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Acharya Yugal Kishore आचार्य युगल किशोर शरण शास्त्री

अयोध्या के संत मोदी से बोले, जहां साधू दुखी होते हैं वहां का राजा बिना आग के ही जलता है

अयोध्या, 02 मई, 2019. अयोध्या के संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को चेताते हुए कहा है कि जिस राज्य में साधू दुखी होते हैं वहां का राजा बिना आग के ही जलता है। राम जानकी मंदिर, सरयू कुंज पर एक दिवसीय उपवास कर रहे संतों के मुखिया आचार्य युगल किशोर शरण शास्त्री ने कहा कि तुलसीदास ने लिखा है ’मुनि तापस जिन्ह तें दुःखु लहहीं, ते नरेश बिनु पावक दहहीं,’ यानी जहां साधू दुखी होते हैं वहां का राजा बिना आग के ही जलता है। हरिद्वार के मातृ सदन आश्रम में 24 अक्टूबर, 2019 से अनशन पर बैठे ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने आज अपने अनशन के 191वें दिन पानी छोड़ने का निर्णय ले लिए हैं। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की मांग है कि गंगा को अविरल व निर्मल बहने दिया जाए, यानी गंगा पर कोई बांध न बनाए जाएं, शहरों का गंदा पानी व औद्योगिक कचरा नालियों के माध्यम से गंगा में न डाला जाए व गंगा में होने वाले अवैध खनन को रोका जाए।

उन्होंने बताया कि इन्हीं मांगों को लेकर पहले मातृ सदन (Matri Sadan) के स्वामी निगमानंद (Swami Nigamanand) 2011 में तथा स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद (Swami Gyan Swaroop Sanand) 2018 में अनशन करके अपने प्राण त्याग चुके हैं।

आचार्य जी ने बताया कि 1998 में स्वामी निगमानंद के साथ अवैध खनन के खिलाफ मातृ सदन की ओर से आयोजित पहले अनशन में बैठे स्वामी गोकुलानंद की 2003 में खनन माफिया ने हत्या करवा दी थी। 2014 में वाराणसी में अनशन करते हुए बाबा नागनाथ ने भी अपने प्राण त्याग दिए। पिछले वर्ष 24 जून से बद्रीनाथ में गंगा के लिए अनशन पर बैठे संत गोपाल दास जो 6 दिसम्बर से गायब थे हाल ही में मिले हैं। उनका आरोप है कि सत्ताधारियों ने उनका अपह्रण कर लिया था। सवाल उठता है कि भाजपा के राज में साधुओं की ऐसी दशा क्यों हो रही है?

सरकार साधुओं की बात इसलिए नहीं सुन रही क्यों कि वह गंगा पर बांध बना कर, सीवेज ट्रीटमेण्ट संयंत्र बनवा कर, चार धाम परियोजना से, नदी में जहाज चला कर, अवैध खनन को संरक्षण देकर पैसा कमाना चाह रही हैं जिसकी राजनेता, नौकरशाह, ठेकेदार व निजी कम्पनियां मिलकर बंदरबांट करती हैं।

आचार्य युगल किशोर शास्त्री ने कहा कि हम अयोध्या के साधु (अयोध्या के साधू) गंगा के संरक्षण (Protection of the Ganges) को लेकर साधुओं की बलिदानी परम्परा को नमन करते हैं तथा आज के दिन पानी भी त्याग देने वाले अनशनरत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के समर्थन में राम जानकी मंदिर, सरयू कुंज पर एक दिवसीय उपवास का आयोजन कर रहे हैं।

साधू समाज इस बात से उद्वेलित है कि हिन्दुत्व के नाम पर सत्तासीन हुई इस सरकार ने जिसके प्रधान मंत्री ने वाराणसी से 2014 में चुनाव लड़ते हुए कहा कि मां गंगा ने उन्हें बुलाया है और जिस सरकार ने नमामि गंगे परियोजना (Namami Gange Project) पर रु. 7,000 करोड़ से ज्यादा खर्च कर दिया है उसके राज में साधुओं की व गंगा की भी दुर्गति हो रही है।

The saint of Ayodhya spoke to Modi, where the sadhu is unhappy, the king of it burns without fire

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