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Search Results for: लोकसभा चुनाव

माधवराव के खिलाफ चुनाव लड़े बादल सरोज ने कुछ यूं याद किया, #कहाँ_माधवराव_और_कहाँ_टटपुँजिया_चिंदीचोर

Madhav Rao Scindia

#असली_सिंधिया_को_याद_करते_हुये ग्वालियरी होने के नाते पांच दशक के राजनीतिक जीवन में सबसे ज्यादा भिड़ंत किसी से हुयी है तो मिल (बिड़ला मिल्स) के बाद वह ग्वालियर का महल था; माधवराव सिंधिया इसके प्रमुख थे। उनके महल के बगीचे और रसोई, ड्राइवरी, चौकीदारी और रखरखाव, छतरियों के कर्मचारियों की यूनियन से किले और मोतीमहल के सिंधिया स्कूलों के कर्मचारियों की यूनियन …

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दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम, जीत के गुलदस्ते में कांटे 

Arvind Kejriwal

दिल्ली विधानसभा के चुनाव परिणामों (Delhi Assembly Election Results) ने देश भर में एक उत्साह का संचार किया है। ये चुनाव असाधारण परिस्थितियों में हुये थे जब तानाशाही प्रवृत्ति के साम्प्रदायिक दकियानूसी संगठन संचालित दल से देश के लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील लोग असंगठित रूप से मुकाबला कर रहे थे। केन्द्र में सत्तारूढ होने के कारण सुरक्षा बलों का नियंत्रण भी …

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दिल्ली चुनाव : भाजपा यह चुनाव जीते या न जीते, उसने साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को राष्ट्रीय जीवन के केंद्र में स्थापित कर दिया है

Amit Shah Narendtra Modi

दिल्ली चुनाव : साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की परतें दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान का दिन (Voting day for assembly elections in Delhi) (8 फ़रवरी 2020) आ गया है. भाजपा ने  अपने चुनाव अभियान में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण और कांग्रेस को कोसने की रणनीति बदस्तूर जारी रखी है. हालांकि पब्लिक डोमेन में और भाजपा-विरोधी बुद्धिजीवियों की ओर से साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की …

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म.प्र. में अस्थिर सरकारों का दौर : एक सामंत का चारणगान

Jaipur: Congress leader Congress leader Jyotiraditya Scindia addresses a press conference in Jaipur, on Dec 2, 2018. (Photo: Ravi Shankar Vyas/IANS)

Period of unstable governments in M.P. गत दिनों म.प. में एक अंतराल के बाद भाजपा सरकार के पुनरागमन के सौ दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में एक सभा आयोजित की गयी। यह सभा सौ दिन से प्रतीक्षित मंत्रिमण्डल विस्तार के दूसरे दिन ही आयोजित की गयी जिसमें ज्योतिरादित्य सिन्धिया ने प्रमुख वक्ता की तरह भाषण दिया। उल्लेखनीय है कि पूरे …

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अपनी दादी की तरह निर्भीक और स्पष्टवादी छवि बना चुकी हैं, यूपी की दीदी

Congress General Secretary, Mrs. Priyanka Gandhi,कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी की नैतिक चुनौती और उत्तर प्रदेश की राजनीति की नई परिभाषा Priyanka Gandhi’s moral challenge and new definition of Uttar Pradesh politics तात्कालिक स्थितियों में भी अपने विरोधियों को एक नैतिक चुनौती देते हुए इंदिरा की पोती हूं, यह उद्घोष करने में प्रियंका गांधी सक्षम हैं, तो यह प्रश्न अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है कि यदि उनकी दादी …

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क्या भारत सरकार का मतलब प्रा. लि. कम्पनी है ? 20 का तेल 80 में ! 70 साल में पहली बार पेट्रोल से महंगा डीजल

Check latest petrol Diesel price

Does Government of India mean Private Limited Company? Diesel costlier than petrol for the first time in 70 years क्या भारत सरकार का मतलब (Government of India means) प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी है ? जिसका मुख्य लक्ष्य केवल अधिक से अधिक मुनाफा कमाना भर है ? प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि वैश्विक कोरोना त्रासदी (Global corona tragedy) के बीच भी जिस तरह …

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मोदी को नीचा दिखाने के लिये विष्णुदेव साय ने साधा राहुल गांधी पर निशाना : मोदी की 9 चीन यात्राओं और शी जिनपिंग से 18 मुलाकातों पर कांग्रेस के सवाल

Modi Xi Jhoola

जिस व्यक्ति को मोदी ने टिकट देने के लायक नहीं समझा वह राहुल गांधी पर आरोप लगाने के पहले अपनी हैसियत तो नाप ले रायपुर/18 जून 2020। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु देव साय के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि मोदी जी 9 बार चीन गये। …

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पिछले 6 वर्षों में सरकार कितनी खरी उतरी है? एक लेखा-जोखा ऐतिहासिक तथ्यों के साथ

PM Modi Speech On Coronavirus

नगीना खान का बेहद प्रासंगिक लेख | Nagina Khan’s very relevant article महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पिछली सरकारों की असफलताओं का रिपोर्ट कार्ड (Report card of failures of previous governments) दिखाकर वर्तमान सरकार जिन मुद्दों को आधार बनाकर, जिस प्रकार जनता के पूर्ण बहुमत से (2014) सत्ता में आई और 2019 में एक बार फिर भाजपा पर जनता ने …

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चरित्र हनन, समाज में वैमनस्य व कटुता उत्पन्न करना ट्रोल आर्मी का प्रारंभिक “युगधर्म” है

Lalit Surjan ललित सुरजन देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं. वे 1961 से एक पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे एक जाने माने कवि व लेखक हैं. ललित सुरजन स्वयं को एक सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं तथा साहित्य, शिक्षा, पर्यावरण, सांप्रदायिक सद्भाव व विश्व शांति से सम्बंधित विविध कार्यों में उनकी गहरी संलग्नता है. यह आलेख देशबन्धु से साभार लिया गया

देशबन्धु : चौथा खंभा बनने से इनकार अखबार अथवा प्रेस और सत्तातंत्र के जटिल संबंधों (Complex relations of press and power) को समझने की मेरी शुरुआत 1961 में हुई, जब मैं हायर सेकंडरी की परीक्षा देकर ग्वालियर से लौटा और जबलपुर में कॉलेज के प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने के साथ-साथ बाबूजी के संचालन-संपादन में प्रकाशित नई दुनिया, जबलपुर (बाद …

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जब डॉ. लोहिया को “बनिया” कहकर अपनी कुर्सी खोई थी चौधरी साहब ने और मुलायम सिंह ने निकाला था उनके खिलाफ जुलूस

Dr. Ram Manohar Lohia Chaudhary Charan Singh

आजकल के नवसमाजवादी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) को समाजवाद का अग्रदूत बताते नहीं थकते हैं, लेकिन तथ्य यह है कि चौधरी साहब किसी भी दृष्टि से समाजवादी नहीं थे, हां इतना जरूर है कि डॉ. लोहिया के गैर कांग्रेसवाद (Non-Congressism of Dr. Lohia) के प्रथम लाभार्थी जरूर थे और यदि यह कहा जाए कि समाजवादी आंदोलन …

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