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गोकशी के शक में पुलिस उत्पीड़न से अब्दुल बशीर की मौत : एनएचआरसी ने दर्ज किया मुकदमा

उत्तर प्रदेश के बदायूँ में गोकशी के शक में पुलिस उत्पीड़न से अब्दुल बशीर की मौत के मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दर्ज किया मुकदमा

  • लोकमोर्चा संयोजक अजीत सिंह यादव की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने दर्ज किया है मुकदमा , जल्द सुनवाई की उम्मीद

  • गोकशी रोकने के बहाने योगी राज में हो रहा बेगुनाहों पर दमन – अजीत यादव

बदायूँ, 27 जून ,उत्तर प्रदेश के बदायूँ जनपद के भन्द्रा गांव में राजमिस्त्री अब्दुल बशीर की गोकशी के शक में उसहैत पुलिस की अवैध हिरासत में उत्पीड़न से मौत के मामले पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (National Human Rights Commission) ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

लोकमोर्चा संयोजक अजीत सिंह यादव ने अब्दुल बशीर की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में 14 मई को शिकायत दर्ज कराई थी । आयोग से प्राप्त ईमेल की आज जानकारी देते हुए अजीत सिंह यादव ने बताया कि एनएचआरसी ने शिकायत के आधार पर 15/05/2020 को मुकदमा दर्ज कर लिया है जिसका नंबर 8466/20/7/2020-AD है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग जल्द ही मामले की सुनवाई करेगा और अब्दुल बशीर की मौत के दोषियों को सजा मिलेगी।

लोकमोर्चा संयोजक ने कहा कि संघ -भाजपा की योगी सरकार में पूरे सूबे में गोकशी को रोकने के नाम पर बेगुनाहों का बड़े पैमाने पर उत्पीड़न किया जा रहा है। पुलिस को अवैध धनउगाही का नया सेक्टर मिल गया है। निर्दोषों का अवैध पुलिस हिरासत में उत्पीड़न व फर्जी मुकदमे लगाकर जेल भेजना आम बात हो गई है ।

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उन्होंने बताया कि शिकायत में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के बदायूँ जनपद के भन्द्रा गांव में 9 मई की रात को उसहैत थाना पुलिस ने गोकशों की तलाश में छापा मारा और गांव के सात घरों में तोड़फोड़ की व अवैध वसूली की। उसके बाद पुलिस ने गांव के ही राजमिस्त्री अब्दुल बशीर के घर दबिश दी और उसके बेटे अतीक उर्फ नन्हें के बारे में पूछा। उसके रिश्तेदारी में जाने की बात कहने पर पुलिस ने घर की महिलाओं के साथ बदसलूकी की और पचास हजार रुपयों की मांग की। विरोध करने पर घर के मुखिया 65 वर्षीय अब्दुल बशीर को पीटते हुए घर से खींचकर गैरकानूनी हिरासत में लेकर गांव के बाहर ले गई। पिटाई से अब्दुल बशीर की मौत हो जाने पर पुलिस मृतक को छोड़कर भाग गई। विरोध में गांव वालों ने मृतक अब्दुल बशीर की लाश को लेकर सड़क पर जाम लगा दिया। तब प्रशासनिक अधिकारियों ने न्याय दिलाने का आश्वासन देकर शव का पोस्टमार्टम करा दिया और डॉक्टरों पर दबाब डालकर फेफड़ों की बामारी से मौत की रिपोर्ट बनवा दी गई। मृतक अब्दुल बशीर के परिजनों की शिकायत पर एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई।

श्री यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और बदायूँ जनपद में गोकशी के शक के बहाने अक्सर पुलिस बेगुनाहों का उत्पीड़न और दमन के साथ ही धनउगाही करती रहती है। कई को फर्जी मुकदमें लगाकर जेल भेज देती है। इनमें ज्यादातर मुसलमान और दलित पिछड़े समाज के गरीब – गुरबे होते हैं।भन्द्रा गांव की यह घटना योगी राज में पुलिस द्वारा बेगुनाह मुसलमानों ,गरीबों पर जुल्म का एक नया उदाहरण है।

शिकायत में आगे कहा गया है कि कानून का राज स्थापित करने व नागरिकों में व्याप्त भय और आतंक के माहौल को दूर करने के लिए इस मामले की निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज कर दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही आवश्यक है।

उन्होंने आयोग के चेयरपर्सन से मांग की है कि भन्द्रा गांव में गैर कानूनी पुलिस हिरासत में बेगुनाह अब्दुल बशीर की उसहैत पुलिस द्वारा की गई पिटाई से हुई मौत के मामले का संज्ञान लेकर दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्यवाही की जाए व निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए । दोषी पुलिस कर्मियों को बचाने और डॉक्टरों पर दबाब डाल कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेर फेर कराने के दोषी एसएसपी समेत उच्च स्तरीय पुलिस अधिकारियों को दंडित किया जाए एवं पीड़ित परिवार को 01 करोड़ रुपया मुआवजा दिलाया जाए।

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