बाबरी मस्जिद से सम्बंधित अदालती फैसला जनतंत्रीय लोकतंत्र के लिए एक और धक्का

ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता और अवकाशप्राप्त आईपीएस एस आर दारापुरी (National spokesperson of All India People’s Front and retired IPS SR Darapuri)

सीबीआई विशेष कोर्ट के बाबरी मस्जिद से सम्बंधित निर्णय पर आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट का वक्तव्य

All India People’s Front’s statement on CBI Special Court’s decision related to Babri Masjid

लखनऊ, 30 सितंबर 2020. आज सीबीआई विशेष कोर्ट का बाबरी मस्जिद से सम्बंधित जो निर्णय आया है, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (आईपीएफ़) की नजर में वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, जनतंत्रीय लोकतंत्र के लिए एक और धक्का और फासीवादी ताकतों का मनोबल बढ़ाने वाला साबित होगा.

आज यहां जारी एक वक्तव्य में आईपीएफ़ प्रवक्ता पूर्व आईजी एस आर दारापुरी ने कहा कि कि मस्जिद गिराए जाने के पूर्व ही रथ यात्रा निकाल कर संघ/भाजपा परिवार ने बेहद साम्प्रदायिक माहौल बनाया था. देश भर में यह लगने लगा था कि इस बार संघ से सम्बंधित गिरोह के लोग बाबरी मस्जिद को गिरा देंगे और इसको गिराने में उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार पूरी तौर पर मददगार होगी. यहाँ यह भी दर्ज करने लायक है कि आईपीएफ़, सीपीएम, सीपीआई, और वी. पी. सिंह की अगुवाई वाले जनता दल ने दिसंबर, 1992 के  प्रथम सप्ताह में लखनऊ में बैठक करके उत्तर प्रदेश सरकार को लिखा था कि बाबरी मस्जिद गिरा देने की पूरी साजिश उत्तर प्रदेश सरकार के सक्रिय सहयोग से चल रही है और यदि उचित सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गयी तो निश्चय ही बाबरी म्सिजद गिरा दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि इसी अनुक्रम में 5 दिसंबर,1992 को सभी लोकतान्त्रिक, धर्मनिरपेक्ष और वाम ताकतों से अपील की गयी थी कि वे लखनऊ पहुंचें और 5 दिसंबर को चारबाग से अयोध्या कूच करें जिससे कि शांति और सम्प्रदायिक सद्भाव वाला वातावरण बनाया जाए और कथित कारसेवकों के हमले से बाबरी मसिजद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की रक्षा हो सके. तय कार्यक्रम के अनुसार चारबाग से अयोध्या के लिए मार्च किया गया. कल्याण सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, आईपीएफ राष्ट्रीय महासचिव अखिलेन्द्र प्रताप सिंह, सीपीआई नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री चतुरानन मिश्र, सीपीएम राष्ट्रीय नेता प्रकाश करात सहित सैंकड़ों नेता और कार्यकर्ताओं को बाराबंकी राम स्नेही घाट पर गिरफ्तार कर लिया था. यह भी बता दें कि बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के हज़ारों लोगों के जत्थे ने चारबाग स्टेशन पर जमे आईपीएफ कार्यकर्ताओं के ऊपर हिंसक हमला किया था जिसे कार्यकर्ताओं ने बड़ी दिलेरी और सूझबूझ से विफल कर दिया था. तात्पर्य यह है कि बाबरी मस्जिद अनायास नहीं गिरा दी गयी थी और इसके पीछे की गहरी साजिश पर पर्दा डालना लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है.

अतः आईपीएफ का यह राष्ट्रीय प्रस्ताव सीबीआई से यह् मांग करता है कि सीबीआई उच्चतर न्यायालय में पूरे साक्ष्य के साथ अपील करे जिससे लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाने वाले गुनाहगारों को सजा मिले ताकि न्याय हो सके.

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