रायपुर और कोरबा में वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय मानक स्तर से 28 गुना तक खराब : अध्ययन

रायपुर और कोरबा में वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय मानक स्तर से 28 गुना तक खराब : अध्ययन

Air quality in Raipur and Korba up to 28 times worse than national standard: Study

रायपुर/कोरबा 25 जनवरी 2022: राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र (SHRC), छत्तीसगढ़ द्वारा “राज्य जलवायु परिवर्तन, मानव स्वास्थ्य एवं स्वस्थ ऊर्जा” पहल के राष्ट्रीय कार्यक्रम के सहयोग से किए गए एक अध्ययन के अनुसार नवंबर 2020 और जून 2021 के बीच रायपुर और कोरबा में वायु गुणवत्ता (Air quality in Raipur and Korba,) मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई है, जिसमें कोरबा के कई क्षेत्र प्रभावित पाए गए हैं, इन क्षेत्रों में पीएम 2.5 के स्तर पर पाया गया है जो कि राष्ट्रीय मानक स्तर (60 ug/m3 ) के अनुसार  लगभग अट्ठाईस गुना और रायपुर में लगभग ग्यारह गुना ज्यादा थी।

इस अध्ययन की समीक्षा डॉ. कमलेश जैन (प्रोफेसर, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, पं. ज.ने. स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत) द्वारा की गयी हैI

एक सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा है वायु प्रदूषण (Air pollution is a public health issue)

अध्ययन के मुताबिक वायु की गुणवत्ता में सुधार और स्वास्थ्य में इसके प्रभाव को कम करने की जरुरत है और इस चुनौती से निपटने के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित तरीके से काम करने की आवश्यकता है। रायपुर और कोरबा से प्राप्त हवा के नमूने के निष्कर्ष स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से चिंताजनक हैं। इसके लिए न केवल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (pollution control board) से मजबूत हस्तक्षेप की आवश्यकता है परन्तु इसके लिए लोगों की सुरक्षा और वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के हस्तक्षेप की भी आवश्यकता है।

एक विज्ञप्ति के मुताबिक डॉ. नीरज कुमार बंसोड़, आईएएस, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, छत्तीसगढ़ (Dr. Neeraj Kumar Bansod, IAS, Directorate of Health Services, Chhattisgarh) का कहना है कि-

“हम वायु प्रदूषण से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का निदान करने के लिए उपयुक्त उपकरण एवं प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की सेवाओं के द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।“

जबकि राज्य नोडल अधिकारी-स्वास्थ्य (Climate Change and Human Health, Directorate of Health Services, Government of Chhattisgarh, INDIA) का कहना है कि-

“हवा के नमूनों के परिणाम चिंताजनक हैं, इसमें पाए गये हानिकारक पदार्थों का स्तर बहुत ज्यादा हैं जो कि स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। कई अध्ययनों से पता चला है कि PM का स्तर अगर 2.5 या उससे ज्यादा है तो उसका सीधा असर फेफड़े (Lungs) और हृदय (Heart) पर पड़ता है। इसके अलावा,मैंगनीज, सीसा और निकल वातावरण में मानकों से अधिक पाए जाने पर हानिकारक असर डालते हैं और मानव स्वास्थ्य पर उनके प्रभावों का पूर्व में अन्य शोधो में उल्लेख  है। मैंगनीज और सीसा न्यूरोटॉक्सिन हैं जबकि निकल एक कार्सिनोजेन है। मानव घरों और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की छतों से जहरीले पदार्थों के ऐसे उच्च स्तर की खोज चिंता का एक वास्तविक कारण है”।

डॉ समीर गर्ग कार्यकारी निदेशक एसएचआरसी (Dr. Samir Garg Executive Director SHRC.) का कहना है कि

“लोगों ने इस अध्ययन में बढ़ चढ़ कर भाग लिया है जो इस मुद्दे के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। हवा में ऐसे विषाक्त पदार्थों की उपस्थिति को कम करने के लिए न केवल तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है, परन्तु यह आकलन करने की भी आवशयकता है की पहले से ही कितना नुकसान हो चुका है, इसके साथ एक व्यापक स्वास्थ्य सर्वेक्षण कराया जाये जिससे शुरू से अब तक के दीर्घकालिक नुकसान का पता लगाया जा सके।

कोरबा और रायपुर में साल भर की समस्या है वायु प्रदूषण

अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता पुनीता कुमार (Punita Kumar) कहती हैं कि

‘’रायपुर और कोरबा से वायु के नमूनों के परिणाम बताते हैं कि इस क्षेत्र में पिछले दो वर्षों की अवधि में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई है। ये नमूने नवंबर 2020 और मई 2021 के बीच, COVID-19 की पहली और दूसरी लहर के दौरान लिए गए थे और जब देश में कुल या आंशिक लॉकडाउन था और कई शहर नीले आसमान और बर्फ से ढंके पहाड़ों को देख रहे थे, कोरबा और रायपुर के निवासी कोयला संयंत्र केंद्रों के आसपास ख़राब हवा के बीच जीवित रहने एवं अपनी दिनचर्या जारी रखने के लिए मजबूर थेI  इन शहरों में रहने वाले निवासियों की गवाही से इसकी पुष्टि होती है। अन्य स्थानों के विपरीत कोरबा और रायपुर में वायु प्रदूषण साल भर की समस्या है।“

जाँचपरिणाम

– नवंबर 2020 से मई 2021 तक रायपुर से हवा के 12 सैंपल लिए गएI

– मार्च 2021 से जून 2021 के बीच कोरबा से 14 हवा के नमूने लिए गए।

कुछ प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं :

प्रदूषक जाँचपरिणाम प्रदूषक का स्वास्थ्य प्रभाव
PM2.5 रायपुर के सभी नमूनों में PM2.5 का स्तर 131.4 से 653.8μg/m3 के बीच था और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) (60μg/m3) द्वारा निर्धारित मानकों से 2.18 और 10.88 गुना अधिक था। PM2.5 आसानी से स्वास नाली में चला जाता है; फेफड़ों की एल्वियोली में प्रवेश कर संचार प्रणालियों में प्रवेश करता हैं और मनुष्यों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालता है। पिछले अध्ययनों ने साबित किया है कि PM2.5 के कारण लोगों में सांस की बीमारी, हृदय रोग, स्ट्रोक और मानसिक प्रभाव पड़ता हैं। अनुसंधान ने यह भी साबित किया है कि पीएम 2.5 (placental barrier) को पार करता है और इसके परिणामस्वरूप नवजात शिशुओं में जन्म दोष उत्पन्न कर सकता है।
कोरबा से लिए गये सभी नमूनों में PM 2.5 का स्तर MoEFCC की निर्धारित सीमा से 2.5 से 28.3 गुना अधिक था। वायु के सभी नमूनों में pm २,५ का स्तर अधिक पाया गया जो की वह के लोगो के स्वास्थ्य में दुष्प्रभाव डाल सकता है।
सिलिका रायपुर और कोरबा के सभी नमूनों में क्रिस्टलीय सिलिका का स्तर ऊंचा देखा गया। कोयला राख और निर्माण कार्य में उपयोग होने वाले रेत दोनों में क्रिस्टलीय सिलिका के उच्च स्तर होते हैं। सिलिका के संपर्क से सिलिकोसिस नामक फेफड़ों की बीमारी होती है। आम तौर पर श्रमिक और स्थानीय आबादी जो लंबे समय तक सिलिका के संपर्क में रहते हैं, उन्हें श्वसन संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। सूक्ष्म सिलिका कण आसानी से फेफड़ों में प्रवेश कर सकता है, और फेफड़ों को ख़राब करता है। जिसे सिलिकोसिस कहा जाता है। सिलिका के संपर्क में आने से फेफड़ों का कैंसर, गुर्दे की बीमारियां और मांसपेशियों से सम्बंधित समस्याएं भी हो सकती हैं।
निकल रायपुर के साथ-साथ कोरबा के सभी नमूनों में निकल का स्तर WHO के वार्षिक स्वास्थ्य-आधारित दिशानिर्देश मानक 0.0025μg/m3 से अधिक है, निकल के दीर्घकालिक असर से कैंसर की सम्भावना होती है। वायु में निकल के संपर्क में आने से शरीर में श्वसन और प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) प्रभावित होती है। निकल के लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा होता है।
सीसा रायपुर से 12 नमूनों में से छह नमूने सीसा के उच्च स्तर (Pb) को दिखाते हैं, जिसे यूएस EPA मानक 0.15μg/m3 के साथ तुलना की जाती है, जो औसतन तीन महीने के लिए होता है। सीसा एक ज्ञात न्यूरोटॉक्सिन है। बच्चे इस भारी धातु के प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। शिशुओं में सीसे के निम्न स्तर के एक्सपोजर को IQ, सीखने, स्मृति और व्यवहार पर प्रभाव से जोड़ा गया है। जब कोई व्यक्ति थोड़े समय के लिए सीसा के उच्च स्तर के संपर्क में आता है, तो परिणाम स्वरुप (lead poisoning) होता है, जिससे पेट में दर्द, कब्ज, थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, स्मृति हानि, दर्द या झुनझुनी, हाथ और/या पैर या कमजोरी हो सकती है।। चूंकि ये लक्षण अपेक्षाकृत सामान्य हैं और अन्य स्थितियों के कारण भी हो सकते हैं, (lead poisoning) को आसानी से अनदेखा किया जा सकता है।
मैंगनीज रायपुर में सभी बारह नमूनों में मैंगनीज़ का स्तर (0.05μg/m3) यू.एस. ईपीए संदर्भ सांद्रता से अधिक है। कोरबा में, 14 में से 11 स्थानों के नमूनों में मैंगनीज डब्ल्यूएचओ के वार्षिक स्वास्थ्य-आधारित दिशानिर्देश मानक 0.15μg/m3 से अधिक था। मैंगनीज का उपयोग आमतौर पर लौह फाउंड्री में पिघलने वाले एजेंट के रूप में किया जाता है। छोटे कण होने के कारण मैंगनीज लंबे समय तक हवा में रहता है। एक क्षेत्र में मैंगनीज का स्तर सबसे अधिक है जो बिजली संयंत्र से लगभग 4 किमी की दुरी पर है। लंबे समय तक उच्च-स्तरीय मैंगनीज के संपर्क में आने से न्यूरोलॉजिकल क्षति हो सकती है जिसे मैंगनिज्म के रूप में जाना जाता है (मैंगनिज्म पार्किंसंस रोग से एक अलग बीमारी है), इसके उन्नत चरण में चेहरा मुखौटा जैसा हो जाता है, चाल में बदलाव, झटके और अन्य मनोवैज्ञानिक तकलीफे हो सकती हैं।

अध्ययन की प्रमुख सिफारिशें :

स्वास्थ्य

  1. कोरबा और रायपुर क्षेत्र के निवासियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए, “Pollution Clearance” के सिद्धांतों के तहत, स्वास्थ्य विभाग के द्वारा निवासियों के लिए विशेष ध्यान दिया जाए और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाये।

2.   जिला अस्पतालों में तकनीकी विशेषज्ञ, रेस्पिरेटरी फिजिशियन विशेषज्ञ और दवाइयों के लिए पर्याप्त प्रावधान होना चाहिए। consumable items, प्रशिक्षित कर्मचारी और बुनियादी ढांचे तथा स्पाइरोमीटर जैसी सुविधाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा केन्द्रों में होनी चाहिएं।

3.   राज्य एपिडेमीओलॉजिकल सेल में “आपदा महामारी विज्ञान की योजनाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए, जो Policy makers के लिए महामारी / आपदा के समय स्वास्थ्य सम्बन्धी सटीक जानकारी प्रदान करता है, भविष्य की तैयारी के लिए भी जानकारी एकत्रित करके आपदाओं के रोकथाम के लिए रणनीतियों में सुधार किया जा सकता है।

4.   राज्य के एजेंसियो​​​​ को कोरबा और रायपुर के निवासियों के बीच वायु गुणवत्ता और इससे जुड़े स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव से सम्बंधित शोध कार्य शुरू करके दीर्घकालिक स्वास्थ्य निगरानी प्रदान कि जानी चाहिए।

5.   स्वास्थ्य विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अकादमिक और अनुसंधान संस्थानों और नगर पालिका जैसे बहु हितधारकों के साथ वायु गुणवत्ता परीक्षण के लिए समिति की स्थापना की जानी चाहिए।

पर्यावरण

1.   राज्य और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को हवा में पाए गए भारी धातुओं की निरंतर निगरानी शुरू करनी चाहिए और समय-समय पर इसके परिणाम प्रकाशित करना चाहिए। स्वास्थ्य एजेंसियों के माध्यम से सलाह प्राप्त करके स्वास्थ्य परामर्श भी नियमित रूप से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

2.   राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों (National Ambience Air Quality Standard) के मानकों को नहीं मानने वाले इकाइयों और गतिविधियों पर प्रदूषण टैक्स लगाया जाना चाहिए।

3.   राज्य एजेंसियों को प्रदूषकों का पता लगाने के लिए प्रदूषण डेटा का उपयोग करना चाहिए और आवासीय क्षेत्रों में धूल और भारी धातुओं के वायु में स्तर को सीमा से नीचे लाने के लिए सुधारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

4.   कोरबा और रायपुर में कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों, कोयला खदानों और कोयला परिवहन से होने वाले उत्सर्जन की सख्त निगरानी की जानी चाहिए।

5.   रायपुर शहर के आवासीय क्षेत्रों से लोहा और इस्पात निर्माण इकाइयों को स्थानांतरित करने के लिए तत्काल योजना तैयार की जानी चाहिए, यदि यह संभव नहीं है, तो इन इकाइयों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों को लागू करने के लिए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।

6.   औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार पर निर्णय की तुरंत समीक्षा की जानी चाहिए और मौजूदा COVID-19 स्थिति में पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

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