Home » Latest » आखिर फणीश्वर नाथ रेणु की पत्नी ने क्यों कहा था “चाहूँगी कि मेरे घर में और कभी कोई लेखक पैदा न हो”
phanishwar nath renu

आखिर फणीश्वर नाथ रेणु की पत्नी ने क्यों कहा था “चाहूँगी कि मेरे घर में और कभी कोई लेखक पैदा न हो”

पूर्व राज्यसभा सदस्य सरला माहेश्वरी द्वारा राज्यसभा में दिया गया वक्तव्य महान कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु के जन्मदिवस 04 मार्च 2018 पर वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार अरुण माहेश्वरी ने अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर पोस्ट किया था। आज 04 मार्च 2021 से फणीश्वर नाथ रेणु का जन्म शताब्दी वर्ष प्रारंभ हो रहा है। इस अवसर पर पूर्व सांसद सरला माहेश्वरी का राज्यसभा में वक्तव्य व आलोचक देवेंद्र उपाध्याय का वीडियो हम प्रकाशित कर रहे हैं। अपने वीडियो वक्तव्य में देवेंद्र उपाध्याय phanishwar nath renu ka jivan parichay देते हुए फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ की जीवनी ( Phanishwar Nath ‘Renu’ Biography Hindi, Biography Of Phanishwar Nath Renu In Hindi) और फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ के कृतित्व पर प्रकाश डाल रहे हैं।

लेखक कल्याण कोष की स्थापना की जाय

सरला माहेश्वरी

‘मैला आंचल’ और ‘परती परिकथा’ के महान कथा शिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु की पत्नी ने दूरदर्शन के ‘परख’ कार्यक्रम को दिये गये एक साक्षात्कार में आंतरिक वेदना से कहा था कि “चाहूँगी कि मेरे घर में और कभी कोई लेखक पैदा न हो।”

हमारे समाज में लेखकों की यह स्थिति इस समाज के अन्यायपूर्ण ढांचे पर ही एक कड़ी टिप्पणी है। व्यवस्था का स्वरूप लेखकों के प्रति हमेशा ही निर्दयी उदासीनता का रहा है क्योंकि लेखक स्वभावत: व्यवस्था-विरोधी होता है। इसीलिए खूबसूरत शफीलों में बंदी हमारी व्यवस्था कभी भी लेखक की अंदरूनी जिंदगी की ओर झांकने की चेष्टा नहीं करती। और सिर्फ हमारे यहाँ ही नहीं, सभी जगह लेखकों के संदर्भ में हम व्यवस्था का यही रुख देखते हैं।

सुप्रसिद्ध उपन्यासकार ग्रेबियल मारक्वेज ने कुछ वर्षों पहले अपनी पुस्तक ‘हन्ड्रेड इयर्स ऑफ सालिच्यूड’ जिसकी प्रतियों की बिक्री ने रिकार्ड तोड़ दिया, कहा था कि यह पुस्तक बहुत अच्छी हुई होती अगर मेरे पास इसे लिखने का और वक्त होता लेकिन कर्ज के बढ़ते हुए बोझ तथा महाजन की तरह प्रकाशक के दबाव ने मुझे इसे किसी तरह खत्म करने को मजबूर कर दिया।

हमारे यहाँ स्थिति और भी विकट है। एक लेखक संघ से जुड़े होने के नाते, एक लेखक परिवार से जुड़े होने के नाते, लेखकों के जीवन की पीड़ा को मैंने बहुत निकट से भोगा है। और आज के इस माध्यमों के युग में जहाँ पूरी संस्कृति का माध्यमीकरण हो रहा है वहाँ सृजनात्मक लेखन के लिये तो स्थितियाँ और भी विकट होती जा रही हैं। पाठक और लेखक के बीच का रिश्ता टूटता जा रहा है। पुस्तकें छपती नहीं है, छपती हैं तो बिकती नहीं हैं, बिकती हैं तो लेखक को उसकी रायल्टी नहीं मिलती है। हमारे कानून भी लेखकों के साथ न्याय नहीं करते।

संपत्ति संबंधी अन्य तमाम कानूनों में संपत्ति की पूर्ण विरासत को स्वीकारा गया है। किसी भी संपत्ति के वारिस को संपत्ति पर पूर्ण अधिकार होता है। लेखन जो लेखकों की संपत्ति होती है उसे इस प्रकार की पूर्ण स्वीकृति हासिल नहीं है जो अन्य प्रकार के मामलों में दी गयी है।

कापीराइट कानून में लेखक की मृत्यु के पश्चात उसकी पुस्तकों की रायल्टी उसके क़ानूनन वारिस को सिर्फ 50 साल तक ही मिल सकती है। उसके बाद रायल्टी का कोई प्रावधान नहीं होता है। मैं नहीं चाहती कि इस कानून में रायल्टी की अवधि को बढ़ाने आदि के बारे में कोई संशोधन किया जाय क्योंकि लेखन पर जितना अधिकार लेखक का तथा उसके कानूनी वंशजों का है, आम पाठकों का उससे कम नहीं है।

लेकिन वास्तविकता यह है कि आमतौर पर तमाम व्यवसायिक प्रकाशन संस्थान उन्हीं पुस्तकों की बिक्री से बेइन्तिहा मुनाफा बटोरा करते हैं जिन पुस्तकों पर लेखकों की रायल्टी की अवधि समाप्त हो चुकी होती है। मेरा अनुरोध है कि सरकार कापीराइट कानून में इस प्रकार का परिवर्तन करे कि जिससे कापीराइट की मियाद खत्म हो चुकी पुस्तकों की बिक्री में सरकार खुद एक निश्चित प्रतिशत रायल्टी वसूल कर सके और इस प्रकार वसूल की गयी पूरी राशि को लेखक कल्याण कोष में जमा करा दिया जाय। इससे एक बहुत बड़ा कोष तैयार हो सकता है। इस कोष के जरिये लेखकों की पांडुलिपियों को प्रकाशित करने में अनुदान आदि से शुरू करके लेखक समाज को हर प्रकार की राहत प्रदान करने का काम किया जा सकता है। यह योजना हर पुस्तक पर लागू होनी चाहिए, वह भले ही धार्मिक पुस्तक, वैज्ञानिक विषयों से संबंधित पुस्तक या अन्य किसी प्रकार की पुस्तक ही क्यों न हो। इससे यह कोष एक विशाल कोष का रूप ले सकेगा तथा रायल्टी कानून से हम जो उम्मीद करते हैं कि वह लेखक के अपने जीवन-काल में, उसके लेखन-कार्य में सहयोगी बने, वह उम्मीद भी काफी हद तक पूरी हो सकती है। मानव संसाधन मंत्रालय को तत्काल इस आशय की पूरी योजना बना कर पेश करनी चाहिए।

( राज्य सभा में सरला माहेश्वरी)

आज फणीश्वर नाथ रेणु के जन्मदिन पर उन्हें नमन।

(अरुण माहेश्वरी की एफबी टाइमलाइन से साभार)

यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

Check Also

deshbandhu editorial

भाजपा के महिलाओं के लिए तुच्छ विचार

केंद्र में भाजपा सरकार के 8 साल पूरे होने पर संपादकीय टिप्पणी संदर्भ – Maharashtra …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.