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कड़कड़ाती ठंड में शरीर में पानी की मात्रा कम ना होने दें, लंबी खांसी को ना करें नजरअंदाज

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी गाजियाबाद में बेतहाशा ठंड के मद्देनजर लगाया गया एक निशुल्क विशाल फेफड़ा रोग जांच शिविर

उम्रदराज लोग फ्लू की वैक्सीन (Flu vaccine) इस खतरनाक ठंड में अपने डॉक्टर से पूछ कर जरूर लगवाएं : डॉक्टर अंकित सिन्हा

गाजियाबाद, 29 दिसंबर 2019. फेफड़ा रोग एवं प्रदूषण की वजह से बढ़ रही एलर्जी एवं दमा रोग के मरीजों के लिए एक विशाल निशुल्क चिकित्सा एवं जांच शिविर का आयोजन आज यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी गाजियाबाद में किया गया। शिविर का उद्घाटन अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ पीएन अरोड़ा ने किया।

रिसीवर में वरिष्ठ फेफड़ा रोग विशेषज्ञ (Senior pulmonologist) डॉक्टर के के पांडे (Doctor KK Pandey), डॉक्टर अर्जुन खन्ना (Dr. Arjun Khanna) एवं डॉक्टर अंकित सिन्हा (Dr. Ankit Sinha) ने कैंप में आए मरीजों को निशुल्क परामर्श दिया।

साथ ही कैंप में आए मरीजों का कंप्यूटर द्वारा फेफड़े की जांच (Lung check by computer) पलमोनरी फंक्शन टेस्ट (Pulmonary function test) भी निशुल्क किया गया।

इस कैंप के माध्यम से खांसी, सर्दी एवं फेफड़ों की अन्य समस्याओं हेतु लोगों द्वारा किसी से भी पूछ कर खांसी की कोई भी सिरप या over-the-counter मिलने वाली सर्दी की कोई भी दवाई खा लेने से फेफड़ों में होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में जागरूकता भी पैदा की गई एवं डॉक्टरों ने मरीजों को उचित मार्गदर्शन परामर्श एवं जांच जैसे कि खून की कंप्लीट ब्लड काउंट जांच (Complete blood count check of blood), छाती का एक्सरे (chest X-ray) बलगम की जांच (Mucus test) आदि कराने की सलाह दी

इस कैंप में 150 से भी ज्यादा मरीजों ने भाग लिया।

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वरिष्ठ फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के के पांडे ने जानकारी देते हुए बताया की ठंड की वजह से सांस की नली सिकुड़ने की समस्या (Windpipe problem due to cold) ज्यादातर देखी जाती है ऐसे में अपने शरीर को ढंक कर रखें गले एवं कानों को मफलर से ढंक के रखें। ऐसे मरीज जिनको दमा या फेफड़ों की प्रॉब्लम हो वह सुबह की सैर एवं ज्यादा बाहर घूमना अवॉइड करें।

डॉक्टर के के पांडे ने यह भी कहा कि यदि आपको लंबे समय से खांसी बनी हुई है तो इसे नजरअंदाज ना करें। यह फेफड़े की गंभीर बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।

डॉक्टर पांडे ने कहा कि कैंप में आए हुए मरीजों में कुछ को अपने फेफड़ों की वस्तुस्थिति के बारे में जानकारी नहीं थी, किंतु जब उनका पलमोनरी फंक्शन टेस्ट किया गया तो उनके फेफड़े मात्र 40% काम करते हुए पाए गए, एक मरीज में तो फेफड़े का कैंसर भी पाया गया।

डॉ अर्जुन खन्ना ने कहा कि गर्म पानी, चाय, सूप, ग्रीन टी, कॉफी इनका लगातार सेवन करते रहें।

अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ सुनील डागर ने बताया कि कैंप में आए कुछ मरीजों को खर्राटे की भी प्रॉब्लम थी, जिसके लिए स्लीप स्टडी की सलाह दी गई। उन्होंने यह भी बताया कि फेफड़ों के उन्नत इलाज के लिए अस्पताल में ईबस, एंडोस्कोपिक ब्रोंकियोल अल्ट्रासाउंड, थोरेकोस्कॉपी, ब्रोंकोस्कॉपी एवं एलर्जी के मरीजों के लिए स्किन प्रिक टेस्ट की सुविधा (Skin prick test facility for EBUS, endoscopic bronchiol ultrasound, thoracoscopy, bronchoscopy and allergy patients) विशेष रूप से उपलब्ध है।

कैंप का संचालन गौरव पांडेय, प्रतीम गून, संजीव, हिमांशु, प्रीति ने किया।

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