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Mahatma Gandhi International Hindi University Wardha

अवसरों को उपलब्धियों में बदलना चाहिए – प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल

विश्‍वविद्यालय
अनुदान आयोग की परियोजना ‘स्‍ट्राइड’ पर शिक्षकों के साथ चर्चा
(discussions
with teachers on University Grants Commission’s ‘Stride’)

वर्धा, 13 जुलाई 2019 : महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो.
रजनीश कुमार शुक्‍ल
(Mahatma Gandhi International Hindi University
Vice Chancellor Prof. Rajneesh Kumar Shukla) ने विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग की महत्‍वाकांक्षी
परियोजना ‘स्‍कीम्‍स फॉर ट्रांस-डिसिप्लिनरी रिसर्च फॉर इंडियाज डेवलपिंग इकोनोमी’
(स्‍ट्राइड)– University
Grants Commission’s ambitious project ‘Scheme for Trans-disciplinary Research
for India’s Developing Economy’ (STRIDE)
पर अध्‍यापकों एवं अधिकारियों के लिए आयोजित
बैठक में कहा है कि इस परियोजना के माध्‍यम से हमें अच्‍छा अवसर प्राप्‍त हुआ है, हमें अनुसंधान के कार्य के माध्‍यम से इस अवसर
को उपलब्धियों (research culture in India) बदलना चाहिए।

STRIDE
Objectives in Hindi

ज्ञात
हो कि विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग ने हाल ही में ‘स्‍ट्राइड’ योजना प्रारंभ की है।
उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में अनुसंधान संस्‍कृति और नव-नवोन्‍मेष को बढ़ावा देना
इसका मुख्‍य उद्देश्‍य है। राष्‍ट्रीय वृद्धि और विकास के लिए विद्या‍र्थी और
शिक्षकों को सहयोगी अनुसंधान के माध्‍यम से मदद करना इस योजना के केंद्र में है।

योजना
के अंतर्गत सामाजिक दृष्टि से प्रासंगिक, स्‍थानीय
दृष्टि से मददगार, राष्‍ट्रीय दृष्टि से महत्‍वपूर्व और
वैश्विक दृष्टि से सार्थक अनुसंधान परियोजनाओं के लिए प्रोत्‍साहन  दिया जाएगा।

लोक
कल्‍याण और नागरी समाज को बल प्रदान करने के लिए नई संकल्‍पनाओं, विचारों और कार्यों के निर्माण, विकास और एकीकरण के लिए इस योजना में खास ध्‍यान
दिया जाएगा। मानविकी और मानव विज्ञान पर अधिक बल देते हुए भारतीय भाषाओं और ज्ञान
प्रणाली में गुणवत्‍तापूर्ण अनुसंधान की परिकल्‍पना इस योजना के त‍हत की गयी है।

इस
योजना के परिचालन के कुल 42 पृष्‍ठों के निशानिर्देशों में योजना
की विस्‍तार से व्‍याख्‍या दी गयी है और अनुसंधान के लिए आवश्‍यक प्रारूप और
विषयों का उल्‍लेख किया गया है।

इस
योजना में महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के शिक्षकों को
शामिल होने का आहवान करते हुए कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने मंगलवार, 9 जुलाई को आयोजित बैठक में कहा कि भाषा का विश्‍वविद्यालय
होने के कारण हमारे लिए ‘स्‍ट्राइड’ में काफी संभावनाएं बनी हुई है।

उन्‍होंने
कहा कि गांधी की कर्मभूमि वर्धा और आसपास के परिक्षेत्र को हमें अपने अनुसंधान का
विषय बनाना चाहिए और समाज तथा देश के विकास को नई दिशा का मार्ग प्रशस्‍त करने की
दृष्टि से काम करना चाहिए। इससे अकादमिक विकास और सामाजिक उन्‍नति का रास्‍ता बन
सकेगा।

उन्‍होंने
गांधी जी के 150 वें जयंती वर्ष के प्रसंग में इस
योजना में शामिल होना और भी प्रासंगिक और उपयोगी बताया।

उन्‍होंने
कहा कि विभाग और व्‍यक्तिगत स्‍तर पर इस योजना के तहत प्रस्‍ताव भेजे जाने चाहिए।
इस अवसर पर कार्यकारी कुलसचिव प्रो. कृष्‍ण कुमार सिंह एवं वरिष्‍ठ प्रोफेसर मनोज
कुमार मंचासीन थे। 

योजना
के अंतर्गत शिक्षकों और अधिकारियों ने अपने-अपने अनुसंधान के विषयों की चर्चा की।

प्रो. हनुमान प्रसाद शुक्‍ल, प्रो. कृपा शंकर चौबे, प्रो. मनोज कुमार, डॉ. सुरजीत कुमार सिंह, विरेंद्र प्रताप यादव, डॉ. धरवेश कठेरिया, डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ. अमरेंद्र शर्मा, डॉ. ओम प्रकाश भारती, डॉ. सतीश पावड़े, प्रो. विजय कुमार कौल, डॉ. हर्षलता पेटकर, डॉ. मुन्‍नालाल गुप्‍ता, डॉ. पीयूष प्रताप सिंह, बी. एस. मिरगे  आदि ने विभिन्‍न अनुसंधान क्षेत्रों को लेकर विस्‍तार से चर्चा की।



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