मजदूर किसान मंच ने मोदी सरकार को समझाया, किसानों पर दमन के दुस्साहस का न सोचे

मजदूर किसान मंच ने मोदी सरकार को समझाया, किसानों पर दमन के दुस्साहस का न सोचे

AIPF cadres fasted

एआईपीएफ और मंच के कार्यकर्ताओं ने रखा उपवास

राजहठ त्याग किसानों की मांगें माने सरकार

लखनऊ, 23 दिसम्बर 2020: किसान विरोधी कानूनों की वापसी, एमएसपी पर कानून बनाने, विद्युत संशोधन विधेयक रद्द करने की मांगों पर जारी किसानों के आंदोलन के द्वारा राष्ट्रव्यापी उपवास की अपील पर आज आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट और मजदूर किसान मंच के कार्यकर्ताओं ने अन्न त्याग किया।

यह जानकारी एआईपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी व मजदूर किसान मंच के महासचिव डा. बृज बिहारी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में दी। आज के कार्यक्रमों में लिए संकल्प प्रस्ताव में कहा गया कि अम्बानी-अडानी की सेवा में लगी मोदी सरकार और आरएसएस देश हित में उठाई जा रही किसानों की मांगों को स्वीकार करने की जगह जनता को गुमराह कर रहे हैं। सच तो ये है कि प्रधानमंत्री मोदी और उनके मंत्री व नेता यदि न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के प्रति ईमानदार हैं तो वे क्यों नहीं इसके लिए कानून बनाने की पहल करते, जो किसानों की प्रमुख मांग है। ये भी सच है कि सरकार खुद किसानों से वार्ता न करने का राजहठ ठानी हुई है और किसानों पर वार्ता न करने का आरोप लगा रही है। दरअसल सरकार की मंशा किसान आंदोलन के दमन की है। लेकिन उसे यह याद रखना होगा कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक ढंग से चल रहा किसान आंदोलन अब देश का जनांदोलन बन गया है और इसके दमन के किसी भी दुस्साहसिक कदम से उसको भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

    प्रस्ताव में कहा गया कि खेती किसानी को बर्बाद करने के लिए सरकार द्वारा लिए कारपोरेटीकरण के कांट्रेक्ट फार्मिंग के रास्ते की जगह सहकारी रास्ते से ही कृषि प्रधान भारत को आर्थिक मजबूती की तरफ ले जाया जा सकता है। आज जरूरत देश की अस्सी प्रतिशत छोटी मझोली खेती के सहकारीकरण की है, जिसमें दो तीन गांव का कलस्टर बनाकर ब्याज मुक्त कर्ज, सस्ती लागत सामग्री, गांव स्तर पर फसल की एमएसपी पर खरीद, उसके संरक्षण और वितरण की व्यवस्था करने और कृषि आधारित उद्योग लगाने की है। इसे करने की जगह आरएसएस और भाजपा के लोग अम्बानी-अडानी जैसे कारपोरेट घरानों के हितों के लिए राजहठ कर रहे हैं। उन्हें हठधर्मिता को त्यागकर कानूनों को रद्द करना चाहिए और एमएसपी पर कानून बनाना चाहिए।

आज हुए कार्यक्रमों का नेतृत्व बिहार के सीवान में पूर्व विधायक व एआईपीएफ प्रवक्ता रमेश सिंह कुशवाहा, पटना में एडवोकेट अशोक कुमार, लखीमपुर खीरी में एआईपीएफ के प्रदेश अध्यक्ष डा. बी. आर. गौतम, सीतापुर में मजदूर किसान मंच नेता सुनीला रावत, युवा मंच के नागेश गौतम, अभिलाष गौतम, लखनऊ में वर्कर्स फ्रंट अध्यक्ष दिनकर कपूर, उपाध्यक्ष उमाकांत श्रीवास्तव, एडवोकेट कमलेश सिंह, वाराणसी में प्रदेश उपाध्यक्ष योगीराज पटेल, सोनभद्र में प्रदेश उपाध्यक्ष कांता कोल, कृपाशंकर पनिका, राजेन्द्र प्रसाद गोंड़, सूरज कोल, श्रीकांत सिंह, रामदास गोंड़, रामनाथ गोंड़, आगरा में वर्कर्स फ्रंट उपाध्यक्ष ई. दुर्गा प्रसाद, चंदौली में अजय राय, आलोक राजभर, डा. राम कुमार राजभर, गंगा चेरो, रामेश्वर प्रसाद, रहमुद्दीन, इलाहाबाद में युवा मंच संयोजक राजेश सचान, अनिल सिंह, मऊ में बुनकर वाहनी के इकबाल अहमद अंसारी, बलिया में मास्टर कन्हैया प्रसाद, बस्ती में एडवोकेट राजनारायण मिश्र, श्याम मनोहर जायसवाल ने किया।

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