विश्व कैंसर दिवस : सर्जरी से कैंसर रोगी का लिंग पुनर्निर्माण संभव !

जयपुर, 4 फरवरी। राजस्थान की राजधानी (Rajasthan's capital) के चिकित्सकों ने पुरुष जननांग में हुए कैंसर (cancer of the male genitalia) – सीए पेनिस (CA penis) रोगी के लिंग पुनर्निर्माण (penis reconstruction) सर्जरी में अनोखी सफलता हासिल की है। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (Lord Mahavir Cancer Hospital and Research Center) के चिकित्सकों की टीम ने 64 वर्षीय राजेश कुमार (परिवर्तित नाम) की एक ही सर्जरी में कैंसर की गांठ निकालकर यूरीनरी फंक्शन के साथ लिंग पुनर्निर्माण किया है। संभाग के इस पहले मामले को चिकित्सालय के प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन डॉ. उमेश बंसल की टीम ने ऑपरेट कर सफलता हासिल की है।

World Cancer Day:

डॉ. बंसल ने बताया कि जोधपुर निवासी इस रोगी के लिंग में कैंसर की गांठ थी। गांठ के लिंग में फैले होने के कारण लिंग को बचाना संभव नहीं था, इसलिए लिंग निकालने के साथ ही लिंग पुनर्निर्माण सर्जरी की योजना बनाई गई। इसमें रोगी की जांघ से त्वचा और रक्त वाहिनियों को लेकर रोगी के लिंग का पुनर्निर्माण किया गया।

छह घंटे चली इस सर्जरी में रोगी का लिंग यूरीनरी फंक्शन के साथ पूर्ण रूप से बनाया गया। इस सर्जरी में डॉ. बंसल के साथ ही कैंसर सर्जन डॉ. प्रशांत शर्मा, प्लास्टिक सर्जन डॉ. सौरभ रावत, एनिस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ. पुष्पलता गुप्ता की टीम शामिल थी।

डॉ. बंसल ने बताया कि इंडियन मेडिकल जनरल में कैंसर के रोगी में तत्काल पूर्ण लिंग पुनर्निर्माण (इमिडिएट कम्प्लीट पीनाइल रिकंस्ट्रक्शन) का कोई भी केस नहीं है। आमतौर पर पुरुषों में लिंग पुनर्निर्माण सर्जरी अलग-अलग चरणों में की जाती है। इसमें सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण पेशाब की नली बनाना होता है।

कैंसर रोगी में सर्जरी के बाद किमोथैरेपी और रेडिएशन थेरेपी की जरूरत होती है। जिसकी शुरुआत सर्जरी के छह सप्ताह के भीतर की जाती है। इस वजह से इस रोगी में एक ही सर्जरी के दौरान बगैर किसी जटिलता के पूर्ण लिंग निर्माण करना आवश्यक था, जिसमें चुनौतियों के बावजूद सफलता हासिल की गई।

डॉ. सौरभ ने बताया कि इस तकनीक के जरिए सर्जरी करने पर रोगी को मानसिक तनाव से दूर रखने के साथ ही उसकी ओर समय और पैसों की बचत भी की गई।

रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. निधि पाटनी ने बताया कि कैंसर रोगियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होती जा रही है। देश में हर साल 11.57 नए कैंसर के रोगी सामने आ रहे और 7.84 लाख कैंसर रोगियों की मौत हो रही है। राजस्थान में कैंसर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसमें पुरुषों में मुंह और फेफड़े का कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर की संख्या सबसे ज्यादा है।

कैंसर के प्रारंभिक लक्षण : बचाव के लिए इन बातों रखें ध्यान

Early symptoms of cancer: Keep these things in mind to defend

सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत शर्मा ने बताया कि शरीर में आने वाले परिवर्तनों को नजरअंदाज न करें, तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए। खान-पान या शौच की आदतों में बदलाव, आवाज में परिवर्तन, मुंह में छाला, ना भरने वाला घाव, शरीर के किसी भी अंग में गांठ का महसूस होना आदि कैंसर के प्रारंभिक लक्षण हैं, जिनकी जांच और चिकित्सीय परामर्श जरूरी है। आमजन में इन लक्षणों को लेकर जानकारी के अभाव के कारण कैंसर रोगियों में रोग की पहचान देरी से होती है।

डॉक्टरों ने बताया कि रोकथाम में कैंसर रजिस्ट्री अहम भूमिका निभाती है। रजिस्ट्री के माध्यम से उस क्षेत्र में कैंसर रोगियों की संख्या, रोग के प्रकार, उपचार के असर आदी मुख्य जानकारियां शामिल होती हैं।

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  1. […] बत्रा ने बताया कि फेफड़ों के कैंसर को रोकने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक […]

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