क्या राहुल को छोड़ केजरीवाल संग हो लेंगे कांग्रेस के धर्माचार्य ?

क्या राहुल को छोड़ केजरीवाल संग हो लेंगे कांग्रेस के धर्माचार्य ?

नई दिल्ली, 12 फरवरी 2020. भाजपा को नेस्तनाबूद करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कांग्रेस की आत्महत्या करने की पॉलिसी अब उसके लिए संकट बन सकती है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Elections) से पहले तो कांग्रेस जोर-शोर से विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए तैयार हो रही थी और लोकसभा चुनाव के परिणामों को देखते हुए समझा जाता था कि विधानसभा चुनाव में लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच होगी, लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा कांग्रेस चुनावी लड़ाई से बाहर होकर तमाशबीन होकर रह गई। कांग्रेस के कई नेताओं ने परोक्ष रूप से टीवी बहसों में कहा भी कि उनका लक्ष्य भाजपा को हराना था। और पूरे चुनाव में यह दिखा भी।

अब चुनाव बाद जब दिल्ली में आप ने भाजपा की कमर तोड़ दी है तो कांग्रेस की पांतों में भी केजरीवाल के प्रति अति प्रेम देखा जा रहा है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी  (Congress General Secretary Priyanka Gandhi) के आध्यात्मिक गुरु समझे जाने वाले और कांग्रेस के स्टार प्रचारक आचार्य प्रमोद कृष्णम् (Acharya Pramod Krishnam) ने जिन शब्दों में केजरीवाल को बधाई दी है, उससे कयास लगाया जा सकता है कि आचार्य जी का कांग्रेस और राहुल गांधी से मन भर गया है और अगर ऐसा नहीं है तो इसे राहुल बना प्रियंका की लड़ाई के रूप में भी देखा जा सकता है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने ट्वीट किया,

“ना “गाली”

ना “गोली”

ना डंडे वाली बोली,और दिल्ली केजरीवाल की हो ली..बधाई हो छोटे लाल बहादुर

@ArvindKejriwal

को.”

समझने वाले समझ रहे हैं कि आचार्यजी ने “डंडे वाली बोली” वाक्यांश अपने नेता राहुल गांधी के लिए ही प्रयोग किया है।

 

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