विश्व ओजोन दिवस : भारत ने ओजोन संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

विश्व ओजोन दिवस : भारत ने ओजोन संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

भारत ने मनाया 28वां विश्व ओजोन दिवस

मुम्‍बई 17 सितंबर 2022. केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन तथा श्रम और रोजगार मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने कहा है कि मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में नीति निर्माण के संदर्भ में भारत का योगदान उल्लेखनीय है, भारत ने ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के उत्पादन और खपत को धीरे-धीरे समाप्त करने में सक्रिय भूमिका निभाई है।

श्री यादव 28वां विश्व ओजोन दिवस (28th World Ozone Day) मनाने के लिए मुम्‍बई में कल आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन तथा उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने महाराष्ट्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के सहयोग से किया था।

इस अवसर पर केन्‍द्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने कहा कि भारत वैश्विक उत्सर्जन में पारंपरिक योगदानकर्ता नहीं रहा है, लेकिन अपने कार्यों से, हम एक समस्या हल करने का इरादा दिखा रहे हैं।

यह कहते हुए कि दुनिया ऊर्जा के अनावश्‍यक उपयोग के कारण जलवायु संकट का सामना कर रही है, पर्यावरण मंत्री ने एल.आई.एफ.ई.(लाइफ फॉर एनवायरमेंट) का मंत्र अपनाने का आह्वान किया, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने टिकाऊ जीवन शैली की अवधारणा की तर्ज पर गढ़ा था, जो हमें बिना सोचे समझे नहीं बल्कि सावधानी से संसाधनों के उपभोग और इस्‍तेमाल के लिए प्रोत्साहित करता है।

श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बार-बार सावधानीपूर्वक खपत पर ध्यान केन्‍द्रित किया है, उदाहरण के लिए, बर्बादी किए बिना गोदामों और रेफ्रीजरेटर में ऊर्जा का उपयोग कैसे करें, जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ हमारी लड़ाई की तर्ज पर हैं। उन्होंने कहा, भारत उन देशों में से है, जिन्होंने कहा है कि देश का निरन्‍तर विकास इस तरह होगा कि 2070 तक शुद्ध शून्य उत्‍सर्जन का लक्ष्‍य हासिल हो जाए।

किगाली संशोधन को अंतिम रूप देने में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

पर्यावरण मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने किगाली संशोधन को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सितम्‍बर 2021 में इसकी पुष्टि के बाद, केन्‍द्र सरकार हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी) को कम करने के लिए उद्योग के साझेदारों के साथ परामर्श कर एक राष्ट्रीय रणनीति विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि उनका मंत्रालय जल्द ही सम्मिश्रणों सहित कम ग्लोबल वार्मिंग की संभावना वाले रसायनों के अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए आठ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (बॉम्बे, रुड़की, हैदराबाद, कानपुर, गुवाहाटी, बनारस, मद्रास और दिल्ली) के साथ सहयोग करेगा। सहयोगपूर्ण अनुसंधान शोध छात्रों की भागीदारी से उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में एक मजबूत आर एंड डी इकोसिस्‍टम विकसित होगा, और सरकार की मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।

इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान के बारे में जानकारी दी

श्री यादव ने इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (India Cooling Action Plan आईसीएपी) के लक्ष्यों पर भी प्रकाश डाला, जो  एमओईएफसीसी द्वारा विकसित एक दूरदर्शिता दस्तावेज है ताकि 2037-38 की अवधि में रेफ्रिजरेंट के कम उपयोग, जलवायु परिवर्तन को कम करने और निरन्‍तर विकास लक्ष्यों से संबंधित सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ प्रदान किए जा सकें।

उन्होंने सिफारिशों के कार्यान्वयन की प्रगति पर प्रकाश डाला।

The Montreal Protocol: India’s Success Story

केन्‍द्रीय पर्यावरण मंत्री ने “द मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल : इंडियाज सक्सेस स्टोरी” के 23वें संस्करण का विमोचन किया। इस अवसर पर जारी किए गए एमओईएफसीसी के ओजोन सेल के अन्य प्रकाशनों में शामिल हैं-

i) भवनों में थीमेटिक एरिया स्पेस कूलिंग के लिए इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (आईसीएपी) की सिफारिशों को लागू करने के लिए कार्य योजना;

ii) गैर-ओडीएस आधारित रेफ्रिजरेंट का उपयोग करने वाले रेफ्रिजरेशन और एयर कंडीशनिंग (आरएसी) उपकरण के लिए सार्वजनिक खरीद नीतियों की अध्ययन रिपोर्ट;

iii) गैर-ओडीएस और निम्न-जीडब्ल्यूपी रेफ्रिजरेंट को बढ़ावा देने के लिए भारत में कोल्‍ड चेन क्षेत्र पर अध्ययन रिपोर्ट;

iv) रूम एयर कंडीशनरों को ऊर्जा की बचत के साथ चलाने के लिए अच्छी सर्विसिंग कार्य प्रणालियों पर पुस्तिका।

Save our ozone layer : Poster Making and Slogan Writing Competition

विजेता प्रविष्टियों की घोषणा स्कूली बच्चों के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की पोस्टर मेकिंग और स्लोगन राइटिंग प्रतियोगिता के लिए की गई, जिसका विषय था सेव अवर ओजोन लेयर‘ और इसका आयोजन राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय और एमओईएफसीसी के ओजोन सेल ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर पर्यावरण मंत्री ने प्रथम पुरस्‍कार विजेता पोस्‍टर भी जारी किया।

इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान पर एक लघु वीडियो फिल्म और ऊर्जा के किफायती उपयोग पर एक एनिमेटेड संदेश भी जारी किया गया ।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की भारत प्रतिनिधि सुश्री शोको नोडा और महाराष्ट्र में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग में प्रधान सचिव श्रीमती मनीषा मैसकर भी इस अवसर पर उपस्थित थीं।

संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (एशिया प्रशांत) के क्षेत्रीय निदेशक डेचेन त्सेरिंग ने एक वीडियो संदेश में कहा कि भारत ओजोन की परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदा‍र्थों के लिए कार्यक्रम क्रियान्वित करने में सफल रहा है।

जानिए विश्व ओजोन दिवस के बारे में… विश्व ओजोन दिवस का इतिहास, लक्ष्य और महत्व

विश्व ओजोन दिवस प्रत्येक वर्ष 16 सितंबर को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने के अवसर पर मनाया जाता है, जो 1987 में इस दिन लागू हुआ था।

विश्व ओजोन दिवस हर वर्ष ओजोन परत की परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों और इसे संरक्षित करने के लिए किए गए उपायों के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।

विश्व ओजोन दिवस 2022 की थीम

विश्व ओजोन दिवस 2022 का विषय (Theme of World Ozone Day 2022) “मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल @ 35: ग्‍लोबल कोऑरेशन प्रोटेक्‍टींग लाइफ ऑन अर्थ (Montreal Protocol @ 35: Global Cooperation Protecting Life on Earth, -पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करने के लिए वैश्विक सहयोग)” है।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन में क्या हैं भारत की उपलब्धियां?

भारत, जून 1992 से मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के पक्षकार के रूप में, प्रोटोकॉल के चरणबद्ध कार्यक्रम के अनुरूप ओजोन की परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को धीरे-धीरे समाप्त करने के लिए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, परियोजनाओं और कार्यों को सफलतापूर्वक कार्यान्वित कर रहा है।

भारत ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल अनुसूची के अनुरूप 1 जनवरी 2010 को नियंत्रित उपयोग के लिए क्लोरोफ्लोरोकार्बन, कार्बन टेट्राक्लोराइड, हैलोन, मिथाइल ब्रोमाइड और मिथाइल क्लोरोफॉर्म का उत्‍पादन बंद कर दिया।

वर्तमान में, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के त्वरित कार्यक्रम के अनुसार हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन को समाप्त किया जा रहा है।

हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन का इस्‍तेमाल चरणबद्ध तरीके से समाप्‍त करने की प्रबंध योजना (एचपीएमपी) चरण – I को 2012 से 2016 तक सफलतापूर्वक लागू किया गया है और हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन को धीरे-धीरे समाप्‍त करने की प्रबंध योजना (एचपीएमपी) चरण- II 2017 से कार्यान्वयन के अधीन है और 2023 तक पूरी हो जाएगी। शेष एचसीएफसी को धीरे-धीरे समाप्‍त करने के लिए एचपीएमपी का अंतिम चरण III 2023 – 2030 से लागू किया जाएगा। रेफ्रिजरेशन और एयर-कंडीशनिंग विनिर्माण क्षेत्रों सहित सभी विनिर्माण क्षेत्रों में एचसीएफसी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का काम 1.1.2025 तक पूरा कर लिया जाएगा और सर्विसिंग क्षेत्र से संबंधित कार्य 2030 तक जारी रहेंगे।

भारत में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल कार्यान्वयन (Montreal Protocol Implementation in India) के तहत ओजोन की परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों (substances that damage the ozone layer) (ओडीएस) को धीरे-धीरे समाप्‍त करने के माध्यम से ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन में कमी पर अध्ययन।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा कराए गए अध्‍ययन में अनुमान लगाया गया है कि 2022 तक ओडीएस के धीरे-धीरे समाप्‍त होने के कारण जीएचजी उत्सर्जन में 465 मिलियन टन कार्बनडाइक्‍साइड के बराबर कमी आएगी, जबकि उम्मीद है कि 2030 तक जीएचजी के उत्सर्जन में 778 मिलियन टन कार्बनडाइक्‍साइड के बराबर कमी आने की उम्मीद है।

किगाली संशोधन के अंतर्गत इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (आईसीएपी) उभरते कार्यों के क्रियान्‍वयन से एचएफसी धीरे-धीरे समाप्‍त होने पर अमल होने के दौरान जलवायु-अनुकूल विकल्पों को अपनाने और ऊर्जा के किफायती इस्‍तेमाल को बढ़ावा देने के प्रयासों में वृद्धि करेगा। यह भारत के प्रधानमंत्री की 2021 के जलवायु परिवर्तन सम्‍मेलन में ‘पंचामृत’ के माध्यम से 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन की प्रतिबद्धता को हासिल करने में भारत के जलवायु कार्यों में महत्‍वपूर्ण योगदान देगा।

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