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Prof. Bhim Singh Jammu-Kashmir National Panthers Party जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक प्रो.भीमसिंह

वाह हुजूर ! 370, 35-ए हट गई पर शेख अब्दुल्ला का बनाया जनसुरक्षा कानून (पीएसए) लागू है ?

अनुच्छेद 35-ए को हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर जनसुरक्षा कानून के तहत राष्ट्रपति कार्रवाई न करने के निर्देश दें

नई दिल्ली, 16 सितंबर 2019. नेशनल पैंथर्स पार्टी (National Panthers Party) के मुख्य संरक्षक एवं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के वरिष्ठ कार्यकारी सदस्य प्रो. भीम सिंह ने राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद (President Shri Ram Nath Kovind) से आग्रह किया है कि वे राष्ट्रपति शासन के तहत जम्मू-कश्मीर प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दें कि वे ऐसे नियम या कानूनों का प्रयोग न करें, जो संसद द्वारा 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर के सम्बंध में स्वीकृत किये गये अनुच्छेद के बाद भारतीय संविधान से अनुच्छेद 35-ए को हटाए जाने के बाद निष्फल हो गये हैं।

ज्ञातव्य रहे कि अनुच्छेद 35-ए मई, 1954 में राष्ट्रपति अध्यादेश द्वारा संविधान में शामिल किया गया था और अब 2019 में इसे राष्ट्रपति अध्यादेश से ही हटाया गया है।

उन्होंने कहा अनुच्छेद 35-ए को हटाए जाने के बाद भारतीय संविधान के अध्याय-3 में अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 35 तक दिये गये सभी मौलिक अधिकार बिना किसी रिजर्वेशन के लागू हो गये हैं। दूसरे शब्दों में जम्मू-कश्मीर विधानसभा/सरकार द्वारा अनुच्छेद 35-ए को लागू किये जाने के बाद बनाए गए सभी कानून निष्फल हो गये हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि 1978 में शेख अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री थे, जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा बनाए गए जनसुरक्षा कानून (पीएसए) – Public Security Act (PSA) के तहत किसी भी तरह की कार्रवाई को सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि जब मैं कांग्रेस का विधायक था, तब मैं पहला व्यक्ति था, जिसे जनसुरक्षा कानून के तहत जेल में डाला किया था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल श्री सत्यपाल मलिक से भी आग्रह किया कि पीएसए के तहत हिरासत में लिए गए सभी लोगों की जल्द रिहाई के लिए हस्तक्षेप करें।

उन्होंने राष्ट्रपति पर जोर दिया कि वे जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा इस कानून के तहत हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई के लिए शीघ्र निर्देश जारी करें। उन्होंने राष्ट्रपति से कहा कि अगर वे चाहें तो अॅटार्नी जनरल ऑफ इंडिया श्री के. वेणुगोपाल से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जो जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक स्थिति से अच्छी तरह जानते हैं।

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