भारत में लगभग 10 फीसदी युवा किसी न किसी प्रकार की किडनी की बीमारी से ग्रस्त

जागरूकता में कमी के कारण बढ़ रही है क्रोनिक किडनी डिजीज की समस्या, फोर्टिस अस्पताल नोएडा ने किया जागरूक

The problem of chronic kidney disease is increasing due to lack of awareness, Fortis Hospital Noida made aware

नोएडा, 24 जनवरी 2020 : क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के कारण किडनी की विफलता (Kidney failure) के बढ़ते मामलों और इसके बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए नोएडा स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल ने बुलंदशहर में दिल्ली रोड स्थित शांति दीप हॉस्पिटल में नेफ्रोलॉजी ओपीडी (Nephrology OPD at Shanti Deep Hospital, Delhi Road in Bulandshahr) की विशेष सुविधाओं की शुरुआत की।

यह लॉन्च कार्यक्रम बुलंदशहर के अल्का होटल में आयोजित किया गया था, जिसका संबोधन डॉक्टर अनुजा पोरवाल, वरिष्ठ सलाहकार, नेफ्रोलॉजी व किडनी ट्रांसप्लान्ट विभाग, फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा द्वारा किया गया।

किडनी फेल कैसे होती है … How does kidney fail

नोएडा स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी व किडनी ट्रांसप्लान्ट विभाग की वरिष्ठ सलाहकार, डॉक्टर अनुजा पोरवाल (Dr. Anuja Porwal, Senior Consultant, Nephrology and Kidney Transplant Department, Fortis Hospital, Noida) ने बताया कि,

“किडनी की विफलता या क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) एक ऐसी बीमारी है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है। जब किडनियां रक्त से विषाक्त तत्वों को साफ करने में सक्षम नहीं रहती हैं, तो इसका अर्थ यह है कि किडनी फेल हो गई है। हालांकि, यह बीमारी लाइलाज होती है, लेकिन शुरुआती निदान और समय पर इलाज के साथ बीमारी के बढ़ने व गंभीर होने की गति को धीमा किया जा सकता है। बुलंदशहर में इन ओपीडी सुविधाओं की शुरुआत के साथ, हमारी टीम स्थानीय व पड़ोसी शहरों के मरीजों के लिए अपनी सुविधाओं का विस्तार करने का उद्देश्य रखती है, जिससे लोग आसानी से इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

About 10% of the youth in India suffer from some type of kidney disease.

भारत में लगभग 10 फीसदी युवा किसी न किसी प्रकार की किडनी की बीमारी से ग्रस्त हैं। इसके मुख्य कारणों में डायबिटीज और उच्च रक्तचाप शामिल हैं, जो सीकेडी के 60 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। बढ़ते मामलों की तेज गति देखते हुए इन बीमारियों की रोकथाम आवश्यक हो गई है, जिसका मुख्य कारण जागरूकता में कमी है। यही वजह है कि इस बीमारी के कारण मृत्युदर तेजी से बढ़ रही है। लोगों को बीमारी की रोकथाम के तरीकों, लक्षणों, शुरुआती निदान व समय पर इलाज के बारे में जागरूक करना अनिवार्य है। लोगों को यह बताने की आवश्यकता है कि आज मेडिकल के क्षेत्र में प्रगति के साथ नेफ्रोलॉजी की मदद से इस बीमारी की रोकथाम संभव है।”

चूंकि, अधिकांश लोगों में किसी प्रकार के लक्षण नहीं नजर आते हैं, इसलिए बीमारी अंदर ही अंदर गंभीर होती जाती है और फिर मरीज में इस बीमारी की पहचान एडवांस चरण में होती है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए, हर व्यक्ति के लिए साल में कम से कम एक रुटीन चेकअप कराना आवश्यक है, जिससे कोई लक्षण न नजर आने के बाद भी बीमारी की पहचान सही समय पर की जा सके। इस प्रकार हर व्यक्ति एक लंबा और स्वस्थ जीवन का आनंद ले सकता है।

डॉक्टर पोरवाल ने कहा कि,

“कई ऐसी वजह हैं, जिसके कारण व्यक्ति क्रोनिक किडनी डिजीज का शिकार बनता है और उसके लिए वह खुद जिम्मेदार होता है। इन कारणों में, शराब का अत्यधिक सेवन, धूम्रपान, शरीर में पानी की कमी, ड्रग्स का सेवन, खराब आहार और पेनकिलर दवाइयों का अत्यधिक सेवन आदि शामिल हैं। इसलिए हम इस बीमारी के प्रबंधन का उद्देश्य रखते हैं, जिससे बीमारी के गंभीर होने से पहले ही इसकी रोकथाम हो सके।”

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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