Home / आरएसएस-भाजपा कर रही सोनभद्र क्षेत्र को अशांत – आदिवासी वनवासी महासभा

आरएसएस-भाजपा कर रही सोनभद्र क्षेत्र को अशांत - आदिवासी वनवासी महासभा

हाईकोर्ट की अवहेलना है दावा न लेना

जिला प्रशासन के खिलाफ होगा अवमानना का मुकदमा

सोनभद्र, 31 अक्टूबर 2018, आरएसएस और भाजपा के निर्देशन में कल दुद्धी में हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए दाखिल किए जा रहे दावों को तहसील प्रशासन ने लेने से मना किया और आदिवासियों व वनाश्रितों की सहायता के लिए लगाए जा रहे कैम्प को हटाने का काम किया है। यह स्पष्टतः हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा वनाधिकार कानून में दिए आदेश की अवमानना है क्योंकि अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा है कि वादी संगठन आदिवासी वनवासी महासभा के सदस्य वनाधिकार कानून की धारा 6 के तहत छः हफ्ते में ग्रामसभा व सम्बंधित अधिकारी के यहां अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत करेंगे जिस पर सम्बंधित अधिकारी अगले 12 हफ्तें में निर्णय लेंगें। इसीलिए महासभा द्वारा हर तहसीलों में कैम्प लगाया जा रहा है ताकि गरीब व अनपढ़ आदिवासी की सहायता हो सके और वनाधिकार कानून का लाभ प्राप्त हो सके। दरअसल आरएसएस और भाजपा के लोग नहीं चाहते कि आदिवासियों और वनाश्रितों को वनाधिकार कानून का लाभ मिल सके। वह इस पूरे क्षेत्र को एक बार फिर से अराजकता में ढकेल कर अशांत करना चाहते है।

यह राजनीतिक प्रस्ताव आज स्वराज अभियान से सम्बद्ध आदिवासी वनवासी महासभा की बैठक में लिया गया।

बैठक की अध्यक्षता मुरता के प्रधान डॉ. चंद्रदेव गोंड़ ने की और संचालन आदिवासी वनवासी महासभा के प्रवक्ता कृपाशंकर पनिका ने किया।

बैठक में मौजूद आदिवासी नेताओं ने कहा कि सोनभद्र, मिर्जापुर और नौगढ़ में तनाव का बड़ा कारण वनभूमि विवाद रहा है। इसके कारण ही यह क्षेत्र अशांत हुआ और कानून व्यवस्था का संकट खड़ा हुआ। ऐसे में वनाधिकार कानून से उम्मीद जगी थी पर इसे लागू करने की जगह योगी सरकार ने दमन और उत्पीड़न का रास्ता अपनाया। इस दमन के खिलाफ हम हाईकोर्ट गए जिसमें हाईकोर्ट ने वनाधिकार की प्रक्रिया पुनः शुरू करने का आदेश दिया। लेकिन इसे करने की जगह आरएसएस और भाजपा के लोग प्रशासन पर दबाब बनाकर इस प्रक्रिया को बाधित कर देना चाहते है और इस पूरे क्षेत्र को एक बार फिर अशांत कर देना चाहते है। लेकिन उनका मसूंबा सफल नहीं होगा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन से इसका मुकाबला होगा।

वक्ताओं ने कहा कि दो दिन पहले ही महासभा द्वारा डीएम और सभी एसडीएम को पत्रक देकर हाईकोर्ट के आदेश के सम्बंध में अवगत कराते हुए पहल की अनुरोध किया गया था। कल पूर्व आई जी एस आर दारापुरी ने डीएम से मिलकर पूरी स्थिति से अवगत कराया था कि और यह भी बताया था कि चूकिं हाईकोर्ट ने ही महासभा के सदस्यों को इस कानून का लाभ देने को कहा है इसलिए महासभा सदस्य बना रही है जिसकी सदस्यता राशि दो वर्ष की महज दस रूपया है। जिस पर डीएम ने कहा था कि किसी भी संगठन की सदस्यता बनाना अवैधानिक नहीं है। बावजूद इसके आज धन वसूली की कथित शिकायत के नाम पर कैम्प हटवाना और दावा लेने से इंकार करना स्पष्टतः न्यायालय की अवमानना है और जिन अधिकारियों ने यह किया है उनके विरूद्ध हाईकोर्ट में अवमानना का मुकदमा दाखिल किया जायेगा। बैठक में आदिवासियों व वनाश्रितों से आरएसएस द्वारा फैलाए जा रहे भ्रमों से सावधान रहने और इनके हमलों का मुकाबला करने की अपील भी की गयी।

बैठक में मंगरू प्रसाद गोंड़, श्याम सुदंर खरवार, इंद्रदेव खरवार, रामजीत खरवार, मनोहर गोंड़, वंशलाल गोंड़, बलबीर सिंह गोंड़, अंतलाल खरवार, रमेश सिंह खरवार, राम उजागिर गोंड़, जगदेव गोंड़ आदि ने अपनी बात रखी।

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आरएसएस-भाजपा कर रही सोनभद्र क्षेत्र को अशांत – आदिवासी वनवासी महासभा

हाईकोर्ट की अवहेलना है दावा न लेना

जिला प्रशासन के खिलाफ होगा अवमानना का मुकदमा

सोनभद्र, 31 अक्टूबर 2018, आरएसएस और भाजपा के निर्देशन में कल दुद्धी में हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए दाखिल किए जा रहे दावों को तहसील प्रशासन ने लेने से मना किया और आदिवासियों व वनाश्रितों की सहायता के लिए लगाए जा रहे कैम्प को हटाने का काम किया है। यह स्पष्टतः हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा वनाधिकार कानून में दिए आदेश की अवमानना है क्योंकि अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा है कि वादी संगठन आदिवासी वनवासी महासभा के सदस्य वनाधिकार कानून की धारा 6 के तहत छः हफ्ते में ग्रामसभा व सम्बंधित अधिकारी के यहां अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत करेंगे जिस पर सम्बंधित अधिकारी अगले 12 हफ्तें में निर्णय लेंगें। इसीलिए महासभा द्वारा हर तहसीलों में कैम्प लगाया जा रहा है ताकि गरीब व अनपढ़ आदिवासी की सहायता हो सके और वनाधिकार कानून का लाभ प्राप्त हो सके। दरअसल आरएसएस और भाजपा के लोग नहीं चाहते कि आदिवासियों और वनाश्रितों को वनाधिकार कानून का लाभ मिल सके। वह इस पूरे क्षेत्र को एक बार फिर से अराजकता में ढकेल कर अशांत करना चाहते है।

यह राजनीतिक प्रस्ताव आज स्वराज अभियान से सम्बद्ध आदिवासी वनवासी महासभा की बैठक में लिया गया।

बैठक की अध्यक्षता मुरता के प्रधान डॉ. चंद्रदेव गोंड़ ने की और संचालन आदिवासी वनवासी महासभा के प्रवक्ता कृपाशंकर पनिका ने किया।

बैठक में मौजूद आदिवासी नेताओं ने कहा कि सोनभद्र, मिर्जापुर और नौगढ़ में तनाव का बड़ा कारण वनभूमि विवाद रहा है। इसके कारण ही यह क्षेत्र अशांत हुआ और कानून व्यवस्था का संकट खड़ा हुआ। ऐसे में वनाधिकार कानून से उम्मीद जगी थी पर इसे लागू करने की जगह योगी सरकार ने दमन और उत्पीड़न का रास्ता अपनाया। इस दमन के खिलाफ हम हाईकोर्ट गए जिसमें हाईकोर्ट ने वनाधिकार की प्रक्रिया पुनः शुरू करने का आदेश दिया। लेकिन इसे करने की जगह आरएसएस और भाजपा के लोग प्रशासन पर दबाब बनाकर इस प्रक्रिया को बाधित कर देना चाहते है और इस पूरे क्षेत्र को एक बार फिर अशांत कर देना चाहते है। लेकिन उनका मसूंबा सफल नहीं होगा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन से इसका मुकाबला होगा।

वक्ताओं ने कहा कि दो दिन पहले ही महासभा द्वारा डीएम और सभी एसडीएम को पत्रक देकर हाईकोर्ट के आदेश के सम्बंध में अवगत कराते हुए पहल की अनुरोध किया गया था। कल पूर्व आई जी एस आर दारापुरी ने डीएम से मिलकर पूरी स्थिति से अवगत कराया था कि और यह भी बताया था कि चूकिं हाईकोर्ट ने ही महासभा के सदस्यों को इस कानून का लाभ देने को कहा है इसलिए महासभा सदस्य बना रही है जिसकी सदस्यता राशि दो वर्ष की महज दस रूपया है। जिस पर डीएम ने कहा था कि किसी भी संगठन की सदस्यता बनाना अवैधानिक नहीं है। बावजूद इसके आज धन वसूली की कथित शिकायत के नाम पर कैम्प हटवाना और दावा लेने से इंकार करना स्पष्टतः न्यायालय की अवमानना है और जिन अधिकारियों ने यह किया है उनके विरूद्ध हाईकोर्ट में अवमानना का मुकदमा दाखिल किया जायेगा। बैठक में आदिवासियों व वनाश्रितों से आरएसएस द्वारा फैलाए जा रहे भ्रमों से सावधान रहने और इनके हमलों का मुकाबला करने की अपील भी की गयी।

बैठक में मंगरू प्रसाद गोंड़, श्याम सुदंर खरवार, इंद्रदेव खरवार, रामजीत खरवार, मनोहर गोंड़, वंशलाल गोंड़, बलबीर सिंह गोंड़, अंतलाल खरवार, रमेश सिंह खरवार, राम उजागिर गोंड़, जगदेव गोंड़ आदि ने अपनी बात रखी।

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