राजनाथ सिंह के गांव में तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने का ऐलान : आइपीएफ नेता अजय राय नजरबंद

राजनाथ सिंह के गांव में तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने का ऐलान : आइपीएफ नेता अजय राय नजरबंद

चकिया (उत्तर प्रदेश), 5 जून 2021. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के गांव में प्रतीकात्मक रूप से आज तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाए जाने के ऐलान पर आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राज्य कार्य समिति के सदस्य अजय राय को नजरबंद कर दिया गया।

यह जानकारी देते हुए अजय राय ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 5 जून ‘सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन‘ के दिवस पर तीनों काले कृषि कानूनों की प्रतियां गाँव गाँव में जलाने का निर्णय हुआ था! लेकिन आज सुबह ही घर पर  ही पुलिस ने हमें नजरबंद कर दिया और कहा कि आपको घर पर रहना हैं। घर के अंदर पुलिस का पहरा लगा दिया गया है।

पुलिस द्वारा नजरबंद किए जाने पर उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के नियम को पालन करते हुए आज हम किसान विरोधी तीनो कानून का विरोध करते लेकिन भाजपा सरकार किसानों के आंदोलन से डरी हैं और किसानों व किसान नेताओं को हर लोकतांत्रिक अधिकार जो संविधान व संसद ने दिया हैं उस हमला कर रही है।

उन्होंने कहा कि उन्हें आज माननीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के गाँव में किसानों के बुलावे पर जाकर किसानों के हित बताकर लाए गये किसान विरोधी बिल उसके बारे में जानकारी देना था और प्रतिकात्मक रूप शान्ति पूर्वक तरीके से किसान विरोधी बिल का  विरोध करना था और उसकी प्रति जलानी थी लेकिन घर से निकलने के पूर्व ही घर का बाहर पुलिस का पहरा लगा दिया गया, जो पूरी तरह से गलत है। जब हम कोविड-19 का पालन करते हुए घर-घर अकेले घूमते और अकेले प्रतीकात्मक रूप से हम किसान विरोधी बिल की प्रति हम जलाते तो यह भी सरकार को मंजूर नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि कोविड -19 के कारण पैदा हो रहे गम्भीर बेरोजगारी के संकट के मद्देनजर मनरेगा में रोजगार व समयबद्ध मजदूरी के लिए सरकार को बड़ी तेजी से पहल लेनी चाहिए, लेकिन चकिया ब्लॉक में मिट्टी के कार्य में भी अधिकारियों के द्वारा कमीशन की मांग व मनरेगा एपीओ के अड़ियल रुख ने मनरेगा के काम में तेजी नहीं होने दे रहा है।

उन्होंने कहा कि यह किसान विरोधी कानून कारपोरेट घरानों के हित के लिए बनाया गया है। यह बिल से धीरे-धीरे समर्थन मूल्य को खत्म करेगा ही वही गरीबों के मिलने वाली राशन पर भी संकट खड़ा करेगा। सरकार का अड़ियल रुख ही है या फिर सरकार कारपोरेट घरानों के दबाव में हैं कि छ: माह से ऊपर किसान दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार समस्या को हल करने की जगह दमन कर रहीं है।

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