कपड़ों से पहचान : पहचान का संकट

Jasbir Chawla

कपड़ों से पहचान : पहचान का संकट

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‘दाढ़ी धारी हिंदू’ बछड़े के साथ था,

मुसलमान समझा, मार दिया.

भीड़ भरी बस में अकेला ‘मोना सिख’,

हिंदू समझ कर मार दिया.

पगड़ीधारी सिख था,

गले में टायर डाला, जला दिया,

विदेश में मुसलमान समझ कर मार दिया.

दलित मरे ढोर की खाल उतार रहा था,

गौ हत्यारा कह कर मार दिया.

‘पहचान का संकट’ बढ़ा है इन दिनों

कुछ कपड़ों से आदमी की पहचान करते हैं

 

कुछ करना होगा

‘आधार कार्ड’ गले में टंगा हो

‘पासपोर्ट’ जेब में हो

अर्ध नग्न होना होगा

गफ़लत न हो मारने वाले को

वक्त पर मारे सही आदमी को

 

☘️ जसबीर चावला

 

नाराज़ भेड़ें और भेड़िया

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भेड़ें नाराज़ थी चरवाहे से

जम के मूँड़ता है

घास कम खिलाता है

कुत्ते से हाँका डलवाता है

 

सामने घाघ भेड़िया आया

भेड़ का बाना पहना

क़सम खाई दुख दूर करेगा

भेड़ों ने भेड़िये को चुन लिया

 

भेड़ों को अब नींद नहीं आती

उठ – उठ कर गिनती करतीं भेड़ें

अट्टहास कर रहा भेड़िया

भेड़चाल भी भूल गई भेड़ें

 

☘️ जसबीर चावला

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