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Tag Archives: लोकतंत्र

अदालतों का राजनीतिक दुरुपयोग लोकतंत्र को कमज़ोर कर रहा है

shahnawaz alam

Political abuse of courts is undermining democracy असलम भूरा केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना है ज्ञानवापी का सर्वे आदेश- शाहनवाज़ आलम अवमानना से चिंतित अदालतों को सोचना चाहिए कि उनकी छवि संदिग्ध क्यों हो रही है कांग्रेस नेता ने दिये 6 नज़ीर जिनसे अदालतों की विश्वसनीयता संदिग्ध हुई लखनऊ, 24 मई 2022। 14 मार्च 1997 को मोहम्मद …

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संत परंपरा तक जाती हैं भारतीय लोकतंत्र की जड़ें

आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में भारतीय लोकतंत्र के मजबूत आधार विषय पर बोलते हुए इरफान इंजीनियर

भारतीय लोकतंत्र (Indian democracy) ने 75 वर्षों में अपनी सम्प्रभुता को भी सुदृढ़ किया है जो पाकिस्तान या अन्य देश नहीं कर पाए जहाँ लोकतंत्र कमज़ोर हुआ (where democracy has weakened) और फौज का शासन कायम हुआ। पश्चिम से आई है आधुनिक लोकतंत्र की अवधारणा इंदौर (मध्य प्रदेश), 8 मई 2022 (हरनाम सिंह और सारिका श्रीवास्तव)। भारत में लोकतंत्र का …

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आरएसएस-मोदी ने लोकतंत्र व स्वतंत्रता को हमेशा के लिए नष्ट कर दिया

the prime minister, shri narendra modi addressing at the constitution day celebrations, at parliament house, in new delhi on november 26, 2021. (photo pib)

लोकतंत्र के ज़रिए चुनकर आए मोदी ने जनता से लोकतंत्र और सुशासन ही छीन लिया आरएसएस-मोदी पाकर लोकतंत्र खोया ! नरेन्द्र मोदी लोकतंत्र के ज़रिए चुनकर आए। लोकतंत्र-लोकतंत्र ! सुशासन-सुशासन ! का नारा देकर आए और विगत आठ सालों में उन्होंने भारत की जनता से लोकतंत्र और सुशासन ही छीन लिया। अब देश में मोदी का शासन है, आरएसएस का …

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इस बुलडोजर समय में साहित्य ही नहीं संसार का लोकतंत्र भी खतरे में है- विष्णु नागर

Book Review-What Why and How

साहित्य के लोकतंत्र के लिए असहमति अति आवश्यक – विष्णु नागर हिन्दू कॉलेज में ‘पुस्तक समीक्षा-क्या, क्यों और कैसे’ पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन (One Day Workshop on ‘Book Review – What, Why and How’ organized at Hindu College) दिल्ली, 25 अप्रैल 2022। ‘सोचना और लिखना ऐन्द्रिक कार्य है जिसमें ज्ञान और भाव इकट्ठे चलते हैं। कलम को चलाना …

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अरविंद नारायण: “दक्षिणपंथी विचारधाराओं का उदय पूंजीवाद द्वारा गढ़ी गई आर्थिक असमानता के गंभीर स्तरों पर निर्भर करता है”

debate

अधिनायकवादी राज्य का मुकाबला : अरविंद नारायण विखर अहमद सईद प्रिंट संस्करण : 25 मार्च, 2022 टी+ टी- (मूल अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद: एस आर दारापुरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट)  लेखक और वकील अरविंद नारायण के साथ साक्षात्कार बेंगलुरु के वकील और लेखक अरविंद नारायण “India’s Undeclared Emergency/ Constitutionalism And The Politics of Resistance” (भारत के अघोषित आपातकाल: …

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लोकतंत्र को रसातल में ले जा रही है हमारी राजनीतिक भाषा

up chunav

Our political language is taking democracy to the abyss 1 ‘कोई भूल नहीं सकता है। 5 साल पहले यूपी को लेकर क्या चर्चा होती थी? 5 साल पहले दबंग और दंगाई ही कानून थे। उन्हीं का कहा ही शासन का आदेश था। 5 साल पहले व्यापारी लुटता था। बेटी घर से बाहर निकलने में घबराती थी और माफिया सरकारी संरक्षण …

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फरसे से किस लोकतंत्र को बचा रहे हैं हिन्दू हृदय सम्राट अखिलेश यादव?

akhilesh yadav farsa

ब्राह्मणों/सवर्णों के रेडिकलाइजेशन का जो काम भाजपा हिंदुत्व के बैनर तले अरसे से कर रही है उसे अखिलेश यादव ने भी स्वीकार कर लिया है. आज वह इसी राजनीति को और मजबूत कर रहे हैं. यह मूलतः लोकतंत्र को कमजोर करने की राजनीति है दरअसल, ब्राह्मणों के बीच महर्षि परशुराम जी को स्थापित करना उनका फरसा प्रदर्शन करना सब उसी …

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भाजपा कार्यकारिणी में मोदी : आसमाँ पै है खुदा और जमीं पै ये

badal saroj narendra modi

Modi in BJP executive: Asma pai hai khuda and zamin pai ye भाजपा कार्यकारिणी में गूँजा मोदी का अहम् ब्रह्मास्मि आलाप हर तीन महीने में होने वाली भाजपा कार्यकारिणी की बैठक (BJP executive meeting) दो वर्ष के लम्बे अंतराल के बाद मात्र एक दिन के लिए हुयी और “तेरे नाम पै शुरू तेरे नाम पै ख़तम” भी हो गयी। बिना …

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सरकार लोकतंत्र का अपहरण करने की हद तक दमन पर उतारू : दीपंकर भट्टाचार्य

भाकपा (माले) का राज्य सम्मेलन पहले दिन लखीमपुर खीरी में हुई किसानों की हत्या के खिलाफ सामूहिक उपवास में बदला माले का तीन दिवसीय उ. प्र. राज्य सम्मेलन शुरू किसान आंदोलन को जीत की मंजिल तक पहुंचाने का कार्यभार इस दौर का हमारा मुख्य उद्देश्य होना चाहिए : दीपंकर भट्टाचार्य राज्य सम्मेलन पहले दिन लखीमपुर खीरी में हुई किसानों की …

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गांधी जी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करना वक्त की जरूरत – डॉ पार्थ शाह

–          लोकनीति निर्माण में लोक को शामिल करना ही लोकतंत्र का मूल उद्देश्य –          सिस्टम का दृष्टिकोण लोक को सहभागी बनाने की बजाय लोक के लिये बाध्यकारी नीतियां बनाने तक सिमटा नई दिल्ली, 26 सितम्बर। थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के प्रेसिडेंट और इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के संस्थापक व डायरेक्टर डॉ पार्थ शाह (Dr Parth Shah, Founder and …

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तानाशाही के हाईवे पर लोकतंत्र की प्रतिरोध शिला

जन्मदिन मोदी का (birthday of modi) था, मना रही थी भाजपा (BJP) और पैसा फूँका जा रहा था उस सरकारी खजाने का जिसे 135 करोड़ जनता से वसूली करके, उसी जनता की जरूरतें पूरी करने के लिए भरा जाता है। झूठ के हुक्काम की 17 बनाम जनता के एलान की 27 सितम्बर | Resistance stone of democracy on the highway of …

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क्या अफगान संकट सुलझाने में भारत सक्रिय भूमिका निभाएगा !

अफगान संकट सुलझाने में भारत की भूमिका! | India’s role in solving the Afghan crisis! देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today लम्बे समय तक निर्वाचित सरकार के शासन के पश्चात अफगानिस्तान पर तालिबानियों का कब्जा होना एक बार फिर से दुनिया भर के लिए चिंता का सबब बन गया है। सारे देशों को मिलकर वहां तत्काल लोकतंत्र …

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वो ‘लोक’लाश थी, जिसे हम ढोते चले गए

वो एचमटी की घड़ियों के कलपुर्जों सा ही बिखरा था, वो तब का भारत था जो टूट कर पाक, हिन्द बना। असल में वो ‘लोक’लाश थी, जिसे हम ढोते चले गए।  वो एचमटी की घड़ियों के कलपुर्जों सा ही बिखरा था, वो तब का भारत था जो टूट कर पाक, हिन्द बना। असल में वो ‘लोक‘लाश थी, जिसे हम ढोते …

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क्या भारत में लोकतंत्र है? यदि हाँ, तो पेगासस जासूसी कांड की जांच अब अनिवार्य है

 Is there democracy in India? If yes, then investigation of Pegasus espionage is now mandatory. विदेशी अखबार द गार्जियन और वाशिंगटन पोस्ट (Foreign newspapers The Guardian and The Washington Post) सहित भारतीय वेबसाइट, द वायर और 16 अन्य मीडिया संगठनों द्वारा एक ‘स्नूप लिस्ट‘ जारी की गयी, जिसमें बताया गया कई मानवाधिकार कार्यकर्ता, राजनेता, पत्रकार, न्यायाधीश और कई अन्य लोग …

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मीडिया पर हमला लोकतंत्र के लिए अशुभ – आइपीएफ

 Attack on media inauspicious for democracy – IPF मीडिया को आतंकित करने की निंदा लवखनऊ 23 जुलाई 2021, दैनिक भास्कर अखबार और भारत समाचार जैसे चैनल पर केन्द्र सरकार के इशारे पर इनकम टैक्स विभाग द्वारा की गई छापेमारी की कड़ी निंदा करते हुए आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने इसे लोकतंत्र के लिए अशुभ माना है। आज प्रेस को जारी …

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आपातकाल के बाद साहित्यिक पत्रिकाएं मेनीपुलेशन और प्रमोशन का अस्त्र बन गयीं

 अव्यवस्थित लोकतंत्र और साहित्यिक पत्रकारिता आजादी के बाद साहित्यिक पत्रकारिता का परिदृश्य- Scenario of Literary Journalism after Independence. आजादी के बाद का साहित्यिक पत्रकारिता का परिदृश्य तकरीबन इकसार रहा है। पहले भी पत्रिकाओं का प्रकाशन निजी पहल पर निर्भर करता था, आज भी यही दशा है। पहले भी साहित्यिक पत्रिकाएं निकलती और बंद होती थीं, यही सिलसिला आज भी जारी …

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लोकतंत्र का कुचलना बन्द करो : भाकपा

Communist Party of India CPI

एस्मा हटाओ, किसानों पर लगे मुकदमे वापस लो, मजदूरी या पगार दो, जहरीली शराब रोको तथा लोकतंत्र का कुचलना बन्द करो : भाकपा लखनऊ- 28 मई, 2021,  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि संविधान और लोकतांत्रिक प्राविधानों के तहत चुन कर सत्ता में आयी भाजपा सरकार ने प्रदेश में लोकतंत्र …

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आग लगने पर चले हैं कुआं खोदने योगी : माले

CPI ML

लखनऊ, 19 अप्रैल। भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने ऑक्सीजन के अभाव में लखनऊ समेत प्रदेश में कोरोना मरीजों की हो रही मौतों (Death of corona patients in Lucknow, including in the state due to lack of oxygen) को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा ऑक्सीजन प्लांट लगाने का आदेश (Order to set up oxygen plant) जारी करने पर कहा है कि …

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श्रीमान हम आपको इस आलेख के कोई पैसे नहीं दे सकते !

media

“श्रीमान हम आपको इस आलेख के कोई पैसे नहीं दे सकते। सहयोग के लिए सम्पादक के धन्यवाद सहित सादर।“ किसी स्वतंत्र पत्रकार के लिए उसके किसी आलेख पर यह जवाब अब आम हो चुका है। स्वतंत्र पत्रकार ही नहीं किसी न किसी संस्थान से जुड़े बहुत से पत्रकार भी कोरोना के दौरान अपनी नौकरी खोने के बाद अब उस दिन …

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लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है देश में असहमति के प्रति बढ़ती असहनशीलता

एल. एस. हरदेनिया। लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

Growing intolerance towards disagreement in the country is a serious threat to democracy न सिर्फ देश का सर्वोच्च न्यायालय, अनेक उच्च न्यायालय, अनेक समाचार पत्र, संविधान एवं न्यायिक क्षेत्र के  अनेक विशेषज्ञ, और यहां तक कि दुनिया के विभिन्न देशों की मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of expression) के प्रति प्रतिबद्ध संस्थाएं यह मानती हैं कि भारत में बोलने …

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जुगनुओं को कैद करता तानाशाह : यही है संघी-भाजपाई “राष्ट्रवाद” – जो शुरू से ही इतना ही फर्जी है

disha ravi

इस बार 21-22 वर्ष की दिशा रवि को बिना किसी तरीके की सुनवाई के सीधे 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। दिशा पर देशद्रोह, राष्ट्र के खिलाफ बगावत और न जाने कैसे-कैसे संगीन आरोप मढ़े गए हैं, अभी और कुछ आरोप गढ़े जाएंगे। कारपोरेट नियंत्रित मोदी मीडिया उन्हें और भी नमक-मिर्च लगाकर दोहरायेगा और पेड़,पौधे, नदी, पहाड़, …

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