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15 lakh electricity employees of the country celebrated Black Day in protest against power privatization

आत्मनिर्भर भारत के अच्छे दिन : निजीकरण के विरोध में देश के 15 लाख बिजली कर्मचारी करेंगे कार्य बहिष्कार

15 lakh electricity workers will boycott work in protest against privatization

देश के 15 लाख बिजली कर्मियों के साथ उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी केंद्र सरकार की निजीकरण की नीतियों के विरोध में एवं अन्य समस्याओं के समाधान हेतु 03 फरवरी को करेंगे कार्य बहिष्कार

लखनऊ, 19 जनवरी 2021. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने केंद्र सरकार की निजीकरण की नीतियों के विरोध (Opposition to the privatization policies of the central government) में एवं बिजली कर्मियों की ज्वलंत समस्याओं के समाधान हेतु आगामी 03 फरवरी को एक दिवसीय सांकेतिक कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

संघर्ष समिति ने इस आशय का नोटिस केंद्रीय विद्युत मंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार को प्रेषित कर दिया है।

संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों प्रभात सिंह, जी वी पटेल, जयप्रकाश, गिरीश पांडे, सदरूद्दीन राना, राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल, सुहेल आबिद, विनय शुक्ला, बृजेश त्रिपाठी, महेंद्र राय, डीके मिश्रा, शशिकांत श्रीवास्तव, प्रेम नाथ राय, पूसे लाल, एके श्रीवास्तव, वीके सिंह कलहंस, उत्पल शंकर, आरके सिंह, सुनील प्रकाश पाल, शंभू रतन दीक्षित, विशंभर सिंह, जीपी सिंह, पी एस बाजपेई ने बताया कि निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा, ग्रेटर नोएडा और आगरा में बुरी तरह विफल हो चुका है फिर भी केंद्र सरकार ने बिजली के निजीकरण हेतु इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेट) बिल 2020 एवं स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया है जिससे देश भर के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा है। केंद्र सरकार के निर्देश पर केंद्र शासित प्रदेशों चंडीगढ़ और पांडिचेरी में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से चल रही है जिसके विरोध में उत्तर प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता आगामी 03 फरवरी को देश के 15 लाख बिजली कर्मियों के साथ एक दिवसीय सांकेतिक कार्य बहिष्कार करेंगे।

उन्होंने बताया कि बिजली कर्मचारी किसान आंदोलन को नैतिक समर्थन प्रदान कर रहे हैं जिनकी मांगों में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 की वापसी प्रमुख है।

      उन्होंने बताया कि बिजली कर्मचारियों की प्रमुख मांगे इलेक्ट्रीसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2020 व स्टैन्डर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट वापस लेना,निजीकरण की सारी प्रक्रिया निरस्त करना, ग्रेटर नोएडा का निजीकरण व आगरा फ्रेंचाइजी का करार समाप्त करना, विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण निगमों को एकीकृत कर यूपीएसईबी लिमिटेड का गठन करना, सभी बिजली कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल करना, तेलंगाना की तरह संविदा कर्मचारियों को नियमित करना और सभी रिक्त पदों विशेषतया क्लास 3 और क्लास 4 के रिक्त पदों को प्राथमिकता पर भरना, सभी संवर्ग की वेतन विसंगतियां दूर करना और तीन पदोन्नत पद का समयबद्ध वेतनमान प्रदान करना है।

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