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क्या है सेप्सिस/ सेप्टिसीमिया और क्या है इसका उपचार

क्या है सेप्सिस/ सेप्टिसीमिया और क्या है इसका उपचार

सेप्सिस/ सेप्टिसीमिया क्या है?

सेप्टीसीमिया (Septicemia) नामक बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। इस बीमारी का उचित इलाज नहीं हो पा रहा है और मृत्यु दर बहुत ज्यादा है। अगर इसके शुरुआती लक्षण और बचाव के बारे में जानकारी हो तो कई जीवन बचाए जा सकते हैं।

सेप्टिसीमिया एक गंभीर रक्त प्रवाह संक्रमण है। इसे बैक्टीरिया, या रक्त विषाक्तता के रूप में भी जाना जाता है। सेप्टिसीमिया तब होता है जब शरीर में कहीं और बैक्टीरिया संक्रमण फेफड़ों या त्वचा में होता है, जो रक्त में प्रवेश करता है।

मेडिकल न्यूज़ टुडे के मुताबिक सेप्टिसीमिया, जिसे सेप्सिस भी कहा जाता है, एक जीवन के लिए खतरनाक जटिलता है जो तब हो सकता है जब किसी अन्य संक्रमण से जीवाणु रक्त में प्रवेश करता है और पूरे शरीर में फैलता है।

इंग्लैंड में हर साल 25,000 बच्चे सेप्सिस की चपेट में आते हैं।

सेप्सिस से प्रभावित होने के बाद बचे हुए लोगों में  स्थाई परिवर्तन आते हैं जो जीवन भर परेशान करते हैं।

ब्रिटेन में सेप्सिस से हर घंटे पांच लोग मारे जाते हैं।

ब्रिटेन में सेप्सिस से निपटने के लिए द यूके सेप्सिस ट्रस्ट का गठन किया गया है।

द यूके सेप्सिस ट्रस्ट के मुताबिक सेप्सिस (रक्त विषाक्तता के रूप में भी जाना जाता है) एक संक्रमण या चोट के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली की अतिसंवेदनशीलता है। आम तौर पर हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) संक्रमण (Infection) से लड़ती है, लेकिन कभी-कभी, कई ऐसे कारणों से जो अभी भी समझे नहीं जा सके हैं, ये हमारे शरीर के ऊतकों और अंगों पर आक्रमण करती है। यदि इसका तुरंत इलाज न कराया जाए तो सेप्सिस के कारण अंग काम करना बंद कर सकते हैं और मृत्यु भी हो सकती है। लेकिन समय रहते इसके पहचान होने पर एंटीबायोटिक्स से इसका इलाज संभव है।

सेप्सिस के लक्षण  sepsis diagnosis

द यूके सेप्सिस ट्रस्ट के मुताबिक सेप्सिस प्रारंभ में फ्लू, गैस्ट्रोएंटेरिटिस या छाती के संक्रमण की तरह दिख सकता है। इसका कोई भी एक संकेत नहीं है, और वयस्कों और बच्चों के में इसके अलग-अलग लक्षण पाए जाते हैं।

वयस्कों में सेप्सिस की पहचान

द यूके सेप्सिस ट्रस्ट के मुताबिक शुरुआती चरण में सेप्सिस की एक छाती के संक्रमण के रूप में गलत पहचान की जा सकती है। संभावित रूप से निम्न 6 लक्षण ‘SEPSIS’ के हो सकते हैं। यदि वयस्कों में इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें –

बोलने में कठिनाई या भ्रम

मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक ठंड लगकर कंपकंपी छूटना

पूरे दिन पेशाब का न आना

सांस लेने में कठिनाई

ऐसा लगना जैसे मृत्यु करीब है

त्वचा का रंग विकृत होना (mottled or discoloured)

द यूके सेप्सिस ट्रस्ट के मुताबिक यदि आपका बच्चा कम तापमान के बुखार से पीड़ित है तो एक बच्चे को सेप्सिस हो सकती है यदि वह:

  1. बहुत तेजी से सांस ले रहा है,
  2. उसे फिट पड़ रहा है,

  3. शरीर पीलापन, नीलापन लिए हुए हैं या mottled है,

  4. शरीर पर Rashes हैं, जो दबाने पर भी फीके नहीं पड़ते

  5. बहुत सुस्त है और उसे जगाना एक मुश्किल काम है

5 साल से कम एक बच्चा सेप्सिस का शिकार हो सकता है यदि वह

  1. खा नहीं रहा है
  2. लगातार उल्टियां कर रहा है

  3. पिछले 12 घंटों में उसे पेशाब नहीं आया है।

मेडिकल न्यूज़ टुडे के मुताबिक सेप्टिसिमीया के बारे में फास्ट फैक्ट्स

सेप्सिस या सेप्टिसीमिया, तब होता है जब संक्रमण रक्त तक पहुंच जाता है। यह एक life-threatening emergency है।

बच्चे, बूढ़े और ऐसे लोग जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है, सेप्सिस या सेप्टिसीमिया के आसान शिकार होते हैं।

बिना तत्काल उपचार के सेप्टिक घातक हो सकता है।

एंटीबायोटिक्स सेप्सिस का प्रभावी ढंग से इलाज कर सकती हैं, लेकिन उन्हें तत्काल देने की आवश्यकता होती है।

रोगी को सेप्सिस से निकलने में वक्त लग सकता है और इस दौरान उसे  अत्यधिक आराम की आवश्यकता होती है।

मेडिकल न्यूज़ टुडे के मुताबिक आमतौर पर सेप्सिस के कारण होने वाले संक्रमण में निमोनिया होता है, इसके बाद मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई), गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) संक्रमण, और त्वचा या मुलायम ऊतक संक्रमण होते हैं।

मेडिकल न्यूज़ टुडे के मुताबिक ऐसे लोग सेप्सिस/ सेप्टिसीमिया का आसानी से शिकार हो सकते हैं –

जिनका कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग जो एचआईवी पॉजिटिव हों ये एड्स से पीड़ित हों, कैंसर से पीड़ित हों या कैंसर थेरेपी ले रहे हों,

जो क्रोमिक बीमारियों जैसे मधुमेह, फेफड़ों की बीमारी, और गुर्दे की बीमारी से पीड़ित हों

1 साल से कम या 65 साल से अधिक उम्र के हों

जिनकी हालिया सर्जरी हुई हो या ट्रांस्पलांट हुआ हो।

(नोट – यह समाचार चिकित्सकीय परामर्श नहीं है, यह आम जनता में जागरुकता के उद्देश्य से किए गए अध्ययन का सार है। आप इसके आधार पर कोई निर्णय न लें, चिकित्सक से परामर्श करें।)

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