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सावधानी बरतें : डीवीटी से हमेशा के लिए राहत पाए

जब शरीर की भीतरी धमनियों में रक्त थक्के के रूप में जम जाता है, तो उसे डीवीटी यानी डीप वेन थ्रोंबोसिस deep vein thrombosis या गहरी नस घनास्रता, कहा जाता है.

यह थक्के तब बनते हैं जब रक्त जमकर गाढ़ा हो जाता है. ये अक्सर पैरों के निचले हिस्से और जांघों में होता है. साथ ही, ये शरीर के अन्य भागों में भी बन सकते हैं. कई बार ये थक्के टूटकर रक्त द्वारा संचालित होने लगते हैं. खुले या लूज थक्कों को एंबोलस कहा जाता है. जब यह थक्का फेफड़ों तक जाकर रक्त प्रवाह को अवरूद्ध कर देता है, तो इसे पल्मोनरी एंबोलिज्म (Pulmonary embolism) कहा जाता है. इसे लघु रूप में पीई भी कहा जाता है, जिसमें जान जाने का भी खतरा रहता है.

क्या होता है पल्मोनरी एंबोलिज्म What happens to the pulmonary embolism

इसके अंतर्गत सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत होती है. फेफड़े तक रक्त के थक्के के पहुंचने के 30 मिनट के अंदर मरीज की मृत्यु हो सकती है.

सबसे अधिक परेशानी वाली बात यह है कि डीवीटी के 80 प्रतिशत मामलों में किसी तरह के लक्षण प्रकट नहीं होते इसलिए इसे लेकर विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है.

खास बात यह है कि इस रोग के हमले के अधिक अवसर तब उत्पन्न होते हैं जब मरीज सक्रिय नहीं होता. बहुत लंबी हवाई, रेल या कार यात्रा के दौरान अक्सर ही यह रोग घेरता है, जब शरीर लंबे समय तक एक ही स्थान पर स्थिर रहा करता है.

डीवीटी के लक्षण Symptoms of DVT

मुंबई स्थित पी डी हिंदुजा हास्पिटल के वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डा. संजय अग्रवाला का कहना है कि  पैरों या पैर की एकाध धमनी में सूजन होना, पैरों में दर्द होना खासकर खड़े होते समय या चलते समय, सूजन वाले भाग में जलन या गर्मी का एहसास होना. त्वचा का रंग बदलना आदि.

डीवीटी में सावधानियां बरतें

ऐसे मरीज जिनके बारे में मालूम हो चुका है कि उन्हें डीवीटी है, उन्हें कुछ सावधानियां बरतनी चाहिएं, ताकि परेशानी पैदा करने वाली जटिलताएं नहीं होने पाएं.

एस्प्रिन नामक दवा का सेवन करने से भी रक्त को पतला होने से रोका जा सकता है. धूम्रपान करने वाले लोगों को धूम्रपान त्याग देना चाहिए.  उदाहरण के लिए अगर लंबी रेल या हवाई यात्रा पर जाना हो तो यात्रा आरंभ करने से पहले एस्प्रीन की हल्की मात्रा ले लेनी चाहिए.

इसी तरह हवाई जहाज या ट्रेन में अपने केबिन या सीट के आस-पास तक चहलकदमी कर लेने से डीवीटी के खतरे को कम किया जा सकता है.

रक्त को अगर जमने नहीं दिया जाएगा या फिर जमे हुए रक्त के थक्के को फेफड़े तक नहीं पहुंचने दिया जाएगा तो फिर डीवीटी का खतरा नहीं रहेगा.

जिन लोगों के डीवीटी का शिकार हो जाने का अधिक खतरा रहता है उन्हें कंप्रेशन स्टॉकिंस पहनने की सलाह दी जाती है.

डीवीटी किन लोगों में पाया जाता है?

डा. संजय अग्रवाला का कहना है कि डीवीटी उन लोगों में अधिक पाया जाता है जो अधिक यात्रा करते हैं खासकर कार या हवाई जहाज में. वे लोग जो कि किसी बीमारीवश जैसे हार्ट फेल्योर, फ्रैक्चर, सांस संबंधी तकलीफ, ट्रॉमा, दुर्घटना आदि के बाद लंबे समय तक बेड पर रहते हैं, वे लोग भी इसका शिकार हो सकते हैं.

मधुमेह से पीड़ित मोटे लोग, धूम्रपान करने वाले लोग एवं वे महिलाएं जो कि गर्भधारण से बचने के लिए दवाओं का इस्तेमाल करती हैं, भी डीवीटी के निशाने पर होती हैं.

डीवीटी की रोकथाम Prevention of DVT

अपने डॉक्टर से नियमित जांच कराएं. दवाओं को समय से लें.

किसी भी बीमारी या सर्जरी के बाद जल्द से जल्द बिस्तर से उठें.

अपने पैरों को आगे की तरफ फैलाएं और खींचे ताकि रक्त प्रवाह ठीक से हो.

लंबे सफर करते वक्त निम्नलिखित बातों का ध्यान दें.

लंबे सफर के दौरान पैरों का व्यायाम करते रहें.

लिफ्ट और एक्सीलेटर के बजाए सीढ़िय़ों का प्रयोग करें.

ढीले-ढ़ाले व आरामदायक कपड़े पहनें.

ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थ का सेवन करें और एल्कोहल न लें.

व्यायाम से भी मिल सकता है छुटकारा

व्यायाम से भी आप कुछ हद तक डीवीटी से आराम पा सकते हैं. विशेषकर तब, जब आप लंबे समय तक बिस्तर पर रहे हों.

मोटे लोगों को अपना अतिरिक्त वजन कम करना चाहिए. नियमित तौर पर वॉकिंग करने से भी आप को बहुत मदद मिलेगी. इससे आप के पैर में डीवीटी विकसित नहीं हो पाएगा. पैरों का व्यायाम जैसे बैठै हुए अपनी एडिय़ों को घुमाते रहना, पैरों के अंगूठों को आगे पीछे की ओर घुमाना चाहिए ताकि तलवों में रक्त एकत्रित न हो.

डीवीटी मरीजों के लिए विशेष

पैरों के लिए विशेष तकिए बनाए गए हैं ताकि यात्रा करते हुए लोग उसकी सहायता से पैरों का व्यायाम कर सकें.

हर हाल में सक्रिय रहना बहुत जरूरी है. आम तौर पर ऑपरेशन के कुछ समय बाद तक मरीज को अस्पताल में ही रहना पड़ता है ताकि उसे चिकित्सकों की निगाहों में रखा जाए और किसी भी तरह की जटिलता उत्पन्न होने पर तात्कालिक रूप से कार्रवाई की जा सके. इस दौरान उन मरीजों को जितनी जल्दी हो सके सक्रिय होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. डीवीटी के मरीजों को कंप्रेशन स्टाकिंग्स पहनने की सलाह दी जाती है.

डीवीटी का उपचार Treatment of deep vein thrombosis (DVT)

डा.संजय अग्रवाला का कहना है कि यह पता लग जाने के बाद कि मरीज को डीवीटी है, उसे तत्काल ही इंजेक्शन के सहारे हेपैरिन दवा दी जाती है. मरीजों को इसी तरह की दवा- वारफ रीन खाने की सलाह दी जाती है. यह दवा कई महीनों तक चल सकती है.

जब मरीज इन दवाओं का सेवन कर रहा होता है तो बार-बार रक्त की जांच करवाते रहना चाहिए, ताकि यह अंदाजा होता रहे कि मरीज को रक्त को पतला करने वाली इन दवाओं की सही मात्रा दी जा रही है या नहीं. ऐसा करके ही हैमरेज के खतरे को दूर रखा जा सकता है. ऐसा होने पर डीवीटी का कम खतरा रहेगा.

ऑपरेशन के विकल्प को बहुत कम अवसरों पर ही आजमाया जाता है. किसी भी आपरेशन या सर्जरी के बाद अधिक दिनों तक बेड पर न रहने की हिदायत दी जाती है.

एंटीकोगुलेंट दवाइयां (Anticogulant medicines) डीवीटी का उच्चस्तरीय उपचार हैं जैसे :- हेपारिन व वेराफेरिन (heparin and warfarin mechanism of action). ये रक्त में नए-नए क्लाट या गांठ बनने से रोकने में मदद करते हैं. साथ ही पुरानी गांठों को बड़ा भी नहीं होने देती हैं. ये इन गांठों को घटा तो नहीं सकते क्यों कि आप का शरीर धीरे-धीरे खुद ही इन गांठों को समाप्त कर देता है.

पैरों के लिए विशेष तकिए बनाए गए हैं ताकि यात्रा करते हुए लोग उसकी सहायता से पैरों का व्यायाम कर सकें. हर हाल में सक्रिय रहना बहुत जरूरी है.

आम तौर पर ऑपरेशन के कुछ समय बाद तक मरीज को अस्पताल में ही रहना पड़ता है ताकि उसे चिकित्सकों की निगाहों में रखा जाए और किसी भी तरह की जटिलता उत्पन्न होने पर तात्कालिक रूप से कार्रवाई की जा सके. इस दौरान उन मरीजों को जितनी जल्दी हो सके सक्रिय होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.

बड़े डीवीटी के केसों में लिम्ब इस्कीमिया (Limb ischemia) भी हो सकता है. इससे धमनियों पर दबाव पड़ता है. इससे गैंगरीन, त्वचा में इंफेक्शन होने के भी खतरे रहते हैं.

डीवीटी जवां लोग में कम पाया जाता है. ये अपना शिकार 40 से अधिक उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाता है. लेकिन किसी भी प्रकार का अंदेशा होने पर तुरंत ही डाक्टर से संपर्क करें, स्वयं डॉक्टर न बनें. इंटरनेट पर स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान (Health related knowledge on the Internet) भ्रामक हो सकता है।

प्रस्तुति – उमेश कुमार सिंह

( नोट – यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। यह जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई अव्यावसायिक रिपोर्ट मात्र है। आप इस समाचार के आधार पर कोई निर्णय कतई नहीं ले सकते। स्वयं डॉक्टर न बनें किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें।) Symptoms of DVT in Hindi

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