चीतों के आने के बाद उम्मीद है अब कुपोषण और मौतें रुकेंगी

चीतों के आने के बाद उम्मीद है अब कुपोषण और मौतें रुकेंगी

भोपाल, 22 सितंबर 2022. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश के चम्बल अंचल में अपना जन्मदिन मनाया। खेद की बात है कि इसे मीडिया ने उनके जन्म दिवस की बजाय नामीबिया के चीतों का कूनो-पदार्पण दिवस बना दिया। सारी पब्लिसिटी विदेशी चीतों के खाते में चली गयी।

मध्यप्रदेश किसान सभा (एआईकेएस से संबद्ध) के अध्यक्ष रामनारायण कुररिया व महासचिव बादल सरोज ने आज यहां जारी एक बयान में यह बात कही।

दोनों किसा नेताओं ने कहा कि अपने जीवन के इस शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री जहां गए थे वहां नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 4 की रिपोर्ट के अनुसार 6 महीने से 5 वर्ष तक की उम्र के 77.5 प्रतिशत सहरिया बच्चे कुपोषित और एनिमिक हैं। 15 से 49 वर्ष की 56 प्रतिशत गर्भवती महिलायें एनिमिक – खून की कमी की शिकार – हैं।

प्रदेश सरकार के हैल्थ बुलेटिन के अनुसार श्योपुर, शिवपुरी, मुरैना में पिछली 10 वर्षों में 13 हजार बच्चों की मौत कुपोषण से हुयी है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा श्योपुर, मुरैना के बाकी समुदायों के बच्चों का भी 52 प्रतिशत स्टंटेड ग्रोथ, बढ़वार रुक जाने और 56 प्रतिशत कम वजन वाला है। ये दोनों अति-कुपोषण के लक्षण हैं। हालात इतने गंभीर और उनके प्रति सरकारों का ढीठपन और उपेक्षा इस कदर है कि श्योपुर जिले के तीन ब्लॉक्स में 5 माह में 116 कुपोषण मौतों पर 5 वर्ष पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जो नोटिस भेजा था, शिवराज सिंह की सरकार ने उसका जवाब तक देने की जहमत नहीं उठाई।

मध्यप्रदेश किसान सभा ने आशा व्यक्त की है कि समारोह जनता के पैसे से सैकड़ों करोड़ रूपये फूंककर किया गया तमाशा या सैरसपाटा बन कर नहीं रह जाएगा। प्रधानमंत्री ने जरूर इन कुपोषितों से मुलाक़ात का समय निकाला होगा और जल्द ही वे इस इलाके इस नारकीय जीवनदशा को बदलने के लिए कुछ कदम उठाएंगे और प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार से बचाकर इन कदमो को लागू करवायेंगे।

After the arrival of cheetahs, it is expected that now malnutrition and deaths will stop

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