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रमजान में मधुमेह रोगियों को रखना होगा विशेष ध्यान

नई दिल्ली, 27 मई। आज से रमजान माह की शुरुआत (beginning of the month of Ramadan) हो गई और रमजान में हर मुस्लिम परिवार (Muslim family) रोजा (Roza), उपवास रखने की ख्वाहिश रखता है फिर चाहें वह सेहतमंद हो अथवा नहीं। लेकिन डॉक्टरों की सलाह है कि बहुत से मधुमेह रोगी भी रोजे रखते हैं और इन्हें कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।

रोजे या उपवास के दिनों में शरीर के उपापचय में परिवर्तन होता है, इसलिए यह जरूरी है कि रमजान के माह में भोजन की योजना (Meal plan in the month of Ramadan) में बदलाव कर लिये जायें। यह बात रोजे रखने वाले मधुमेह रोगियों के लिए (Caution for Roza keeper diabetic patients) खास तौर पर उपयोगी है।

चिकित्सक बताते हैं कि रमजान में दो भोजन के बीच करीब 12 से 15 घंटे का अंतर होता है और यह मधुमेह रोगियों के लिए इससे समस्या हो सकती है क्योंकि उन्हें नियमित अंतराल पर कुछ न कुछ खाने की हिदायत होती है। इस पवित्र माह में रोजे रखने के मामले में टाइप 2 डाइबिटीज के मुकाबले टाइप 1 डायबिटीज वालों को अधिक खतरा होता है।

भारती हॉस्पिटल के कंसल्टेंट एंडोक्रायोनोलॉजिस्ट डॉ. संजय कालरा बातचीत में बताते हैं कि ‘इस साल, रमजान मई में शुरू होकर जून तक चलेगा। दिन लंबे होने के कारण रोजे का समय भी अधिक रहेगा। मधुमेह रोगियों को रोजे के मामले में पहले चिकित्सक से परामर्श कर लेना चाहिए। साथ ही नियमित रूप से अपना ब्लड ग्लूकोस स्तर भी मापते रहना चाहिए।’

रोजे रखने की क्षमता सुझायी हुई दवाइयों पर निर्भर करती है, और इस पर भी कि दवाओं से आपकी डाइबिटीज कितनी नियंत्रण में रहती है। साथ ही, भोजन और सक्रियता का भी असर पड़ता है। रोजे के दौरान टाइप-1 डाइबिटीज के रोगियों को अधिक खतरा रहता है, खास कर जिन्हें हाइपोग्लिसेमिया की शिकायत रह चुकी हो। हाइपोग्लिसेमिया और हाइपरग्लिसेमिया टाइप 2 डाइबिटीज वालों में भी हो सकती है, परंतु उतनी नहीं जितनी टाइप-1 वालों में होती है।

रोजे के दौरान कुछ खतरनाक लक्षणों पर निगाह रखनी होगी, जैसे कि ब्लड ग्लूकोस के स्तर में अचानक गिरावट अथवा बेहोशी का अहसास, शुगर स्तर में वृद्धि, आंखों के आगे धुंधलापन, सिरदर्द, थकान और प्यास की शिकायत हो सकती है। ऐसी स्थिति अगर निरंतर बनी रहे तो चिकित्सक रोजे तोड़ने की सलाह दे सकता है।

डा. बीवी सिंह बताते हैं कि इस माह में मधुमेह रोगियों को अपनी खुराक ठीक रखनी चाहिए और सेहतमंद भोजन ही करना चाहिए। कार्बोहाइड्रेट अधिक खाने चाहिए, जैसे कि ब्राउन राइस, फुल ग्रेन ब्रेड और सब्जियां। जिन्हें मीठा खाने का दिल करता हो, वे कम मात्रा में कुछ मीठा खा सकते हैं। ऊर्जा के अन्य स्रोतों में सूखे मेवा, मछली का तेल, ऑलिव आदि से अच्छे कोलेस्ट्रोल का स्तर बनाये रखने में सहूलियत रहेगी।

रमजान गर्मियों में है इसलिए मधुमेह रोगियों को ऐसा भोजन लेना चाहिए जिसमें पानी अधिक मात्रा में हो, जैसे कि फल। इससे डिहाइड्रेशन की शिकायत नहीं रहेगी।

मधुमेह रोगियों को रमजान के दिनों में रखना होगा ध्यान…

– अधिक न खायें। शरीर की जरूरत को समझें और उतना ही खाएं।

– मीठी चीजों का सेवन कम ही करें।

– आहार में फल, सब्जियां, दालें और दही शामिल करें।

– भोजन और सोने के बीच दो घंटे का अंतराल रखें। सोने से पहले जटिल कार्बोहाइड्रेट का सेवन न करें।

-अधिक तले भोजन से परहेज करें। स्टार्च अधिक होने के कारण चावल और रोटी भी कम ही खाएं।

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नोट
– यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। यह समाचारों में उपलब्ध
सामग्री के अध्ययन के आधार पर जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई अव्यावसायिक
रिपोर्ट मात्र है। आप इस समाचार के आधार पर कोई निर्णय कतई नहीं ले सकते। स्वयं
डॉक्टर न बनें किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें।)
 

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