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आजमगढ़ को आतंकगढ़ कहने वाले योगी बताएं उन पर हत्या और डकैती के कितने मुकदमे दर्ज हैं

लखनऊ/आजमगढ़, 26 अप्रैल 2019। रिहाई मंच ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Uttar Pradesh’s Chief Minister Yogi Adityanath) द्वारा आज़मगढ़ (Azamgarh) को ‘आतंकगढ़’ (Terror castle) और ‘आतंक का किला’ (Fort of terror) कहे जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। आज़मगढ़ की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत (Academic and cultural heritage of Azamgarh) अल्लामा शिब्ली नोमानी, राहुल सांकृत्यायन, अयोध्या सिंह उपाध्याय, कैफी आज़मी और प्रोफ़ेसर तुलसीराम की विरासत है न कि किसी हेट स्पीच वाले नेता (Leader with Hate Speech) की।

योगी आदित्यनाथ के खिलाफ क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे आवामी कौंसिल महासचिव असद हयात ने कहा कि साम्प्रदायिकता खुद एक आतंकवाद है (Communalism itself is a terrorism)। समाज में नफ़रत फ़ैलाने और बाटने की राजनीति के जरिये योगी वोटों के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की गन्दी राजनीति कर रहे हैं जिसे अवाम बर्दाश्त नहीं करेगी।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि आज़मगढ़ को आतंकगढ़ बताने वाले योगी बताएं कि कितने हत्या, लूटपाट, भड़काऊ-सांप्रदायिक भाषण और आगजनी के मुकदमें उन पर दर्ज हैं। उन्हें बताना चाहिए कि क्या मालेगांव-अजमेर धमाकों में उनका नाम नहीं है। सच्चाई यह है कि अपराधी के नाम पर जिन दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों को मुठभेड़ों में ठोकने की बात योगी कहते हैं उनमें से अधिकांश पर नामजद मुकदमे तक दर्ज नहीं हैं। योगी बताएं कि क्या दलित-मुसलमान ही देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, जो उनपर रासुका लगाकर पूरे वंचित समाज को आतंकी ठहराया जा रहा है। एक तरफ प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव लड़ाया जा रहा है दूसरी तरफ एक जिले, जिसकी आंदोलनों की विरासत रही है उस पर आतंक का ठप्पा लगाकर बदनाम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ पर खुद भड़काऊ भाषण देने और हत्या के प्रयास समेत कई अपराधिक मामले दर्ज हैं और मुख्यमंत्री बनने के बाद से लगातार वह खुद ही जज बनकर उन मुकदमों को खत्म करने में लगे हुए हैं। मामला आज भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। डीएनए जैसी नस्लीय टिप्पणी करने वाले योगी को बताना चाहिए कि गुरू गोरखनाथ के विचारों (Thought of Guru Gorakhnath) को क्या वो आत्मसात करते हैं।

राजीव यादव ने कहा कि योगी ने आज़मगढ़ की जिस शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत की बहाली की बात की है वह निरंतरता से जारी है और खुद उनके अंदर नैतिक क्षमता नहीं है कि वह उस विरासत के आसपास भी फटक सकें।

उन्होंने कहा कि आज़मगढ़ की शैक्षणिक विरासत अल्लामा शिबली, राहुल सांकृतायन, अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध, प्रोफ़ेसर तुलसीराम से होती हुई कैफी आज़मी के माध्यम से नई पीढ़ी तक बखूबी हस्तानांतरित हुई है वह किसी ढोंगी बाबा या अश्लील गवैये की मोहताज नहीं है।

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