स्मिता पाटिल जितना सहज समानांतर फिल्मों में दिखती है उतनी कामर्शियल फिल्मों में नहीं, जानते हैं क्यों ?

स्मिता पाटिल जितना सहज समानांतर फिल्मों में दिखती है उतनी कामर्शियल फिल्मों में नहीं, जानते हैं क्यों ?

Today, 17 October is Smita Patil’s birthday.

आज 17 अक्टूबर स्मिता पाटिल का जन्मदिन है। स्मिता के फिल्मी हिस्से की जानकारी, जिसमें उनकी अदाकारी, प्रस्तुतिकरण की सहजता वगैरह पर बात होती ही रहती है, हम उस हिस्से को औरों के लिए छोड़ दें और दूसरे रुख को सामने करें तो स्मिता को समझने में आसानी होगी।

Smita Patil was born in a political family

स्मिता का जन्म एक सियासी परिवार में हुआ था जहां, गांधी, समाजवाद, कांग्रेस किस्से कहानियों की तरह आंगन में घूमते टहलते रहते थे, चुनांचे स्मिता की परवरिश उस टाट पर हुई, जहां गरीबी और गैरबराबरी जैसी विसंगतियों के खात्मे की बात होती। आजादी का अर्थ केवल अंग्रेज की गुलामी से छुटकारा ही नहीं है बल्कि हर तरह की गुलामी को हटाना है।

कुटीर उद्योग, खादी, हस्तकला का प्रचार और जो निचले पायदान पर हैं उन्हें उठाने के लिए, उनके उत्पाद को बाजार तक ले जाने की चल रही मुहिम में स्मिता शामिल हो गईं। इसका असर उनकी अदाकारी पर देखने को मिलता है।

स्मिता ने दो तरह की फिल्में की हैं या यूं कह सकते हैं कि स्मिता ने हर तरह की फिल्में की हैं लेकिन वे जितना सहज समानांतर फिल्मों में दिखती है उतनी कामर्शियल फिल्मों में नहीं।

इसमें दो राय नहीं कि स्मिता पाटिल ने अपने छोटे से जीवन में फिल्मी दुनिया को झकझोर कर रख दिया।

आखिरी मुलाकात हुई थी त्रिवेणी कला दीर्घा कैंटीन में कोई पुरस्कार लेने दिल्ली आयी थीं। पेमेंट हमें करना पड़ा क्यों कि हम उम्र में स्मिता से बड़े थे।

सादर नमन स्मिता

वरिष्ठ पत्रकार, चित्रकार और बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष चंचल जी की स्मिता पाटिल को श्रद्धांजलि का संपादित रूप साभार

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