे राजस्थान को जाम कर दिया जाएगा। सरकार रात एक बजे ही घुटने टेक गयी।

1 सितम्बर से शुरू हुए इस आंदोलन की अनेक ख़ास बातें थी।

★ सीकर इसका मुख्य केंद्र था किन्र्तु इसने पूरे राजस्थान को सडकों पर ला दिया था।

★ महिलाओं की बढ़ीचढ़ी भागीदारी काबिलेगौर थी - लेकिन

★ सबसे बेमिसाल थी बस-ट्रक-ऑटो और रिक्शा वालो सहित मजदूरों तथा व्यापारियों की खुली भागीदारी।

★ छात्रों ने इस आंदोलन में बड़ी भूमिका निबाही। समाज का कोई तबका इस लड़ाई से बाहर नहीं छूटा - बैंड और डी जे वाले भी इस आंदोलन में शामिल हुये। ★ जन सहयोग इतना विराट था कि अकेले सीकर में महापड़ाव पर बैठे किसानों का रोज का भोजन इत्यादि का 5 लाख रूपये रोज वही इकट्ठा हो जाय करता था।

★ तीन दिन से जारी चक्का जाम का असर 20 जिलों में प्रभावी था - इसमें सिर्फ एम्बुलेंस और अत्यावश्यक सेवाओं को छूट दी गयी थी।

★ आंदोलन से ध्यान बंटाने के लिए भाजपा-संघ गिरोह ने पहले सीकर और बाद में जयपुर में साम्प्रदायिक तनाव भड़काने और अफवाहें फैलाकर माहौल दूषित करने की कोशिश की थी - मगर जनता झांसे में नहीं आयी।

★ सलाम राजस्थान - प्रणाम किसान और आम अवाम की एकता

(लोकजतन डेस्क से साभार, द्वारा Badal Saroj )

अभूतपूर्व संघर्ष : शानदार जीत, लड़े तो जीते राजस्थान के किसान

13 दिन की अभूतपूर्व तीव्रता और ऐतिहासिक भागीदारी वाली लड़ाई के बाद राजस्थान का किसान आंदोलन एक बार फिर शानदार जीत हासिल करने में कामयाब हुआ है।

13 घंटे तक चली वार्ता में – अब तक हेंकड़ी दिखा रही – वसुंधरा राजे सरकार

● पचास हजार रुपए तक के कर्जे माफ़ करने के लिए मजबूर हो गयी। इससे करीब 8 लाख किसानों को फायदा मिलेगा।

● सरकार ने वादा किया है कि वह केंद्र सरकार से स्वामीनाथन आयोग की समर्थन मूल्य से जुडी सिफारिशों को लागू करने और उसकी विधि तय करने के लिए कहेगी।

● सात दिन के भीतर सभी जिला मुख्यालयों पर मूंगफली, हरी मूंग और उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू कर दी जाएगी।

● भू जल से सिंचाई की बढ़ाई गयी बिजली दरें वापस ले ली जाएंगी।

● दलित-आदिवासी-ओबीसी के रुकी हुयी छात्रवृत्तियां एरियर सहित तत्काल बाँट दी जाएंगी।

● जानवरों के व्यापार के मामले में बंदिशें कम की जाएंगी।

● आवारा तथा जंगली जानवरों से किसानों की फसल की सुरक्षा करने के बंदोबस्त किये जाएंगे।

● वृध्दो-असहायों-विधवाओं की पेंशन बढ़ाकर 2 हजार रूपये प्रतिमाह करने पर भी सहमति दी गयी है।

● नहरों से पानी आपूर्ति न होने की दशा में बीमा के भुगतान की व्यवस्था होगी तथा

● किसानों-व्यापारियों को पुलिस द्वारा परेशान किये जाने पर रोक लगाई जाएगी।

इस समझौते और उस पर अमल की प्रक्रिया तय हो जाने के बाद अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष और पूर्व विधायक #आमरा_राम ने तीन दिन से प्रदेश भर में चले आ रहे महापड़ाव और रास्ता-बंदी को स्थगित करने का एलान कर दिया।

बीती रात को ही आमरा राम ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि 14 सितम्बर की सुबह 8 बजे तक किसानों की मांगे मान ली गयीं तो किसान जश्न मनाएंगे – वरना सुबह 8 बजे से पूरे राजस्थान को जाम कर दिया जाएगा। सरकार रात एक बजे ही घुटने टेक गयी।

1 सितम्बर से शुरू हुए इस आंदोलन की अनेक ख़ास बातें थी।

★ सीकर इसका मुख्य केंद्र था किन्र्तु इसने पूरे राजस्थान को सडकों पर ला दिया था।

★ महिलाओं की बढ़ीचढ़ी भागीदारी काबिलेगौर थी – लेकिन

★ सबसे बेमिसाल थी बस-ट्रक-ऑटो और रिक्शा वालो सहित मजदूरों तथा व्यापारियों की खुली भागीदारी।

★ छात्रों ने इस आंदोलन में बड़ी भूमिका निबाही। समाज का कोई तबका इस लड़ाई से बाहर नहीं छूटा – बैंड और डी जे वाले भी इस आंदोलन में शामिल हुये। ★ जन सहयोग इतना विराट था कि अकेले सीकर में महापड़ाव पर बैठे किसानों का रोज का भोजन इत्यादि का 5 लाख रूपये रोज वही इकट्ठा हो जाय करता था।

★ तीन दिन से जारी चक्का जाम का असर 20 जिलों में प्रभावी था – इसमें सिर्फ एम्बुलेंस और अत्यावश्यक सेवाओं को छूट दी गयी थी।

★ आंदोलन से ध्यान बंटाने के लिए भाजपा-संघ गिरोह ने पहले सीकर और बाद में जयपुर में साम्प्रदायिक तनाव भड़काने और अफवाहें फैलाकर माहौल दूषित करने की कोशिश की थी – मगर जनता झांसे में नहीं आयी।

★ सलाम राजस्थान – प्रणाम किसान और आम अवाम की एकता

(लोकजतन डेस्क से साभार, द्वारा Badal Saroj )

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