उत्तर प्रदेश में आंदोलनकारियों का उत्पीड़न बंद किया जाए

Stop harassment of agitators in Uttar Pradesh

नई दिल्ली, 22 जून 2020. आल इंडिया पीपुल्स फोरम ने उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा लगातार जारी दमन और उत्पीड़न की कार्रवाईयों के क्रम में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे लोकतांत्रिक – प्रगतिशील ताकतों को बिना कारण रिकवरी नोटिस जारी किए जाने की कड़ी निन्दा करते हुए मांग की है कि इसे तत्काल वापस लिया जाए.

‌एआईपीएफ संयोजक गिरिजा पाठक ने कहा कि जब सीएए आंदोलन और उस संदर्भ में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आंदोलनकारियों पर की गई कार्यवाही पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमा लंबित है, तब कोर्ट द्वारा किसी निर्णय को दिए बगैर  इस तरह से रिकवरी नोटिस दिया जाना स्पष्टत: उत्पीड़न की कार्रवाई है और आंदोलनकारियों को इंसाफ से वंचित करने की कोशिश है. एआईपीएफ सचिवालय मांग करता है कि रिहाई मंच के अध्यक्ष और एआईपीएफ के उ.प्र.संयोजक मोहम्मद शोएब, स्वराज अभियान से जुड़े और पूर्व आईजी एस. आर. दारापुरी सहित विभिन्न आंदोलनकारियों को भेजे गए रिकवरी नोटिस वापस लिए जाए.

यही नहीं कोविड-19 महामारी के दौर में भी जब आम जन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है योगी सरकार सीएए-एनसीआर विरोधी आंदोलनकारियों को लगातार निशाने पर लिया जा रहा है, यह लोकतंत्र के लिए चिंतनीय है जिसे सरकार को तत्काल रोका जाना चाहिए।

एआईपीएफ ने मांग की है कि पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रदेश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर यकीन करने वाले जन प्रतिनिधियों पर किसी तरह से राजकीय उत्पीड़न की पुनरावृत्ति न हो.

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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