प्रतिरोध की संस्कृति इस लोकतंत्र का एक जरूरी हिस्सा- अजय सिंह

अमन के त्योहार ईद पर बेगुनाहों की रिहाई के लिये संकल्प लें- मो0 शुऐब बेगुनाह बच्चों की जल्द रिहाई के लिये ईद पर इज्तेमाई दुआ जरूर करें- हाजी फहीम सिद्दीकी लखनऊ, 08 अगस्त 2013। दलित चिंतक कँवल भारती की गिरफ्तारी के खिलाफ, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिये आज मुँह पर काली पट्टी बाँधकर ‘‘दलित लेखक कंवल भारती से अखिलेश यादव माफी माँगें, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बन्द करो, कँवल भारती की जुबाँ पर जंजीर डालना बन्द करो, कंवल भारती पर से मुकदमा वापस लो’’ लिखी तख्तियाँ लेकर लखनऊ विधानसभा धरना स्थल पर रिहाई मंच के धरने के 79 वें दिन विरोध दर्ज किया। वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह ने दलित लेखक कंवल भारती द्वारा फेसबुक पर लिखे गये कमेंट को लेकर सपा सरकार द्वारा की गयी उनकी गिरफ्तारी को लोकतंत्र के लिये बेहद शर्मनाक बताते हुये कहा कि मुंबई में बाल ठाकरे की मौत के बाद जिन दो लड़कियों को कमेंट करने की वजह से पकड़ा गया और बाद में उन्हें बिना शर्त छोड़ना पड़ा, से यह साफ हो जाता है कि इस देश के राजनैतिक नेतृत्व और पुलिसिया नौकरशाही ने उस घटना से कोई सबक नहीं लिया। उन्होंने कहा कि कंवल भारती जैसे लेखक अंबेडकरवादी विचारधारा के उस तबके से आते हैं जो दलितों की समस्याओं का हल मार्क्सवादी नजरिए से देखते हैं। इस धारा की यह विशेषता रही है कि जहां वामपंथी लेखकों ने गल्तियाँ की उनकी भी जमकर आलोचना करने में वे कभी पीछे नहीं रहे। इस घटना के बाद यह साफ हो चुका है कि सपा सरकार को विरोध के स्वर बिल्कुल भी पसंद नहीं हैं। प्रतिरोध की संस्कृति इस लोकतंत्र का एक जरूरी हिस्सा है। सरकार इस हिस्से को खत्म करके इस प्रदेश को एक तानाशाही के माहौल में झोंकने की असफल कोशिश कर रही है। कंवल भारती जैसे दलित चिंतक की गिरफ्तारी इसी बात का संकेत हैं और हम लोकतंत्र पसंद अवाम इसके खिलाफ आखिरी साँस तक लड़ेंगे। रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि ईद के मौके पर अगर सपा सरकार ने बेगुनाहों को रिहा कर दिया होता तो वे भी आज अपने परिवार के साथ ईद की खुशियाँ मना रहे होते। लेकिन सरकार ने इस गंभीर मसले पर मुसलमानों को हर कदम पर केवल धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की नींव में इंसाफ है। कुछ सपा के दलाल नेता और कुछ उलेमा यह सब भुला देने की बात इन दिनों अफ्तार पार्टियों में कह रहे हैं। पर आप अपने बेगुनाह बच्चों के बारे में और उनके घर-परिवार और पूरे समाज को देखें की आज इन सरकारों ने आपको बेबस कर दिया है, किसी भी सपा के नेता से मिलने से पहले जरूर सोचिएगा कि इन लोगों ने खालिद की हत्या के बाद एक शब्द नहीं बोला। ऐसे बेबसी के हालात बताते हैं कि देश में अमन नहीं है और ऐसे में ईद जैसे अमन के त्योहार पर आप संकल्प लीजिए कि आप अपने मुल्क में अमन को स्थापित करने के लिये हर कीमत चुकाएंगे। हम आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह जो जेलों में बंद हैं उनसे और उनके परिजनों से यह वादा करते हैं कि अन्याय के खिलाफ न्याय की इस जंग को अंतिम दम तक लड़ेगी अवाम। मोहम्मद शुऐब ने अपील की कि ईद के नमाज के बाद बेगुनहों की रिहाई के पक्ष में खुतबा पढ़कर इंसाफ की इस तहरीक को मजबूत किया जाये। ईद के दिन काली पट्टी बाँधकर वादा खिलाफ सपा सरकार का विरोध करें। हाजी फहीम सिद्दीकी ने कहा कि आज तारिक जैसे सैकड़ों बेगुनाह जेलों में ठूँस दिये गये हैं। उनके घर वालों में गम और गुस्सा है। लेकिन इस मदारिस व दर्सगाहों में जहाँ लोगों को यह शिक्षा दी जाती है कि सभी मुसलमान एक जिस्म की मानिन्द हैं और अगर जिस्म के किसी अंग में पीड़ा होती है तो दूसरे अंग भी उसे महसूस करते हैं। जैसे अपने जिस्म का अंग काट दिये जाने से शरीर के दूसरे अंगों को पीड़ा होती है, ठीक वैसे ही मौलाना खालिद की हत्या के बाद मुसलमान समाज इस पीड़ा को महसूस कर रहा है। हम लोगों से अपील करते हैं कि अपने समाज के बेगुनाह बच्चों की जल्द रिहाई के लिये ईद पर इज्तेमाई दुआ जरूर करें। ताकि हमारे बेगुनाह जिनकी जवानी मुल्क के काम आने के बजाय जेलों में सड़ रही है वो बाइज्जत रिहा हो सकें। हाजी फहीम सिद्दीकी ने कहा कि प्रदेश में जगह-जगह मस्जिदों में बेगुनाहों की रिहाई के लिये दुआ हो रही है, आज सुबह लाल कुएं की छंगासा मस्जिद पर मोहम्मद कफील अशरफ ने बेगुनाहों की रिहाई के लिये दुआ करवाई। पिछड़ा समाज महासभा के एहसानुल हक मलिक, शिव नारायण कुशवाहा और भारतीय एकता पार्टी (एम) के सैयद मोईद अहमद ने कहा कि आजादी के पूरे 65 सालों में मुसलमानों का बड़े पैमाने पर सुनियोजित तरीके से कत्लेआम हुआ है। एक षड़यंत्र के तहत बम विस्फोटों में मुसलमानों को झूठी कहानियाँ गढ़ कर फंसाया गया है। फर्जी एनकाउंटर किये गये हैं। इस देश के मुसलमान किस मुँह से ईद की खुशियाँ मनायें? जब सरकारें ही बेगुनाहों के कत्लेआम में जुटी हों तो फिर हमें इस मुल्क में जगह कहाँ मिलेगी ? सरकार अफ्तार के बल पर हमें भरमाने की कोशिश करती है लेकिन अब इंसाफ मिल कर रहेगा। जम्हूरियत की ताकत के आगे सब बौने हैं और अब जम्हूरियत जाग चुकी है। धरने को संबोधित करते हुये सामाजिक कार्यकर्ता अमित मिश्रा और लक्ष्मण प्रसाद ने कहा कि एक तरफ खुलेआम सपा के संरक्षण में सामंती ताकतें विधानसभा पर देश के संविधान निर्माता डॉ0 अम्बेडकर को गालियाँ देते हैं पर प्रशासन उन पर कोई कार्यवाई नहीं करता है और दूसरी तरफ दलित लेखक कँवल भारती को सिर्फ फेस बुक पर लिख देने की वजह से गिरफ्तार कर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि सपा के नेता कंवल भारती के मुद्दे पर सफाई देते घूम रहे हैं पर आजम खान के मीडिया प्रभारी द्वारा ही कंवल भारती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। दरअसल सपा जान चुकी है कि वंचित समाज चाहे वो पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक हो कोई भी तबका उसके साथ नहीं है इसीलिये वो कभी पिछड़ों द्वारा आरक्षण का सवाल उठाने पर लाठी चार्ज करवाती है तो कभी किसी खालिद जैसे बेगुनाह की हत्या करवाती है। धरने को संबोधित करते हुये मुस्लिम मजलिस उत्तर प्रदेश के प्रवक्ता जैद अहमद फारूकी ने कहा कि सरकार ने दलित लेखक कंवल भारती को गिरफ्तार करके इंसाफ की हर लड़ाई चाहे वो रिहाई मंच लड़ रहा हो या अन्य सभी को डराने की कोशिश कर रही है। लेकिन हम डरने वालों में नही हैं। इंसाफ के लिये हमारी लड़ाई मरते दम तक जारी रहेगी। प्रदेश में हमारी पार्टी के नेता कल हर मस्जिद पर काली पट्टी बाँधकर सपा सरकार की वादा खिलाफी का विरोध करेंगे। रिहाई मंच के प्रवक्ता ने अपील की कि ईद की नमाज के बाद पिछले 79 दिनों से मौलाना खालिद को न्याय दिलाने और बेगुनाहों की रिहाई के लिये चल रहे आंदोलन में जरूर शिरकत करें। धरने का संचालन वाराणसी से आये सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण प्रसाद ने किया। धरने में भारती एकता पार्टी (एम) के सैयद मोईद अहमद, पिछड़ा महासभा के एहसानुलहक मलिक, शिवनारायण कुशवाहा, मुस्लिम मजलिस के नेता जैद अहमद फारूकी, पत्रकार फैज मुसन्ना, पत्रकार अजय सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता योगेन्द्र सिंह यादव, हरे राम मिश्र, बब्लू यादव, सामाजिक कार्यकर्ता अमित मिश्र, राजीव यादव समेत अनेक लोग मौजूद थे।

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