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सबसे बड़ी जरूरत चाहे एक वक्त कम खायें पर अपने बच्चों को अवश्य पढ़ाएं

शहरी गरीबों हेतु कार्यशाला सम्पन्न Workshop for urban poor

वाराणसी 21 जुलाई 2019. एम ट्रस्ट शहरी गरीबों के समुचित विकास के मुद्दे पर वाराणसी में समावेशी शहर परियोजना के अंतर्गत कार्य कर रहा है। परियोजना का उद्देश्य शहरी गरीबों के पहचान व उनके मूलभूत अधिकारों तक उनकी पहुँच को सुनिश्चित कराना है। इसी उद्देश्य से आज वाराणसी में हाउसिंग और स्ट्रीट वेंडिंग पर सरकारी अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक का आयोजन किया गया जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि पार्षद, वाराणसी नगर निगम और डूडा के अधिकारियों अनेक गणमान्य लोगों ने बैठक में भाग लिया जिसमें शहरी गरीबों के हाउसिंग और स्ट्रीट वेंडिंग के मुद्दों को उठाया गया।

एम ट्रस्ट के निदेशक संजय राय ने कहा कि शहर में जो भी रेड़ी पटरी दुकानदार हैं, उनके अधिकारों के लिए कानून, पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विनियमन) अधिनियम 2014 के पारित होने के बावजूद पथ विक्रेताओं की बेदखली और उत्पीड़न एक दैनिक दिनचर्या की तरह जारी है। इस कानून के अनुसार शहर की जनसँख्या के संभावित ढाई प्रतिशत पटरी दुकानदारों का पंजीकरण किया जाना चाहिए और उन्हें भयमुक्त वातावरण में आजीविका चलाने का अधिकार दिया जाना चाहिए, साथ ही उनकी जबरन बेदखली को बंद किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि रेहड़ी पटरी दुकानदारों के लिए कानून के तहत प्रस्तावित विवाद समाधान तंत्र का निर्माण करते हुए पटरी दुकानदारों के उत्पीड़न के निवारण की समुचित व्यवस्था किया जाना चाहिए।

असंगठित कामगार अधिकार मंच के डॉ. मुहम्मद आरिफ ने कहा कि शहर में लोगों के जीवनयापन से सम्बंधित सभी प्रकार की सेवा देना नगर पालिका का काम है जैसे – पानी, सीवर लाइन, कूड़ा उठवाना, यहाँ तक कि लोगों के जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र वही बनाता है, लेकिन देश के किसी भी शहर में 100 प्रतिशत सीवर लाईन की व्यवस्था, 100 प्रतिशत पानी की उपलब्धता या 100 प्रतिशत साफ़ सफाई का कार्य अभी तक नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि 74 वां संशोधन देश में लागू होने के पश्चात आज तक बोर्ड की बैठकों के अलावा कोई काम नहीं हुआ यानि अभी तक इसे जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया।

श्री आरिफ ने कहा कि वार्ड समितियों के गठन होने के बाद ही शहर और आम नागरिकों के अधिकार व विकास की सम्भावना हो सकती है I

सुश्री सुमन (विशेषज्ञ, शहरी मुद्दों व संगठन निर्माण) ने कहा कि शहर में बेघर लोगों को सबसे अधिक हाशिये पर रहने वाले वर्गों के रूप में पहचानने और उन्हें शामिल किये जाने के लिए प्राथमिकता देने की ज़रूरत हैI बेघरों को शहर के निर्माताओं के रूप में पहचाना जाना चाहिए। आवासीय योजनाओं, (PMAY और राज्यविशेष) के अभिसरण में मान्यता दिया जाना चाहिए और उनके लिए प्रावधान होने को प्राथमिकता के रूप में देखा जाना चाहिए।

अध्यक्षता करते हुए राजनीतिक और सामाजिक चिंतक संजीव सिंह ने  कहा कि बेघरों को न केवल आश्रयों तक ही सीमित रखा जाए, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और कानूनी सहायता से सम्बंधित योजनाओं से भी जोड़ा जाना चाहिए। हम जब स्वच्छ छवि के जन प्रतिनिधियों को चुनेंगे तो ही हमारी समस्याओं का समाधान हो पायेगा। शिक्षित होना आज के समाज की सबसे बड़ी जरूरत है हम चाहे एक वक्त कम खाये पर अपने बच्चों को अवश्य पढ़ाएं।

बैठक में वाराणसी विकास समिति, बुनकर विकास मंच वाराणसी के सदस्यों के अलावा समावेशी शहर परियोजना के समन्वयक अमित कुमार, डॉ नूर फात्मा, आरती, नजराना, क़ैसर जहां, मालती देवी, इक़बाल अहमद, इम्तियाज़, सोशल वर्कर शमा परवीन और आशीष सिंह उपस्थित रहे।

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